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राजस्थान में 9-12वीं का सिलेबस घटा:फिजिक्स में नहीं पढ़ाया जाएगा न्यूटन लॉ, टीचर बोले- स्टूडेंट्स कंजरवेशन ऑफ मोमेंटम कैसे समझेंगे?

बीकानेर7 महीने पहले
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राजस्थान सेकेंड्री एजुकेशन बोर्ड ने 9वीं से 12वीं तक के सिलेबस में कई बदलाव किए हैं। - Dainik Bhaskar
राजस्थान सेकेंड्री एजुकेशन बोर्ड ने 9वीं से 12वीं तक के सिलेबस में कई बदलाव किए हैं।
  • राजस्थान बोर्ड के बदलाव से टीचर्स नाराज, कोरोना के चलते सिलेबस 40% घटाया गया है
  • बोर्ड ने कई जरूरी कंटेंट कम किए, टीचर्स बोले- कंटेंट की जगह पूरे चैप्टर को कम करना चाहिए था

राजस्थान सेकेंड्री एजुकेशन बोर्ड ने कोविड-19 के चलते क्लास 9-12 तक के सिलेबस में बड़ा बदलाव किया है। सिलेबस 30 से 40% कम कर दिया गया है। इसमें कई जरूरी टॉपिक्स भी हटा दिए गए हैं। इसको लेकर अब विवाद शुरू हो गया है। टीचर्स ने बोर्ड के इस फैसले पर नाराजगी जताई है।

टीचर्स का कहना है कि सेंट्रल बोर्ड और सेकेंड्री एजुकेशन (CBSE) ने भी सिलेबस को शॉर्ट किया है, लेकिन सोच-समझकर किया। बोर्ड ने सभी विषयों के लास्ट चैप्टर हटाए हैं। इसके उलट राजस्थान बोर्ड ने चैप्टर हटाने की बजाय उसके अंदर से कंटेंट कम किए हैं। इसमें कई कंटेंट ऐसे हैं, जिनके बगैर अगले चैप्टर को स्टूडेंट्स समझ ही नहीं सकते।

न्यूटन को ही हटा दिया, आगे कैसे पढ़ेंगे?
राजस्थान बोर्ड ने 12वीं के फिजिक्स से न्यूटन के नियम 1, 2 और 3 हटा दिए गए हैं। वहीं, कंजरवेशन ऑफ मोमेंटम (संवेग का संरक्षण) को शामिल किया है। अगर कंजरवेशन ऑफ मोमेंटम को पढ़ना है तो न्यूटन के नियम को भी समझना होगा। स्टूडेंट्स को न्यूटन के नियम को पढ़ाना जरूरी है।

इसी तरह ओम का नियम भी सिलेबस से हटा दिया है। जबकि, उसकी एप्लीकेशन को रखा गया है। ओम की एप्लीकेशन तभी स्टूडेंट्स की समझ में आएगी, जब वह ओम का नियम पढ़ेंगे इसलिए सिलेबस शॉर्ट करने का मकसद यहां भी फेल हो गया। फिजिक्स के टीचर पुनीत किराडू कहते हैं कि कंटेंट की बजाय सीधे चैप्टर कम करने चाहिए थे।

जिस कंटेंट से पूरा चैप्टर है, उसी को हटा दिया
केमिस्ट्री में ‘वांट हॉफ फैक्टर’ को हटाया गया है। इसी फैक्टर से जुड़े अन्य चैप्टर सिलेबस में हैं। केमिस्ट्री के टीचर पवन शर्मा का कहना है कि जब मूल फैक्टर को ही नहीं पढ़ा जाएगा तो स्टूडेंट्स को फिजिकल केमेस्ट्री के अन्य चैप्टर कैसे समझ आएंगे?

इलेक्ट्रिक करंट सबसे महत्वपूर्ण था क्लास 10 के साइंस टीचर कमलेश शर्मा कहते हैं कि 10वीं में इलेक्ट्रिक करंट चैप्टर हटा दिया गया है, जबकि यह चैप्टर सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। खासकर उन बच्चों के लिए जो आगे चलकर साइंस में अपना कॅरियर बनाना चाहते हैं। इसके बजाय दूसरे चैप्टर हटाए जा सकते थे। शर्मा के मुताबिक, यहां भी चैप्टर कम करने की बजाय कई कंटेंट घटा दिए गए हैं।

फिर बच्चे इकोनॉमिक्स​​​​​​ कब समझेंगे?
क्लास 10 में सोशल साइंस के टीचर पुनीत पारीक कहते हैं कि 10वीं के 20 में से 19 चैप्टर पूरी पुराने पैटर्न पर ही हैं। इसमें इकोनॉमिक्स का इंपॉर्टेंट चैप्टर हटा दिया गया है। आमतौर पर स्टूडेंट्स 10वीं के बाद ऐसा सब्जेक्ट नहीं लेते हैं। ऐसे स्टूडेंट्स को इकोनॉमिक्स का इंपोर्टेंस नहीं मालूम चल पाएगा।

जो चैप्टर हटे हैं, उसे NTA को भी हटाना चाहिए
बॉटनी के एक्सपर्ट जेठमल सुथार ने कहा कि राजस्थान बोर्ड ने जिन चैप्टर्स या टॉपिक्स को सिलेबस से बाहर किया है उसमें से ज्यादातर NEET और JEE में पूछे जाते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) इन चैप्टर्स या टॉपिक्स को अपने सिलेबस से हटा दे।

75% स्कूलों में नहीं हुई पढ़ाई

राजस्थान एजुकेशन डिपार्टमेंट के पूर्व संयुक्त निदेशक विजय शंकर आचार्य का कहना है कि राजस्थान के 75% स्कूल गांवों में है। यहां स्टूडेंट्स की संख्या भी ज्यादा है। इन ग्रामीण स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई भी नहीं हुई। सरकार को इसका ख्याल रखना होगा।

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