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बीबीएमबी और पंजाब के अधिकारियों को जांच के आदेश:पंजाब में हमारा 1000 क्यूसेक पानी रोज चोरी हो रहा, इससे बीकानेर समेत 4 जिलों की प्यास बुझेगी

बीकानेरएक महीने पहले
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नहरबंदी शुरू हाेने पर जिस पानी की रखवाली के लिए राजस्थान के 10 जिलाें की पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी, तीन मुख्य अभियंता, दर्जनाें अधिशासी अभियंता जुटे थे, ठीक उसी वक्त हमारे पानी की पंजाब में खुलेआम चाेरी हाेती रही। ये सिलसिला सिर्फ नहरबंदी के समय ही शुरू नहीं हुआ बल्कि दशकाें से चल रहा है। लेकिन किसी ने आवाज नहीं उठाई और ना ही राजस्थान काे वहां चाेरी की भनक लग पाती है क्याेंकि यहां के अभियंताओं और पुलिस काे वहां गश्त कर चाेरी पकड़ने का अधिकार है।

मामला गुरुवार काे दिल्ली की हाई पावर कमेटी में केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत के सामने खुला। दाे विधायक और एक सांसद ने मंत्री काे बताया कि प्रतिदिन राजस्थान के हिस्से का करीब 1000 से 1100 क्यूसेक पानी पंजाब सीमा में चाेरी हाेता है।

मामला सामने के बाद इस मामले की मंत्री ने बीबीएमबी और पंजाब के अधिकारियों को जांच के आदेश दिए हैं। लेकिन, ताज्जुब की बात है कि नहर अभियंता कम पानी को चोरी नहीं मानते। उनका तर्क है कि जो पानी यहां कम पहुंचता है उसकी दो वजह है।

अभियंता मानते हैं कि हरिके से राजस्थान बार्डर से कुछ दूर पहले तक पंजाब की सरहिंद फीडर चलती है और पंजाब के किसान उसी से पानी लेते हैं। चूंकि वो सरहिंद से पानी लेते हैं इसलिए राजस्थान के हिस्से के पानी की चोरी नहीं हुई।

आठ साल में स्टेज रिकार्डर नहीं लग पाए

हरिके बैराज से मैन्युवल पानी मापा जाता है। राजस्थान इसका विराेध करता आ रहा है। इस वजह से 2012 में भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बाेर्ड ने स्टेज रिकार्डर लगाने का निर्णय किया था। 35 जगह स्टेज रिकार्डर लगाने के लिए कमेटी बनी थी। अाज तक रिकार्डर नहीं लग पाए। अब पानी मापने के लिए स्काडा सिस्टम लगने लगे। राजस्थान अब स्काडा की मांग कर रहा है।

हमने केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री के समक्ष पंजाब सीमा में हाेने वाली पानी चाेरी का मुद्दा उठाया है। आखिर क्याें हरिके से छाेड़ा गया पूरा पानी राजस्थान तक नहीं अाता। इस मामले की जांच हाे रही है। पानी की कमी से पश्चिमी राजस्थान के किसान परेशान हो रहे हैं, जबकि पंजाब हमारा हक मार लेता है।
बिहारीलाल बिश्नाेई, विधायक नाेखा

पंजाब में पानी चोरी की शिकायत मेरे संज्ञान में कभी नहीं आई। गुंजाइश भी नहीं है क्याेंकि उनके पास पानी की कमी नहीं। बराबर पर सरहिंद फीडर चलती है। पानी का अंतर मैन्युवली और स्काडा सिस्टम से पानी मापने और छीजत की वजह से हाेती है। जांच कराने की मुझे जानकारी नहीं है।
विनाेद मित्तल, मुख्य अभियंता, आईजीएनपी

यूं समझें 1000 क्यूसेक पानी का गणित

  • अगर सिंचाई का पानी दिया जाए और तीन समूह की बारी हो तो जैसलमेर के इलाके की खेती 1000 क्यूसेक से सिंचित हो सकती है।
  • अगर पीने के लिहाज से देखें तो 1000 क्यूसेक में बीकानेर, नागौर, चूरू और झुंझुनूं जिले की प्यास बुझाई जा सकती है।

जनप्रतिनिधियाें का तर्क : पंजाब में पंप से सिंचाई करने का फार्मूला मान्य है। सरहिंद फीडर हरिके डैम से दाईं ओर चलती है और राजस्थान फीडर बाईं। बाईं तरफ के किसान पंप लगाकर राजस्थान फीडर से पानी लेते हैं। इसीलिए हरिके से छाेड़ा गया पानी राजस्थान फीडर तक आते-आते 1000 से 1200 क्यूसेक तक कम हाे जाता है।

अभियंताओं का तर्क : हरिके से पानी का आकलन मैन्युवल हाेता है। राजस्थान सीमा के 496 आरडी पर स्काडा सिस्टम से पानी मापा जाता है। मैन्युवल और स्काडा के बीच माप में गैप की वजह से अंतर है। नहर की लाइनिंग कमजोर होने की वजह से भी छीजत हाेती है। इस वजह से ये अंतर आता है। अभियंताओं का कहना है राजस्थान फीडर में चोरी की
गुंजाइश नहीं है।

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