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भास्कर फॉलोअप:खाजूवाला से सतराना तक फरवरी में रेकी करके गया था पंजाब का कुख्यात तस्कर

बीकानेर8 दिन पहले
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भारत-पाक सीमा पर सबसे बड़ी हेरोइन तस्करी को अंजाम देने के लिए पंजाब के कुख्यात हेरोइन तस्कर काला सिंह ने रैकी की थी। हेरोइन तस्करी के दोनों आरोपियों से पूछताछ के दौरान इस बात का खुलासा हुआ है। मामले की जांच कर रही एनसीबी की टीम को तस्कर रूपा और हरमेश ने बताया कि काला सिंह इलाके से वाकिफ था।

कैंपर गाड़ी में उन्हें लेकर आया था। बंदली पोस्ट के पास कुछ ही दूरी पर उसने गाड़ी से उतार दिया। कहा, तारबंदी के पास जाकर पत्थर फेंकना। उधर से माल आएगा। उठाकर ले आना। तस्करों ने यह भी बताया कि बीएसएफ ने गोलियां चलाई तो वे कच्चे रास्ते भागने लगे। भागते-भागते पहले काला सिंह और उसके बाद बॉस को वाट्सअप कॉल किया।

लेकिन दोनों ने ही फोन नहीं उठाया। जबकि पहले बॉस उनसे वाट्सएप कॉल के जरिए संपर्क बनाए हुए था। तस्करों ने बताया कि उन्होंने जूते भी खाजूवाला से खरीदे थे। उनसे बॉस के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। इसके नाम का खुलासा अभी नहीं हो पाया है। तस्करों के मोबाइल से कॉल डिटेल खंगाली जा रही है।

बहरहाल एनसीबी का दल तस्करों से पूछताछ में लगा हुआ है। एनसीबी के डिप्टी डायरेक्टर जनरल ज्ञानेश्वर सिंह ने भी 127 बटालियन हेडक्वार्टर पर कैंप कर रखा है। गौरतलब है कि बुधवार रात पाक तस्करों ने सीमा पार से करीब 56 किलो हेरोइन भारतीय सीमा में भेजी थी। जिसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत 283 करोड़ आंकी गई है।

भारत-पाक सीमा पर बीएसएफ का सर्च ऑपरेशन, आईजी ने किया बंदली पोस्ट पर कैंप, जीरो लाइन तक छानबीन

सबसे बड़ी हेरोइन तस्करी की घटना के बाद राजस्थान से सटी भारत-पाक सीमा पर चौकसी बढ़ा दी गई है। बीएसएफ आईजी पंकज गूमर ने बंदली पोस्ट पर शनिवार को कैंप कर सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। बीएसएफ आईजी पंकज गूमर शनिवार शाम को बंदली पोस्ट पहुंचे तथा रातभर वहीं रहे। इस दौरान उन्होंने तारबंदी का वह पाॅइंट देखा, जहां से पाक तस्करों ने हेरोइन भारतीय सीमा में भेजी थी।

वहां से जीरो लाइन तक छानबीन की। आसपास की सीमा चौकियों का भी जायजा लिया। दूरबीन से पाकिस्तान के ओपी टावर और उनकी पोस्ट पर रेंजर्स की गतिविधियां देखी। डीआईजी पुष्पेंद्र सिंह राठौड़, डीआईजी जी. मधुकर, 127 बटालियन कमांडेंट अमिताभ पंवार, डीसीजी दीपेंद्र सिंह शेखावत के अलावा सीओ खाजूवाला अंजुम कायल भी इस दौरान मौजूद रहीं।

आईजी के निर्देश पर खाजूवाला से लेकर सतराना तक सभी सीमा चौकियों पर पूरी रात सर्च ऑपरेशन चलाया गया। तस्करी की वारदात के बाद आसपास के ग्रामीण रास्तों पर भी बीएसएफ ने गश्त बढ़ा दी है। सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के बाद आईजी वापस जोधपुर लौट गए।

सीमा चौकी तक बनी पक्की सड़क का फायदा उठाकर कई बार आया तस्कर : बीएसएफ की 127 बटालियन की संग्राम और कोडेवाला सीमा चौकी के बीच फरवरी में हेरोइन तस्करी के प्रयास हुए थे। लेकिन बीएसएफ की सतर्कता के कारण तस्कर सफल नहीं हो सके। उस मामले में तस्करों का साथ देने वाले दो युवकों को संदेह के दायरे में लेकर पूछताछ भी की गई थी।

