राजस्थान में बिसलेरी का विरोध:मटके की जगह पानी की बोतल की ब्रांडिंग पर भड़के शिक्षक, कहा- ऊंट हमसे ज्यादा समझदार कैसे

बीकानेर6 महीने पहलेलेखक: अनुराग हर्ष
ये स्क्रीन शॉट बिसलेरी के विज्ञापन का है, जिसे सोशल मीडिया से लिया गया है। इसी एड पर शिक्षक नाराज हैं।

बिसलेरी के विज्ञापन ने राजस्थान के शिक्षकों का पारा चढ़ा दिया है। शिक्षकों का कहना है कि विज्ञापन में टीचर्स को मुर्ख बताने की कोशिश की गई है। साथ ही घड़े की जगह पानी के बॉटल का प्रचार कर गरीबों का अपमान किया जा रहा है।

आमतौर पर कॉरपोरेट कंपनियों के विज्ञापन आम आदमी को सीख देने वाले होते हैं। लेकिन इस बार बिसलेरी का विज्ञापन टीचर्स की नाराजगी का कारण बन गया है। टीचर्स का कहना है कि विज्ञापन में न सिर्फ शिक्षकों के प्रति आपत्तिजनक भाषा बोली गई है, बल्कि उनके ज्ञान पर भी सवाल खड़ा किया गया है।

विज्ञापन में ऊंटों को स्टूडेंट्स के तौर पर दिखाया गया, जो अपने टीचर को हे! मास्टर का संबोधन कर रहे हैं और उन्हें "कांटेक्टलेस" शब्द के बारे में जानकारी नहीं होने का मखौल उड़ा रहे हैं। विज्ञापन में मटके के पानी का भी मजाक उड़ाया गया है। शिक्षक संगठनों ने इस विज्ञापन को मूर्खता भरा बताते हुए बिसलेरी का बहिष्कार करने की घोषणा की है।

रेतीले धोरों के बीच फिल्माया गया विज्ञापन
रेतीले धोरों के बीच फिल्माए इस विज्ञापन के विरोध में सोशल मीडिया पर #boycottbisleri अब ट्रेंड करने लगा है। राजस्थान के अलावा गुजरात के टीचर्स भी इस हैशटैग को आगे बढ़ा रहे हैं। गुजरात के प्राथमिक शिक्षक महासंघ के पत्र का हवाला देते सोशल मीडिया यूजर निखिल दर्जी लिखते हैं- उसका मजाक न उड़ाएं जिसने आपको जीवन की मूल बातें सिखाई हैं। जयपुर के अनिल गुप्ता ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा- अब बिसलेरी को बाय-बाय कहने का वक्त आ गया है। हमें अपने स्थानीय ब्रांड का उपयोग करना चाहिए।

शिक्षकों के सम्मान में धौलपुर कलेक्टर ने कोविड सेंटर में मटके रखकर यह संदेश दिया कि इससे शुद्ध पानी कहां है?
शिक्षकों के सम्मान में धौलपुर कलेक्टर ने कोविड सेंटर में मटके रखकर यह संदेश दिया कि इससे शुद्ध पानी कहां है?

धौलपुर कलेक्टर भी बोले #boycottbisleri
उधर धौलपुर कलेक्टर आर.के. जायसवाल ने भी बुधवार को सोशल मीडिया पर #boycottbisleri अभियान का समर्थन किया। जायसवाल ने मटकों का फोटो शेयर करते हुए लिखा- सदियों से पीते आ रहे हैं मटका का पानी... मटके हैं भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा... कोविड केयर सेंटर पर भी मटकों के माध्यम से की गई है पीने के पानी की व्यवस्था... न केवल ठंडा पानी मिलेगा बल्कि जीवाणु रहित भी होगा। उन्होंने हिन्दी और इंग्लिश दोनों भाषा में #boycottbisleri लिखकर अपना विरोध दर्ज कराया है।

शिक्षक संगठन भी आए विरोध में, कहा- वापस लिया जाए विज्ञापन
उधर, शिक्षक संगठनों ने भी इस विज्ञापन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर दी है। राज्य के शिक्षक नेता कल्याण सिंह टेवाली ने भी इस कैंपन का समर्थन करते हुए कहा है कि देश के सभी शिक्षक इसका विरोध कर रहे हैं और कंपनी को विज्ञापन वापस लेने के लिए कह रहे हैं। वहीं, राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत के प्रदेश मंत्री श्रवण पुरोहित का कहना है कि इस विज्ञापन पर रोक लगनी चाहिए।

राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष भेरुराम चौधरी ने कहा है कि शिक्षक के साथ राजस्थान की संस्कृति का अपमान किया गया है। मटके के पानी में सारे सॉल्ट उपलब्ध होते हैं। राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रदेश मंत्री रवि आचार्य का कहना है कि हम तो खुद मटके का पानी पीते रहे हैं। ऐसे में राजस्थान की संस्कृति का मखौल न उड़ाएं। शिक्षक ने ही आपको पढ़ना सिखाया, उसी का मजाक उड़ाना निंदनीय है।

राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री को भी शिक्षकों ने लिखा पत्र

शिक्षकों ने सीएम को पत्र लिखकर विज्ञापन पर प्रतिबंध की मांग की है।
शिक्षकों ने सीएम को पत्र लिखकर विज्ञापन पर प्रतिबंध की मांग की है।

इस मामले में राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ ने राष्ट्रपति के नाम पत्र लिखा है। इसमें बिसलेरी कंपनी द्वारा शिक्षकों से माफी मांगने और विज्ञापन को प्रसारित करने वालों पर कार्रवाई करने की मांग की है। वहीं, राजस्थान प्राइवेट एजुकेशन महासंघ अजमेर ने मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखा है। इसमें विज्ञापन पर तुरंत प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है। उन्होंने इस विज्ञापन को शिक्षकों की छवि खराब करने वाला बताया है।

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