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भास्कर खास:एवरेस्ट फतह करने वाली देश की प्रथम महिला बिछेंद्री पाल को बर्फीले तूफान से बचाकर लाये थे मगन बिस्सा

बीकानेर3 महीने पहले
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  • पर्वतारोहण में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियों के लिए मगन बिस्सा को मरणोपरांत राष्ट्रीय तेनजिंग नोर्गे लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला, पत्नी लेने पहुंचीं

वर्ष 1984। इंडियन माउंटेरिंग फाउंडेशन का एवरेस्ट एक्सपीडिशन। 22 हजार फीट पर पर्वतारोहियों का कैम्प। अचानक रात को बर्फ का पहाड़ टूटकर कैम्प पर गिर पड़ा। पर्वतारोही उसमें दब गए। मगन बिस्सा रेस्क्यू टीम के साथ पहुंचे। बिछेंद्री पाल भी उसी कैम्प में थीं।

बड़ी मुश्किल से उन्हें बचाकर सुरक्षित ले आए। उस एक्सपीडिशन में बिछेंद्री पाल ने एवरेस्ट फतह करने वाली पहली महिला का गौरव हासिल किया। मगन बिस्सा को भी उनके साथ चोटी पर पहुंचना था। लेकिन सोनम परजोर नाम के एक पर्वतारोही की जान बचाने में उन्हें वंचित रहना पड़ा। इस सेक्रिफाई का ही परिणाम था बिस्सा को तत्काल टेरिटोरियल आर्मी जॉइन करवाई।

ऐसे बहुत सारे अदम्य साहसिक कीर्तिमान रचने वाले बीकानेर के अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही मगन बिस्सा को मरणोपरांत राष्ट्रीय तेनजिंग नोर्गे लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड 2019 प्रदान किया गया। शनिवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति की ओर से प्रदान किया गया यह अवार्ड स्व. बिस्सा की पत्नी सुषमा बिस्सा ने ग्रहण किया। इस अवसर पर भारत सरकार के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार किरण रिजिजू भी मौजूद थे। अवार्ड सेरेमनी के दौरान समस्त पर्वतारोही और बीकानेर के लोगों की आंखें श्रद्धा से नम हो गईं।

दुखद क्षण

एवरेस्ट पर 2009 में पत्नी सुषमा बिस्सा के साथ गए थे। पेट मे चोट लगने से गैंगरीन हो गया। दो साल तक इलाज चला। 14 फरवरी, 2020 को महाराष्ट्र के एडवेंचर प्रोग्राम के दौरान गिरने से मृत्यु हो गई। मगन बिस्सा ने 1978 में पायोनियर्स एडवेंचर सोसायटी का गठन किया था। तभी से एडवेंचर से जुड़े रहे।

बड़े अचीवमेंट

  • नन्दा देवी एक्सपीडिशन 1991। कोई भी भारतीय नहीं चढ़ा था। इंडो रशियन दल था। अंतिम अवसर था। तीन दिन में मगन बिस्सा जाकर आ गए।
  • सासेर कांगड़ी : वर्ष 1987 । इंडो ब्रिटिश एक्सपीडिशन। सियाचिन ग्लेशियर। 19 हजार से ऊपर हाइट पर क्लाइम्बिंग कर रिकॉर्ड बनाया। उस पर टेरिटोरियल आर्मी ने कैलेंडर जारी किया।
  • 1986 में सेना मेडल मिला। आर्मी का एक्सपीडिशन। साउथ पॉल पर 5 सैनिकों की जान गई। टफ रूट पर 27 हजार फीट तक क्लाइम्बिंग हो चुकी थी। रूट बंद कर दूसरे रूट पर चांस दिया। दो जने थे। तूफान में घिर गए। साथी की जान बचाई। अदम्य साहस का परिचय देते हुए नया रूट खोला।

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