भ्रष्टाचार का रिकॉर्ड:SHO ने कहा- मैं ही कमलेश चंद्रा हूं, आपको दो टप्पे की बात बता रहा हूं, सारा लिखकर दोगे तो आपका काम हो जाएगा

बीकानेर2 महीने पहलेलेखक: नवीन शर्मा
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अरविंद भारद्वाज, एसएचओ, जेएनवीसी। - Dainik Bhaskar
अरविंद भारद्वाज, एसएचओ, जेएनवीसी।

दस करोड़ की जमीन हथियाने के खेल में खाकी दागदार हो गई। एसीबी ने जेएनवीसी एसएचओ और तीनों दलालों से तीन मीटिंग में बहुत सारी बातें रिकॉर्ड कर लीं, जिनसे यह साबित हो रहा है कि भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। सबसे खास बात ये है कि इस एपिसोड से पुलिस के बड़े सटोरियों के साथ कनेक्शन भी सामने आए हैं। पवनपुरी में रहने वाले रियल एस्टेट कारोबारी निर्मल कामरा ने अपने परिवाद में कई खुलासे किए हैं।

डीएलसी रेट के हिसाब से जमीन की कीमत छह करोड़ है, लेकिन बाजार दर पर वह जमीन दस करोड़ की है। उसे हड़पने के लिए जेएनवीसी और कोटगेट एसएचओ कामरा, उसके पुत्र शेखर और पत्नी ममता पर सटोरिए सुखेदव और मनीष भाटी के मार्फत दबाव बना रहे हैं। उसने आशंका जताई है कि यदि इस्तीफा लिखकर नहीं दिया तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। परिवादी ने एएसपी के रीडर रामदेव और दो मुकदमों में जांच अधिकारी एएसआई आनंद मिश्रा पर भी इस्तीफे के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है।

कमलेश के पिता रामचंद्रा की ओर से शपथ पत्र का एक मेल भी परिवादी को करने की बात सामने आई है। कामरा का कहना है कि पुलिस को पता चला तो मेल कंप्यूटर से डिलीट करा दिए, लेकिन उससे पहले ही वह मेल डीजी बीएल सोनी, एडीजी एसीबी दिनेश एमएन और हाईकोर्ट रजिस्ट्रार को भेज चुका था। आपको बता दें, एसपी प्रीति चंद्रा के भाई कमलेश चंद्रा को बीकानेर में एक बड़ा स्कूल खोलना था।

कामरा के पास श्रीगंगानगर बाइपास पर जमीन थी। दोनों के बीच 2012 में 10.65 बीघा के लिए डील हुई। जमीन चंद्रा की कंपनी ग्लोबल एजुकेशन वैलफेयर सोसायटी को दी गई। स्कूल की फीस में कामरा का हिस्सा 22.50% तय किया गया। चंद्रा की कंपनी में कामरा को उपाध्यक्ष, उसके साले भूपेंद्र कुमार मिढ्‌ढा को उप सचिव और दोस्त शिवकुमार चांडक को कोषाध्यक्ष बनाया गया। कंपनी के अध्यक्ष कमलेश चंद्रा और पत्नी संजना को सचिव बनाया गया था।

रियल एस्टेट कारोबारी पर इस्तीफे के दबाव का मामला: ये 4 बड़े किरदार

अरविंद भारद्वाज, एसएचओ, जेएनवीसी- परिवादी से इस्तीफा दिलवाने का प्रयास करने में मुख्य भूमिका।

सुखदेव चायल, दलाल- इस्तीफे के लिए दबाव बनाया। परिवादी को धमकाने का आरोप।

विजय, दलाल- इस्तीफे को लेकर परिवादी- पुलिस के बीच मध्यस्था की भूमिका।

भूपेंद्र शर्मा, दलाल- एसएचओ अरविंद भारद्वाज से मिलाया। इस्तीफे पर दबाव बनाया।

3 सवाल मांग रहे जवाब
1. जब कमलेश चंद्रा ने इस्तीफा मांगा नहीं तो पुलिस निर्मल कामरा पर क्यों दबाव डाल रही थी।
2. निर्मल कामरा को एसीबी में एफआईआर कराने की जरूरत क्यों पड़ी। क्या वास्तव में वह पुलिस पर मुकदमे उठाने का दबाव बना रहा है।
3. पुलिस इंस्पेक्टर और तीन व्यक्तियों की रिकॉर्डिंग में केवल मुकदमा उठाने और इस्तीफे पर दबाव बनाने पर ही केंद्रित है।

