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कार्यक्रम:सहभागिता के बिना किसी भी भाषा के विकास की परिकल्पना नहीं

बीकानेर3 दिन पहले
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सादूल राजस्थानी रिसर्च इन्स्टीट्यूट के तत्वावधान में इटली मूल के राजस्थानी भाषा के विद्वान डॉ. एल.पी तैस्सितोरी की 101वीं पुण्यतिथि पर म्यूजियम परिसर में प्रतिमा स्थल पर पुष्पांजलि कर उनके किए कार्यों को याद किया गया।अध्यक्षता करते हुए कवि-कथाकार राजेन्द्र जोशी ने कहा कि समाज की सहभागिता के बिना किसी भी भाषा के विकास की परिकल्पना नहीं की जा सकती।

मुख्य अतिथि व्यंग्यकार बुलाकी शर्मा ने कहा कि भाषा के विकास का प्रयत्न समाज की जागरूकता के बिना सम्भव नहींहै। भारत की पावन धरा पर आगमन से पूर्व डॉ. तैस्सितोरी डॉ. हर्मन जैकोबी के सौजन्य से आचार्य विजय धर्म सूरि के सम्पर्क में आए और उनसे पत्राचार द्वारा भारत भूमि की जानकारी प्राप्त की।

विशिष्ट अतिथि राजाराम स्वर्णकार ने कहा कि भाषा की उत्पति समाज से होती है। भाषा को जन-जन तक पहुंचाने में साहित्य की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। पुष्पांजलि कार्यक्रम का आयोजन गाइडलाइन के अनुसार किया गया। सभी ने डॉ. तैस्सितोरी की मूर्ति पर पुष्प अर्पित कर दो मिनट का मौन रख श्रद्धांजलि अर्पित की। आभार डॉ.कल्पना शर्मा ने माना।

डॉ. लुईजि पिऔ टैस्सीटोरी की 101वीं पुण्यतिथि पर प्रज्ञालय संस्थान एवं राजस्थानी युवा लेखक संघ द्वारा पुष्पांजलि एवं श्रद्धांजलि का आयोजन वरिष्ठ शायर जाकिर अदीब की अध्यक्षता मेंं रखा गया। कवि-कथाकार कमल रंगा के शोधपूर्ण आलेख का वाचन संस्था प्रतिनिधि हरिनारायण आचार्य ने किया।

इससे पूर्व कोरोना एडवाइजरी अनुसार पहले कमल रंगा की ओर से समाधि पर पुष्पगुच्छ अर्पित कर नमन किया गया। कार्यक्रम अध्यक्ष शायर जाकिर अदीब ने कहा कि डॉ. टैस्सीटोरी बहुभाषी, महान विद्वान और राजस्थानी भाषा मान्यता के प्रबल समर्थक थे। इस अवसर पर संस्था की ओर से हरिनारायण आचार्य, तोलाराम सारण, अशोक शर्मा, तेजश आचार्य, कृष्णकांत व्यास, चम्पालाल, सुनील चौहान, वसुंधरा आचार्य, जेठाराम आदि ने विचार व्यक्त किए।

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