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अमेरिकी मेजर की ताजमहल देखने की तमन्ना:मैं अपने दादा की तरह ताजमहल के सामने फोटो खींचवाना चाहता हूं, सेकंड वर्ल्ड वार में उन्होंने भारत से चीन पर हमले किए थे

बीकानेर5 महीने पहले
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यह फोटो अमेरिकी मेजर स्पांसर गैरिसन की है। बीकानेर की महाजन फायरिंग रेंज में चल रही भारतीय-अमेरिकी युद्धाभ्यास में शामिल हुए हैं। - Dainik Bhaskar
यह फोटो अमेरिकी मेजर स्पांसर गैरिसन की है। बीकानेर की महाजन फायरिंग रेंज में चल रही भारतीय-अमेरिकी युद्धाभ्यास में शामिल हुए हैं।
  • बीकानेर की महाजन फायरिंग रेंज में भारत-अमेरिका युद्धाभ्यास में शामिल होने आए हैं मेजर स्पांसर गैरिसन
  • मेजर ने कहा- घर में दादा की ताजमहल में ली गई फोटो लगी है, मैं भी वैसे ही तस्वीर खींचवाना चाहता हूं

यह हैं अमेरिकी सेना में मेजर स्पांसर गैरिसन। गैरिसन इस समय बीकानेर की महाजन फायरिंग रेंज में भारत-अमेरिका युद्धाभ्यास में आए हुए हैं। उनकी इच्छा ताजमहल देखने की है। क्योंकि, गैरिसन के घर में उनके दादा की ताजमहल के समाने की एक तस्वीर लगी है। गैरिसन भी उसी अंदाज में एक फोटो खींचवाना चाहते थे। लेकिन, इस बार उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हुई। लेकिन, उन्होंने कहा कि वे जल्द ही दोबारा भारत आएंगे और अपनी इस इच्छा को पूरी करेंगे। अब गैरिसन की यादें उन्हीं के शब्दों में पढ़िए....

'वो वक्त द्वितीय विश्व युद्ध का था, जब अमेरिकी सेना ने चीन पर भारत की जमीन से हमले किए थे। सैकड़ों हेलिकाप्टर भारत के अरुणाचल प्रदेश से उड़ते और हिमालय पार करके चीन पर हमले करते। तब हेलिकाप्टर इतने सक्षम नहीं थे कि आसानी से दुश्मन पर गोले फेंककर निकल जाए। ऐसे में चीनी सेना ने कई अमेरिकी हेलीकाप्टर उड़ा दिए। एक वक्त ऐसा भी आया जब सैकड़ों की संख्या में अमेरिकी हेलीकाप्टर हिमालय के बीच गायब हो गए।'

'मेरे दादाजी भी एक हेलीकाप्टर से चीन पर गोले बरसा रहे थे। इस पर भी हमला हुआ, लेकिन शुक्र था कि उनके सिर्फ पैर में गोली लगी और वे बच गए। हमारा परिवार आज भी इस यादों को संजोकर रखे हुए हैं। उसी दौर में मेरे दादा ने ताजमहल देखा था। उसकी साथ एक फोटो भी खींचा जो हमारे घर में एंट्री करते ही आपको नजर आ जाएगी।'

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ताजमहल नहीं जा पाने का गम
'मैं ठीक अपने दादा की तरह उसी पोज में ताजमहल के आगे फोटो खींचवाना चाहता हूं। जहां मेरे दादा ने खिंचवायी थी। वो फोटो उन्हीं के फ्रेम के पास ही अपने घर में लगाना भी है। इस युद्धाभ्यास में तो मैं आगरा नहीं जा सका, लेकिन लौटकर आऊंगा और ऐसा फोटो लूंगा। क्योंकि, ये एक प्रोफेशनल विजिट है। जहां से हम अपने स्तर पर कोई फेरबदल नहीं कर सकते। वैसे भी कोरोना के कारण बहुत सारी पाबंदियां है।

'अमेरिका में ऐसे परिवारों की कमी नहीं है, जिनकी पीढ़ी दर पीढ़ी सेना में है। सेना में काम करना न सिर्फ गौरवशाली है बल्कि रोमांचक भी है। मेरे दादा सेना में थे और उसके बाद मैं सेना में आया हूं। मैं चाहता हूं कि मेरे बच्चे भी सेना में रहें और भारत आते-जाते रहें।

कई देशों में सेना के साथ जा चुके हैं गैरीसन
भारत और अमेरिकी युद्धाभ्यास में अमेरिकी सेना के प्रवक्ता के रूप में काम कर रहे गैरिसन भारतीय जवानों और मीडिया के साथ बहुत सहज रहे। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि मैं अफगानिस्तान, इराक सहित दुनिया के विभिन्न देशों में चलने वाले सैन्य अभियानों का हिस्सा रहा हूं। इन देशों में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में हिस्सा लिया है। भारत के साथ मिलकर आतंकवाद से यहां की परिस्थितियों में लड़ना सीखा है। आने वाले दौर में कभी जरूरत पड़ी तो यह स्ट्राइकर ब्रिगेड भारत के साथ मिलकर आतंक से लड़ने को तैयार है।

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