कामरा ने भंग की थी सोसायटी, दबाव आरोप गलत : कमलेश
ग्लोबल एजुकेशन वेलफेयर सोसयटी के अध्यक्ष कमलेश चंद्रा का कहना है कि निर्मल कामरा का इस सोसायटी से कोई लेना देना नहीं है। 2018 से पहले उसने खुद ही सोसायटी को भंग कर दिया था। इसलिए सोसायटी से वह खुद ही निर्वासित हो गया। इस्तीफे मांगने का सवाल ही नहीं उठता। चंद्रा ने एक बयान जारी कर कहा है कि कामरा भू माफिया है। उसने कई संभ्रांत लोगों के साथ ठगी की है। उसके विरुद्ध पुलिस में दर्ज मुकदमों में गिरफ्तारी को लेकर दबाव पड़ा तो जानबूझकर साजिश के तहत मेरी बहन और मुझे शामिल करके पुलिस पर दबाव बनाना चाहता है।

पुलिस के सटोरियों से कनेक्शन निकले
इस मामले में सुखदेव चायल का नाम भी सामने आया है। परिवादी का आरोप है कि सटोरिए चायल ने इस्तीफे पर साइन करने के लिए दबाव बनाया। बता दें सुखदेव के खिलाफ पूर्व में सट्‌टे के मामले दर्ज हो चुके हैं। पुलिस ने 10 नवंबर 2016 को नोखा के क्रिकेट बुकी और हवाला कारोबारी झंवर बंधुओं को पकड़ा था। उस मामले में प्रकाश सेठिया के साथ सुखदेव चायल सहित कई बड़े सटोरियों के नाम पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज किए गए थे।

एसीबी डीजी बीएल सोनी से दो टूक
भास्कर : बीकानेर एसपी के भाई के मामले में एफआईआर आपने दर्ज की है। इसमें एसपी प्रीति की क्या भूमिका है।
डीजी : अभी एफआईआर दर्ज हुई है। इनिशियल स्टेज पर है। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

एसीबी की रिकॉर्डिंग में भ्रष्टाचार का कच्चा चिट्‌ठा-

परिवादी निर्मल कामरा जेएनवीसी एसएचओ अरविंद भारद्वाज के दलाल सुखदेव से मिलने गया। वहां दूसरा दलाल विजय भी बैठा था। उन्होंने परिवादी से कहा कि वह ग्लोबल एजुकेशन वेलफेयर सोसायटी से इस्तीफा दे और सदस्यों से भी इस्तीफा दिलवाए। तब उसके मामलों में एफ आर लग जाएगी। उसके बाद कामरा ने दलाल भूपेंद्र शर्मा से मुलाकात की तो उसने अरविंद भारद्वाज से मीटिंग फिक्स कराई।

4 अगस्त 2021...पहली डील

विजय : मैं बी वास्ते ही याने बार-बार प्रेशर दे रयो हूं। एफआईआर होणे से पहले मैं दो चक्कर ई वास्ते ही काट्या। एफआईआर सूं एक दो दिन पहले मैं स्पेशल मैं थाके घर लेके आयो। कामरा : मेरे केसों में एफआर लगवाओ। विजय : ओ सलटाओ नणा तो करा नी सामला नी कामरा : इस्तीफा अरविंद भारद्वाज लेने को कह रहा है। विजय : अरविंद भारद्वाज ये बोल दे कि उनको दे देना तो कामरा : आपको उन्हें बोलना पड़ेगा मेरे केसों में एफआर लगाने के लिए। सुखदेव : आप दो एफआर की बात कर रहे हो। मैं ये चाहता हूं कि आपका मामला निपट जाए पूरा। विजय : यदि अरविंद भारद्वाज को देओ तो दे देना आपका काम हो जाएगा। आप ओरिजनल इस्तीफे दोगो तो ही सेटलमेंट कराएंगे। कामरा : मेरे खिलाफ जो मुकदमे कर रखे हैं पहले उनको हटाओ। विजय : वो बाद में हटेंगे। पहले आप इस्तीफा दोगो। सुखदेव : परिवादी को धमकाते हुए, तुम्हारे घर पुलिस की जिप्सी लग जाएगी। कामरा : मेरे साथ धोखा हो गया। सुखदेव ने अपने भाई के नाम से मेरे खिलाफ एफआईआर क्यों कराई। सुखदेव : मैं अगर करनो होतो म्हारे स्पेशल थाने ठा ही है काईं कारण करायो। अगर मन कराने हो तो तो मैं कदे ही कर देतो। मैं चक्कर क्यों काटतो।

