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ऑक्सीजन बचाने के लिए नई पहल:बीकानेर में ऑक्सीजन की बर्बादी रोकने के लिए बनाए ‘ऑक्सीजन मित्र’, हर रोज बचा रहे करीब 200 सिलेंडर

बीकानेर8 दिन पहले
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PBM अस्पताल में  ऑक्सीजन मित्र कर रहे मॉनिटरिंग। - Dainik Bhaskar
PBM अस्पताल में ऑक्सीजन मित्र कर रहे मॉनिटरिंग।

एक तरफ देश में मेडिकल ऑक्सीजन की कमी से हर रोज सैकड़ों लोगों की जान जा रही है। वहीं बीकानेर में ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए नई पहल शुरू की है। यहां जिले के हर कोविड केयर सेंटर में ‘ऑक्सीजन मित्र’ बनाए गए हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा ऑक्सीजन की बर्बादी को रोका जा सके। इस नए प्रयोग से जिले में हर रोज करीब 200 सिलेंडर की बचत हो रही है। इस बची ऑक्सीजन से दूसरे मरीजों की जान भी बच रही है।

पिछले दिनों बीकानेर में जब ऑक्सीजन की खपत बढ़ने लगी तो कलेक्टर नमित मेहता ने विशेषज्ञों के साथ बातचीत की। पता चला कि कई तरह की लापरवाही के चलते भी बीकानेर में ऑक्सीजन बर्बाद हो रही है। इसे बचाने के लिए एक रणनीति बनाई गई। इसी के तहत ऑक्सीजन वितरण में ‘थ्री लेयर सिक्योरिटी’ सिस्टम लागू किया गया। इसी का परिणाम अब पॉजिटिव मिलने लगा है।

प्रशासन ने तय किया कि किसी भी कीमत पर ऑक्सीजन की बर्बादी नहीं होने दी जाएगी। इसे ध्यान रखते हुए एक-एक बैड की मॉनिटरिंग के मद्देनजर योजना तैयार की गई। ऊपरी स्तर पर वरिष्ठ आरएएस अधिकारियों को पूरी व्यवस्था के पर्यवेक्षण का जिम्मा दिया गया। वहीं राउंड द क्लॉक तीन पारियों में जिला स्तरीय अधिकारियों की टीम एमसीएच विंग के ‘वार रूम’ में तैनात की गई, जो सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से ऑक्सीजन की सप्लाई और अपव्यय पर नजर रख सकें। इससे प्रशासनिक अधिकारियों और चिकित्सकों में समन्वय बढ़ा और छोटी-छोटी समस्या का त्वरित समाधान होने लगा।

मजबूत कड़ी साबित हो रहे ‘ऑक्सीजन मित्र’
ऑक्सीजन की बर्बादी रोकने में ‘ऑक्सीजन मित्र’ सबसे मजबूत कड़ी साबित हो रहे हैं। लगभग 100 नर्सिंग स्टूडेंट्स को ‘ऑक्सीजन मित्र’ नियुक्त किया गया है। आठ-आठ घंटे की तीन पारियों में तैनात ‘ऑक्सीजन मित्र’ को ऑक्सीजन फ्लो मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये बैड-टू-बैड नजर रखते हुए मरीज की आवश्यकता के अनुसार ऑक्सीजन का फ्लो मेंटेन करते हैं। यानि जरूरत से ज्यादा फ्लो में ऑक्सीजन है तो उसे कम करना और आवश्यकता की तुलना में धीमे है, तो उसे बढ़ाना।

मरीजों के परिजन को भी समझाते हैं
ऑक्सीजन मित्र अपव्यय करने वाले मरीजों और उनके परिजनों से समझाइश भी करते हैं। इससे भी ऑक्सीजन बचत में प्रभावी सहयोग मिला है। एक और व्यवस्था करते हुए पीबीएम अस्पताल द्वारा लगभग 20 चिकित्सकों को भी पारी के आधार पर राउंड द क्लॉक नियुक्त किया गया है, जिससे ‘ऑक्सीजन मित्रों’ की मॉनिटरिंग की जा सके और किसी स्तर पर रहने वाली कमी को तत्काल दूर किया जा सके।

हर रोज इतनी बचत
इन सभी प्रयासों से वर्तमान में एमसीएच विंग के ऑक्सीजन प्लांट में प्रतिदिन लगभग दो सौ सिलेण्डर की बचत होने लगी है। पीबीएम अधीक्षक ने बताया कि पूर्व में जहां इस प्लांट पर 800 सिलेण्डर की खपत होती थी, वहीं अब 600 सिलेंडर ही लग रहे हैं। जिला कलक्टर इसकी भी नियमित समीक्षा भी करते हैं। ऑक्सीजन प्लांट का नियमित निरीक्षण और वरिष्ठ चिकित्सकों के साथ बैठकें करने के साथ इस व्यवस्था के तहत ऑक्सीजन के अपव्यय को रोकने के सतत प्रयास किए जा रहे हैं।

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