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  • The Human Rights Commission Gave Instructions To Improve The Condition Of The Public Park, Then The UIT Made Excuses, Saying That We Do Not Have Any Work In The Public Park

बीकानेर में UIT का नहीं है पब्लिक पार्क:मानवाधिकार आयोग ने पब्लिक पार्क के हालात सुधारने के निर्देश दिए तो UIT ने किए बहाने, कहा- हमारे नियंत्रण में नहीं है पब्लिक पार्क का कोई भी काम

बीकानेर20 दिन पहले
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बीकानेर के ऐतिहासिक पब्लिक पार्क के लिए जिम्मेदार कौन है? यह नया सवाल नगर विकास न्यास UIT के एक पत्र के सार्वजनिक होने पर खड़ा हो गया है। दरअसल, कुछ महीने पहले मानवाधिकार आयोग ने न्यास को पार्क की हालत सुधारने के निर्देश दिए थे, जिसके जवाब में न्यास ने कहा है कि पार्क उसकी जिम्मेदारी में नहीं है। सवाल ये है कि जब पार्क उसकी जिम्मेदारी में नहीं है तो वहां करोड़ों रुपए का खर्च किसकी अनुमति से किया जा रहा है?

बीकानेर के पब्लिक पार्क को यातायात से मुक्त कराने के लिए "सेव पब्लिक पार्क" मुवमेंट चल रहा है। इसी मुवमेंट से जुड़े एडवोकेट निमेष सुथार ने मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास को बीकानेर यात्रा के दौरान एक पत्र दिया था। जिसमें पब्लिक पार्क की दयनीय स्थिति के बारे में अवगत कराया गया। व्यास ने इसे गंभीर मानते हुए नगर विकास न्यास को निर्देश दिए कि वो पार्कों की स्थिति को सुधारें। इस पर जून में न्यास ने मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखा। इस पत्र की प्रति हाल ही में सुथार को आयोग के माध्यम से मिली है।

न्यास के जवाब के अनुसार पब्लिक पार्क में यातायात बंद करने की जिम्मेदारी यातायात पुलिस की है। वहीं पार्कों में किसी तरह के निर्माण और सौंदर्य का जिम्मा सार्वजनिक निर्माण विभाग का है। पब्लिक पार्क में चिडियाघर को फिर से चालू करने के मुद्दे पर न्यास ने जवाब दिया है कि ये काम वन विभाग को करना है। आयोग ने यहां फिर से चिड़ियाघर शुरू करने की सलाह दी थी। वहीं पार्क में जगह जगह हो रहे अतिक्रमण और सरकारी विभागों को अन्यत्र शिफ्ट करने के मुद्दे पर न्यास ने कहा है कि ये निर्णय जिला प्रशासन करेगा।

वैसे है पूरी पंचायती

न्यास भले ही ये कह रहा है कि उसके अधीन नहीं है जबकि हकीकत ये है कि पार्क में अधिकांश काम न्यास के माध्यम से हुए हैं। यहां तक कि पार्क गोद देने व वहां नए प्रोजेक्ट भी न्यास ही करता रहा है। कुछ पार्क खुद न्यास ने ही गोद दिए हैं। यहां लाखों रुपए के काम भी हुए हैं। कुछ चौराहे भी न्यास की अनुमति से ही बने हैं।

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