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हिमाचल में बारिश:तीन दिन में 14 फीट भरा पाैंग डैम, पिछले साल से 43 फीट कम इसलिए सिंचाई के लिए पानी पर बना संशय

बीकानेर12 दिन पहले
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  • इसी सप्ताह हाेगी पानी की समीक्षा- तब हाेगा फैसला कि सिंचाई का पानी मिलेगा या नहीं

1279 फीट तक पहुंच चुके पाैंग डेम के जलस्तर में तीन दिन पहले हिमाचल प्रदेश में हुई मूसलाधारा पानी ने ऑक्सीजन का काम किया और बीते तीन दिनाें में डेम 14 फीट भर गया। बुधवार काे डेम का जलस्तर 1293 फीट तक पहुंच गया। दाे दिन पहले सवा लाख क्यूसेक पानी की आवक हुई थी लेकिन अब वापस घटकर 42 हजार क्यूसेक रह गई। चूंकि पानी की निकासी 8800 क्यूसेक ही है इसलिए राहत इस बात की है कि अभी भी प्रति दिन करीब 34 हजार क्यूसेक पानी डेम जमा हाे रहा है।

इस लिहाज से पेयजल पर मंडरा रहा संकट ताे दूर हाे गया क्याेंकि अब पश्चिमी राजस्थान के 10 जिलाें में पीने के पानी कि किल्लत नहीं हाेगी लेकिन सिंचाग के पानी पर अभी भी संशय की स्थिति बनी हुई है। इसकी सबसे बड़ी वजह डेम का 1400 फीट तक भरा जाना है। पिछले साल 14 जुलाई काे पाैंग डेम का जलस्तर 1336 फीट था जबकि इस साल अभी तक 1293 फीट तक ही पानी पहुंचा है।

अब पानी के मैनेजमेंट से जुड़े अधिकारी इस संशय में हैं कि जितना पानी आ रहा है अगर निकासी ज्यादा कर दें और बाद में मानसून ने साथ नहीं दिया ताे आगे सालभर कैसे काम काम चलाएंगे। दूसरी ओर किसान लगातार सिंचाग के पानी की मांग कर रहे हैं। इसलिए इसी सप्ताह बीबीएमबी के अधिकारी तीन राज्याें के अभियंताओं के साथ पानी की समीक्षा कर आगे की स्थिति स्पष्ट करेंगे।

वाे 3 संशय जिसका सीधा हमसे वास्ता

पानी दिया और मानसून ने साथ नहीं दिया तब क्या

अभी मानसून ने एक झटका दिया ताे डेम तीन दिन में 14 फीट भर गया। ऐसी ही पानी की आवक काे देखते हुए अगर सिंचाई का पानी देना शुरू कर दिया और मानसून ने फिर साथ नहीं दिया ताे पूरे आने वाले सालभर पीने का पानी कैसे सप्लाई किया जाएगा। रबी की फसल काे भी तीन समूह से ज्यादा पानी देने की स्थिति में डेम नहीं हाेगा क्याेंकि रबी में चार समूह में पानी और सालभर पीने का पानी तभी दिया जा सकता जब डेम में पानी 1400 फीट तक पहुंचे।

पानी नहीं दिया और पीछे से ज्यादा पानी आया ताे

दूसरी उलझन ये है कि अगर साल भर तक के लिए पानी बचाने के लिए खरीफ में पानी नहीं दिया और मानसून अच्छा हाेने पर ज्यादा पानी आ गया ताे पंजाब के कुछ इलाकाें काे डूबने से बचाने के लिए पानी पाकिस्तान छाेड़ना हाेगा। जिसकी आलाेचना देशभर में हाेती रही है। ऊपर से किसानाें की नाराजगी झेलनी हाेगी साे अलग। हालांकि बीकानेर, जैसलमेर, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में अच्छी बारिश हाेती है ताे नहरी पानी पर आधारित फसलाें की सिंचाई का भार कम हाे जाएगा।

खरीफ का पानी मिले और मानसून से डैम भी भरे

ये सबसे सुकून भरा संशय है लेकिन मानसून आगे काैन सी करवट लेगा। हालांकि ज्यादातर अभियंता इस पक्ष में हैं कि मानसून ने अच्छे संकेत दिए हैं इसलिए जितना पानी डेम में आता जाए उस लिहाज से किसानाें काे खरीफ का पानी दिया जाए ताकि उनकाे नुकसान ना हाे। मानसून आएगा ताे डेम भी पूरा भर जाएगा। अगर इस आधार पर आगे बढ़ेंगे तो किसानों को भी राहत और बीबीएमबी को भी।

एक्सपर्ट व्यू : सिंचाई पानी ना मिले सिर्फ दाे बारिश समय पर हाे जाए ताे पक जाएंगी चारों फसलें : भले ही सिंचाई विभाग पानी देने पर इतनी माथा पच्ची कर रहा हाे लेकिन समय पर सिर्फ दाे बारिश ही हाे जाएं ताे हमारी चार फसलें पककर तैयार हाे जाएंगी। दरअसल मूंग, माेठ और बाजरा काे बिजाई के बाद दाे से तीन सिंचाई की जरूरत हाेती है।

पहली सिंचाई बढ़वार पर, दूसरी फलियां बनने। बीच में तीसरी बारिश हाे जाए ताे साेने पर सुहागा वरना दाे सिंचाई में ही फसलें पक जाएंगी। कमाेबेस स्थिति ही ग्वार की है। ग्वार काे ताे भी तीन सिंचाई की जरूरत हाेती है। 15 जुलाई से 15 अगस्त तक किसान इन चाराें फसलाें की बिजाई कर सकता है।

मूंग, माेठ, ग्वार और बाजरा काे सिर्फ दाे से तीन सिंचाई की ही जरूरत है। अगर मानसून ही दाे बारिश जरूरत के समय पर हाे जाएं ताे किसान काे नहरी पानी पर निर्भर रहने की जरूरत नही हाेगी। नहरी पानी वाले किसानाें काे नहर से मिलने वाला सिंचाई का पानी स्थायित्व देता है लेकिन बारानी का किसान रिस्क पर बिजाई करता है। कभी बार उसकी फसलें सिंचाई के बिना सूख जाती हैं ताे कई बार अच्छी पैदावार हाेती है।
रामकिशाेर मेहरा, सहायक निदेशक कृषि विभाग

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