8 दुर्लभ योग में कृष्ण जन्माष्टमी आज:संयोग स्मार्त-वैष्णव एक ही दिन मनाएंगे, सूर्याेदय से रात 1:59 बजे तक रहेगी अष्टमी

बीकानेर9 महीने पहले
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  • मध्यरात्रि 12 बजे कृष्ण जन्म के समय रोहिणी नक्षत्र, हर्षण योग, तैतिल करण व वृषभ राशि के चंद्रमा रहेंगे साक्षी।

इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 30 अगस्त सोमवार को सूर्योदय कालीन अष्टमी है जो रात 1:59 बजे तक रहेगी। अर्द्धरात्रि व्यापिनी रोहिणी नक्षत्र भी दूसरे दिन सुबह 9:43 बजे तक रहेगा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर 30 अगस्त को इस बार मंगलादित्य, लक्ष्मी नारायण योग व सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग भी रहेगा। इस दिन ग्रह-नक्षत्रों के ऐसे योग बन रहे हैं जैसे द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय मौजूद थे।

ज्याेतिर्विद पंडित हरिनारायण व्यास मन्नासा के अनुसार ग्रह गोचर की गणना से देखें तो वर्तमान में सूर्य सिंह राशि में परिभ्रमण कर रहे हैं। संयोग से मंगल भी इसी राशि में परिभ्रमण करते हुए सूर्य के साथ मंगलादित्य योग बना रहे हैं। ज्योतिषशास्त्र की मान्यता के अनुसार सूर्य स्वयं की राशि सिंह में होते हैं, तो प्रबल माने जाते हैं। मंगल के साथ सूर्य की मित्रता होने से भी एक राशि में दोनों की मौजूदगी शुभ परिणाम देने वाली मानी गई है। ऐसे में सूर्य व मंगल की प्रधानता वाली जन्माष्टमी इस बार विशेष मानी जा रही है। जप, तप, व्रत व नियमन में इसका प्रभाव महाफलदायी रहेगा।

भविष्याेत्तर पुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण युधिष्ठिर काे कहते हैं, 20 कराेड़ एकादशी व्रताें के समान अकेले जन्माष्टम व्रत है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार धर्मराज सावित्री से कहते हैं भारत वर्ष में रहने वाला जाे प्राणी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत करता है वहं 100 जन्माें के पापाें से मुक्त हाे जाता है। इस बार स्मार्त और वैष्णव दोनों मत के श्रद्धालु एक ही दिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाएंगे।

लक्ष्मीनाथ मंदिर में रात 8:30 बजे से श्रद्धाुलओं की एंट्री बंद
नगर सेठ लक्ष्मीनाथ मंदिर में भी जन्माष्टमी की तैयारियां पूरी कर ली गई है। पुजारी नितिन सेवग के अनुसार मंदिर रात 8.30 बजे तक खुला रहेगा। आधी रात को मंदिर में विधि विधान से पूजा-अर्चना होगी लेकिन श्रद्धालुओं को एंट्री नहीं दी जाएगी। दूसरी ओर बड़ा गाेपालजी मंदिर दम्माणी चाैक में जन्माष्टमी महोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।

इस अवसर पर श्रीकृष्ण भगवान चांदी के झूले में विराजमान हाेंगे। ट्रस्टी नारायण व्यास के अनुसार प्रभु गोपाल जी का अभिषेक होगा। प्रतिमाएं सोने के गहनों से श्रंगारित होंगी। 56 भोग प्रसाद का प्रसाद चढ़ाया जाएगा। ट्रस्ट सदस्य गोपाल व्यास के अनुसार मन्दिर परिसर को प्रकाशमय किया गया है।

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