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बीकानेर के दो डॉक्टर दिनभर सुर्खियों में:इसलिए बीकानेर सबसे संक्रमित, कोविड पॉजिटिव डॉक्टर के घर मरीजों का जमावड़ा, इसलिए पुलिस बदनाम...शराब पीकर हंगामे के आरोपी डॉक्टर का मेडिकल नहीं करवाया

बीकानेर3 दिन पहले
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बीकानेर के संक्रमित डॉक्टर के आवास पर मरीजों की भीड़ लगी। - Dainik Bhaskar
बीकानेर के संक्रमित डॉक्टर के आवास पर मरीजों की भीड़ लगी।

कोरोना के बढ़ते मामलों में प्रदेश में टॉप पर चल रहे बीकानेर में लापरवाही किस कदर हावी है इसका प्रत्यक्ष प्रमाण गुरुवार को एक वायरल वीडियो से हुआ। पीबीएम के गेस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट कोरोना पॉजिटिव होने के बावजूद मरीज देख रहे थे। उनके घर पर मरीजों की भीड़ थी। मेडिकल स्टोर पर भीड़ टूट रही थी। दरअसल सादुलगंज स्थित डॉक्टर आशीष जोशी की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद घर के सभी पांच सदस्यों को 17 जनवरी तक होम क्वारेंटाइन किया गया है।

इसके बावजूद डॉ. आशीष जोशी के घर मरीजों की कतार लगी हुई थी। उल्लेखनीय है कि शहर के विभिन्न एरिया में जिला प्रशासन ने कोविड गाइडलाइन की पालना के लिए एरिया मजिस्ट्रेट नियुक्त कर रखे हैं, लेकिन न तो आमजन गाइडलाइन की पालना कर रहे हैं और न ही एरिया मजिस्ट्रेट पालना करवा रहे हैं।

मरीज दवा लेने आए थे : डॉ. आशीष जोशी
डॉ. आशीष जोशी ने इस संबंध में बताया कि उनकी कोविड रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है। कुछ गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज हैं, जिनके परिजन दवा लेने के लिए आते हैं। जिन्हें सलाह या दवाइयां बदलने की जरूरत होती है, उन मरीजों से वीडियो कॉन्फ्रेंस या वाट्सएप के माध्यम से दवा लिखकर दे रहा हूं।

बीकानेर | जामसर के स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉक्टर पर शराब के नशे में मरीज देखने का आरोप लगाते हुए गुरुवार को ग्रामीणों ने हंगामा कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस आरोपी डॉक्टर को थाने ले गई, लेकिन पुलिस ने डॉक्टर का हॉस्पिटल में मेडिकल मुआयना करवाने की बजाय थाने से ही क्लीन चिट दे दी। मामला जामसर थाने का है, लेकिन आरोपी डॉक्टर को बीछवाल थाने की पुलिस पकड़ कर लाई थी। असल में बीछवाल थाना प्रभारी मनोज शर्मा किसी प्रकरण की जांच के सिलसिले से गुरुवार को जामसर गए थे।

वहां ग्रामीणों ने आरोपी डॉक्टर का घेराव कर रखा था। थानाधिकारी शर्मा ने बताया कि ग्रामीणों की शिकायत पर आरोपी डॉक्टर सुरेन्द्र कुमार खींची को जामसर थाने के हवाले किया गया था। उधर जामसर एसएचओ पवन कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी डॉक्टर की ब्रेथ एनालाइजर से जांच करवाई गई थी, लेकिन उसमें शराब की पुष्टि नहीं हुई। जब उनसे मेडिकल जांच की बात पूछी गई तो कहा कि जरूरत नहीं पड़ी। सवाल उठता है कि जब गांव के लोगों ने इतने गंभीर आरोप लगाए थे तो पुलिस ने मेडिकल जांच कराकर कागजी कार्रवाई क्यों नहीं की। घटना के बारे में सीएमएचओ डॉ. बीएल मीणा ने बताया कि उन्हें भी सोशल मीडिया के माध्यम से डॉक्टर के बारे में जानकारी मिली है। वह शुक्रवार को इस प्रकरण की जांच करवाएंगे।

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