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बीकानेर एक्सप्रेस हादसे की आपबीती:पैसेंजर बोले- झटके के साथ रुकी गाड़ी, चीख-पुकार मची; बाहर देखा तो डिब्बे एक-दूसरे पर चढ़े थे

बीकानेर5 दिन पहले

बीकानेर से मंगलवार देर रात पौने दो बजे गुवाहाटी के लिए रवाना हुई बीकानेर एक्सप्रेस जलपाईगुड़ी और मैनागुड़ी के बीच पटरी से उतर गई। हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि 45 लोग घायल हुए हैं। गाड़ी में राजस्थान के 872 लोग सवार थे। NWR पीआरओ शशिकिरण के मुताबिक 308 यात्री बीकानेर से और 564 जयपुर से चढ़े थे।

ट्रेन में सवार यात्री गंगाशहर निवासी एम.के. जैन से दैनिक भास्कर ने बात की। उन्होंने बताया कि ट्रेन चल रही थी, इसी दौरान अचानक तेज धक्का लगा और चीख पुकार मच गई। लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। वे पीछे की बोगी में थे, इसलिए बच गए।

बीकानेर से गुवाहाटी के लिए रवाना हुए एम.के. जैन ने दैनिक भास्कर से बात की तब वो दुर्घटनाग्रस्त गाड़ी के एक डिब्बे में ही थे। जैन ने बताया कि करीब पांच बजे न्यू जलपाईगुड़ी स्टेशन निकला ही था कि अचानक से गाड़ी में जोर से धक्का लगा। चीख पुकार मचने लगी। हमारा डिब्बा तो काफी पीछे था, इसलिए पलटा नहीं। धक्के के बाद संभला तो बाहर देखा। ट्रेन पटरी से उतर गई थी और एक के ऊपर एक डिब्बे चढ़े हुए थे। हम एक ही डिब्बे में चालीस से पचास लोग हैं और सभी सुरक्षित हैं। बाहर से चीखने चिल्लाने की आवाजें आ रही हैं। ना जाने कितने लोगों की मौत हुई है और कितने लोग गंभीर घायल है।

सेठिया दंपती बोले- हमारी किस्मत थी, जो बच गए
बीकानेर से ही गुवाहाटी के लिए निकले रूपचंद सेठिया और उनकी पत्नी सुशीला सेठिया ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि शाम को हम लोग आराम कर रहे थे। अचानक से एक के बाद एक चार-पांच धक्के लगे। हम संभलते उससे पहले सब कुछ शांत हो गया। कुछ देर बाद बाहर जाकर देखा तो कोहराम मचा हुआ था। हम अभी भी अपने डिब्बे में है। सीनियर सिटीजन है, ज्यादा भागदौड़ नहीं कर सकते। डिब्बे में कुछ और लोग भी हैं। थोड़ी बहुत चोट लगी है, लेकिन कोई गंभीर नहीं है। कोई कह रहा है कि इंजन पटरी से उतर गया तो कोई कह रहा है कि बीच में से डिब्बे उतर गए। हमारी किस्मत अच्छी थी जो हम बच गए।

बसंतादास बोले- डिब्बों को काटकर घायलों को निकाल रहे
मेड़ता रोड से बैठे बसंता दास ने बताया कि मैं S4 में सवार था। इसके आगे के ज्यादातर डिब्बे पलट गए। S13 में मेरा दोस्त सवार था, वो डिब्बा भी गया, लेकिन भगवान का शुक्र है कि दोस्त के चोट नहीं आई। बसंता दास ने बताया कि उन्हें आसाम जाना था।

अभी मौके से किसी पैसेंजर को जाने नहीं दिया जा रहा है। डिब्बों को काट कर घायलों को निकाला जा रहा है। एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचा रहे हैं। S7 में राजस्थान से हमारे साथ आई एक महिला भी है, उनके बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है।

बीकानेर से चढ़े थे 308 यात्री
308 लोग बीकानेर से चढ़े थे, इनमें से 117 यात्री हादसे से पहले के स्टेशनों पर उतर गए थे। हादसे के समय ट्रेन में बीकानेर से चढ़े 191 यात्री सवार थे। अभी ये स्पष्ट नहीं हुआ है कि दुर्घटना में कितने लोगों की मौत हुई है। हादसे में ट्रेन के 12 डिब्बों को नुकसान पहुंचा है। गुवाहाटी में बड़ी संख्या में बीकानेर के लोग रहते हैं। ऐसे में बीकानेर एक्सप्रेस के हर फेरे में यात्रियों की संख्या काफी ज्यादा होती है। बीकानेर से पटना व गुवाहाटी जाने वाले लोग भी इसी गाड़ी में यात्रा करते हैं।

दुर्घटना के बाद से बीकानेर के गंगाशहर में सबसे ज्यादा चिंता बढ़ गई है। दरअसल, इसी एरिया के सबसे ज्यादा लोग गुवाहाटी में रहते हैं। वायदा व्यापारी पुखराज चोपड़ा ने बताया कि इस गाड़ी में बीकानेर के काफी लोग हैं और हम उनका पता लगाने में जुटे हुए हैं। बीकानेर के अलावा नोखा से भी कुछ लोग इस गाड़ी में सवार हुए हैं।

70% यात्री बीकानेर बेल्ट से
इस गाड़ी में करीब सत्तर फीसदी यात्री बीकानेर, नोखा व नागौर से होते हैं। ज्यादातर लोग बंगाई गांव में रहते हैं। बीकानेर से जाने वाले यात्री इसी गांव की तरफ जाते हैं। इसके अलावा धूमगुड़ी, मैनागुड़ी व दामोली में भी बीकानेर व नोखा के निवासी रहते हैं।