बीएसएफ के अधिकारियों को अंदेशा है कि उस वक्त काला सिंह यहां आया था। वह खाजूवाला से लेकर सतराना तक पूरे इलाके की रेकी करके गया था। बॉर्डर पर सभी सीमा चौकियों तक पक्की सड़क बनी हुई है। इसलिए गाड़ियां भी आसानी से आ जा सकती हैं। इसलिए वह कई बार यहां रेकी कर चुका है।

283 करोड़ की हेरोइन तस्करी का खुलासा करने वाली बीएसएफ टीम में किसने-क्या किया और एनसीबी की आगामी रणनीति-

1- बीएसएफ डीआईजी पुष्पेंद्र सिंह राठौड़
मुख्य रणनीतिकार, पाकिस्तान से 9 मई को तस्करी का इनपुट। फिर ऑपरेशन की प्लानिंग की। बीएसएफ की टीम से सामंजस्य कर ऑपरेशन को अंजाम दिया।

2- सतराणा कमाडेंट अमिताभ पंवार
127वीं बीएसएफ के कमांडेंट के नेतृत्व में चलाया ऑपरेशन। एक महीने बटालियन की सभी चौकियों पर सघन चौकसी कराई। खुद फील्ड में रहते।

3- द्वितीय कमान अधिकारी बाबूलाल यादव
हेरोइन तस्करी के ऑपरेशन को अंजाम देने में कमाडेंट अमिताभ पंवार के साथ सहयोगी की भूमिका में दिन-रात काम किया। बॉर्डर की अच्छी जानकारी का लाभ मिला।

4- डिप्टी कमांडेंट (सामान्य) दीपेंद्र सिंह शेखावत
हेरोइन तस्करी का इनपुट मिलने के बाद तस्करों के विरुद्ध सीमा पार से सूचनाएं जुटाई। बीएसएफ के उच्च अधिकारियों को समय पर सारी सूचनाएं देते रहे।

5- बीएसएफ जी ब्रांच के इंस्पेक्टर सुनील कुमार
तस्करों को पकड़ने में सबसे अहम भूमिका रही। गुप्त सूचनाएं जुटाते रहे। तस्करों व माफिया के निकट तक पहुंचने का काम किया, सफल साबित हुए।

6- बीएसएफ जी ब्रांच के इंस्पेक्टर ताराचंद यादव
खाजूवाला बॉर्डर के ग्रामीण इलाकों में लगातार रेकी और संदिग्ध लोगों पर नजर रखी। तस्करों के खिलाफ दिन-रात सूचनाएं जुटाने का महत्वपूर्ण काम किया।

7- जवान बीरबलराम जिसने तस्करों को पहले देखा
2 जून की रात बॉर्डर की बंदली पोस्ट पर तस्करों की गतिविधि देखी। जीरो लाइन पर पकड़ने भी गया। दो राउंड गोली चलाई। हेरोइन पकड़ी गई।

8- नारकोटिक्स ब्यूरो के डीडीजी ज्ञानेश्वर सिंह
एनसीबी के डिप्टी डायरेक्टर जनरल (डीडीजी) ज्ञानेश्वर सिंह के नेतृत्व में नारकोटिक्स ब्यूरो की टीम मामले की जांच में जुटी है। पाकिस्तान से पंजाब तक नेटवर्क तलाश रहे।

उधर, ऑपरेशन हेरोइन में शामिल 18 प्रहरियों का आईजी ने किया सम्मान
बंदली पोस्ट पर आयोजित एक कार्यक्रम में आईजी पंकज गूमर ने ऑपरेशन हेरोइन में वीरता दिखाने वाले 18 सीमा प्रहरियों का सम्मान किया। आईजी सबसे पहले बीरबलराम से मिले, जिसने तस्करों पर गोलियां चलाई थीं। उनकी पीठ थपथपाई। जवानों को संबोधित करते हुए आईजी ने कहा कि सीमा प्रहरियों के इसी अदम्य साहस के कारण हमारी सीमाएं सुरक्षित हैं।

127 बटालियन की इस वीरता के कारण देशभर में बीएसएफ का नाम रोशन हुआ है। सभी को अवार्ड दिया गया। इस मौके पर उन्होंने नीलकंठ में जवानों के आवास का उद्धाटन भी किया। द्वितीय कमान अधिकारी प्रवीण कुमार, बाबूलाल यादव, डिप्टी कमांडेंट संजय सिंह, निशा कांत चतुर्वेदी, एसएम अरविंद, इंस्पेक्टर सुनील, ताराचंद, यादव, रामेश्वर सहित सभी अधिकारी और बटालियन के जवान इस अवसर पर मौजूद थे।

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