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पीएचईडी:पायलट प्रोजेक्ट की तकनीकी स्वीकृति के लिए भेजा प्रस्ताव, अगले हफ्ते मिल सकती है मंजूरी

बीकानेर5 दिन पहले
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जलदाय विभाग के अधिकारी अब नहर बंदी खत्म होने से पानी को लेकर राहत महसूस कर रहे हैं और यही वजह है कि अब उनका ध्यान दूसरे प्रोजेक्ट पर आ गया है। वर्ष 2050 तक की आबादी की प्यास बुझाने के लिए जो प्रस्ताव मंजूर हो चुका है। अब उसके टेंडर और तकनीकी स्वीकृति पूरी कराने में जुट गए हैं।

प्रस्ताव को वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृति पहले ही मिल चुकी है लेकिन तकनीकी स्वीकृति बाकी है। जलदाय विभाग ने यह प्रस्ताव बनाकर जयपुर भेज दिया है। अगले सप्ताह तकनीकी स्वीकृति कमेटी की बैठक होगी जिसमें प्रस्ताव के मंजूर होने की उम्मीद है। इस कमेटी की बैठक हर सप्ताह होती है पर अगर अगले सप्ताह इसे शामिल नहीं किया गया तो उसके अगले सप्ताह शामिल होना तय है।

माना जा रहा है कि जैसे ही तकनीकी स्वीकृति पूरी होगी उसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी। जलदाय विभाग के अधिकारियों का प्रयास है कि 15 अगस्त तक टेंडर प्रक्रिया पूरी हो जाए ताकि अगले साल की शुरुआत में शहर में काम शुरू हो जाए।

उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2050 तक की आबादी की प्यास बुझाने के लिए 978 करोड रुपए का प्रस्ताव मंजूर किया था। जिसका पहले चरण का काम 542 करोड़ रुपए का होगा। पहले चरण में शहर की सभी पुरानी पाइप लाइन बदलने के साथ नई टंकियां बनाना और प्राइवेट कॉलोनी तक पानी पहुंचाना है।

इससे पहले बीछवाल और शोभासर में दो नए जलाशय तैयार होंगे। क्योंकि अभी जो स्ट्रक्चर है वह वर्ष 2022 तक की प्यास बुझाने के लिए ही है। उसके बाद शहर में पेयजल किल्लत शुरू होगी। हालांकि किल्लत अभी से शुरु हो गई है लेकिन समय पर प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद राहत मिलेगी क्योंकि अभी भी शहर में ऐसे कई इलाके हैं जहां पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। जलदाय विभाग की कोशिश है कि पायलट प्रोजेक्ट बनने के बाद पानी की किल्लत दूर हो जाए।

काम शुरू होने के बाद भी 4 साल तक पानी का संकट बना रहेगा
पायलट प्रोजेक्ट का काम अगले वर्ष की शुरुआत में शुरू होने की उम्मीद है लेकिन इसे खत्म होते-होते करीब 4 साल लग जाएंगे। ऐसे में 2022 से 2025-26 तक पेयजल किल्लत को लेकर मारामारी हो सकती है। क्योंकि नई व्यवस्था लागू होने से शहर में कई जगह खुदाई का काम चलेगा, टंकियां बनेंगी। इस पूरे काम को होते-होते 4 साल लगेंगे। यानी शहर वासियों को पीने के पानी को लेकर अभी तीन-चार साल किलत और झेलनी होगी लेकिन उसके बाद 2050 तक राहत मिलेगी।

तकनीकी स्वीकृति के लिए हमने प्रस्ताव जयपुर पर भेज दिए हैं। उम्मीद है कि जल्दी ही इस पर स्वीकृति मिल जाएगी। स्वीकृति मिलने के बाद हम टेंडर प्रक्रिया शुरू करेंगे और हमारी कोशिश है कि अगस्त सितंबर तक टेंडर लग जाएं।-दीपक बंसल, अधीक्षण अभियंता, जलदाय विभाग

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