5 अगस्त 2021...दूसरी डील

कामरा : मेरे कैसों में एफआर कैसे लगेगी। मैं इस्तीफा दे रहा हूं। भूपेंद्र शर्मा : अरविंद जी को फोन करके अर्जेंट बुला लेंगे। मेरे सामने नोटेरी से साइन करा लेंगे। ऑरिजनल इस्तीफे मेरे पास रहेंगे। तब मुकदमा उठवा देंगे। इस बात का आपको विश्वास करना पड़ेगा। मुकदमों से निकलवाना मेरी गारंटी है। भूपेंद्र शर्मा : सुखदेव को मैं जानता हूं। वो आप जैसे दस आदमियों से पैसे कढ़ा सकता है। ठीक है ना वो मैं सब जानता हूं उन चेप्टर की अब बात ही नहीं है ना। बात अपन को जो चीज खत्म करनी है तो खत्म करो। कामरा : मेरी सेफ्टी क्या है। मेरी पत्नी का नाम हटाना है। मेरे पर दर्ज मुकदमे इस्तीफा देने के बाद हटाने चाहिए। अरविंद भारद्वाज : वो तो हटाएंगे ना मुकदमे। कमलेश चंद्रा ने पट्‌टा चुराने का एक परिवाद भी दे रखा है। भूपेंद्र शर्मा : समझौते के लिए अपनी चीज भी देनी पड़ती है। अरविंद भारद्वाज के लिए... भाई साहब बैठे हैं। जैसा कहें कर लेना। मेटर क्लोज करने की मेरी जिम्मेदारी है। अरविंद भारद्वाज : इस्तीफा कब हमारे को दोगे। कामरा : मेरे केस हटवा दो। आपके हाथ में है। अरविंद भारद्वाज : केस हटवाना आपके हाथ में है। इस्तीफा देगो तो ही सुखदेव साइन करेगा। इस्तीफा देने 15 मिनट में आपके पास सुख जी का फोन आएगा। तीन बजे तक कागज दे दो। कामरा : मेरी छह करोड़ की संपत्ति कमलेश चंद्रा को चली जाएगी। अरविंद भारद्वाज : वो अपन बाद में करते रहेंगे। इस मेटर को तो खत्म करो।

6 अगस्त 2021...तीसरी डील

कामरा : ये लीजिए इस्तीफे का ड्राफ्ट अरविंद भारद्वाज : डांटते हुए...ये क्या फालतू की बातें लिखकर लाए हो। (कामरा ने इस्तीफे में मुकदमों में एफआर लगाने की शर्त की जोड़ दी थी) कामरा : वो मेरे से गलत बात लिखवा रहे हैं तो मैं भी तो यह बातें लिखूं अरविंद भारद्वाज : मेरा टाइम क्यों खराब कर रहे हो। आप मामला सोल्व करने के लिए यहां बैठे हो। जितना लेट करोगो उतना अविश्वास गहराता है। सीधी सी बात है। आपको इस्तीफे का कागज पीडीएफ में भेज रखा है। उसमें जो चेंज करना है बता देता हूं। कामरा : अरविंद भारद्वाज के कहे अनुसार इस्तीफे का ड्राफ्ट तैयार कर उससे और भूपेंद्र से मिलता है। अरविंद भारद्वाज : आप ले आए क्या सारे कागज। एक आध दिन में सारा मामला क्लोज करते हैं। साइन कर दो। कामरा : पहले कमलेश चंद्रा से मिलवाओ। अरविंद भारद्वाज : मैं ही हूं। मेरे को ही मानो। कमलेश चंद्रा नहीं मिलेंगे और ना ही आएंगे। मैं बार-बार समझाऊं क्या आपको। आप ये लिखोगे तभी तो वो लिखेगा। कोई नहीं पढ़ेगा। मैं ही सबकुछ हूं। और सुखदेव वाला मुकदमा...आपको दो टप्पे की बात बता रहा हूं इस्तीफा लिखकर दोगे तो आपका सारा काम हो जाएगा। उसकी जिम्मेदारी मैं ले रहा हूं। भूपेंद्र शर्मा : नहीं-नहीं ये देंगे नहीं उनको अपने पास ही रखेंगे भाई साहब। गारंटी इनकी है बस। मैं कह रहा हूं ना आपको। विश्वास नहीं है। सुखदेव डमी आदमी है। ये उनसे भी लिखवा रहे हैं। यहां से आप लिखोगे तभी वहां से ओके होगा।