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लापरवाही में फंसी सीवरेज लाइन:बिना सर्वे 92 लाख में टेंडर करने का मामला,नगर निगम के पत्र पर आरयूआईडीपी का जवाब- हमने नहीं डाली सीवर लाइन, दूसरे एक्सपर्ट से पूछें

बीकानेर8 दिन पहले
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बिना तकनीकी सर्वे आनन-फानन सीवरेज लाइन डालने का टेंडर करना नगर निगम अफसरों के गले में आ गया है। भास्कर की खबर पर पार्षदों के हंगामे के बाद आयुक्त ने आरयूआईडीपी को पत्र लिखकर तकनीकी राय मांगी थी, लेकिन उन्होंने हाथ खड़े कर दिए। यह कहकर साइड हो गए थे कि सीवर लाइन पीएचईडी ने डलवाई थी, इसलिए किसी दूसरे एक्सपर्ट से राय लें। इससे मामला फिर अटक गया।

दरअसल प्रेमजी पॉइंट पर लंबे समय से सीवर लाइन का पानी राहगीरों और व्यापारियों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। जुलाई में यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल दौरे पर बीकानेर आए तो उनके सामन भी ये मुद्दा उठा था। उन्होंने कलेक्टर को समाधान की हिदायत दी थी। 8 अगस्त को कलेक्टर ने नगर निगम को इस 78 किमी लंबी सीवर लाइन का सर्वे करने के आदेश दिए थे। इस बीच नगर निगम ने बिना सर्वे कराए 92 लाख रुपए का टेंडर कर दिया। सीवर लाइन डालने का काम शुरू करने की तैयारी होने लगी। इस बीच 29 दिसंबर के अंक में भास्कर ने टेंडर और इस प्रोजेक्ट पर सवाल उठाते समाचार प्रकाशित किया था।

इस पर पार्षदाें ने केईएम राेड जाम कर दिया था। पार्षदों ने भी नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए थे। तत्कालीन आयुक्त अभिषेक खन्ना ने सर्वे कराकर सीवर लाइन शुरू कराने का वादा किया था। इस बीच एक जनवरी काे खन्ना का स्थानांतरण हाे गया। 12 जनवरी काे निगम आयुक्त पंकज शर्मा ने आरयूआईडीपी काे पत्र लिखकर इस पर तकनीकी राय मांगी। 13 काे आरयूआईडीपी ने निगम काे जवाब देते हुए कहा कि 1980 में ये सीवर लाइन पीएचईडी ने बनाई थी, इसलिए आरयूआईडीपी कुछ नहीं बता सकती। सीवरेज एक्सपर्ट से राय लें।

अजीब दास्तां है...12 साल से पंप चला रहा निगम, फिर भी क्षमता नहीं पता
परकाेटे की सीवरेज लाइन काे केईएम राेड से पब्लिक पार्क में बने पंपिंग स्टेशन तक लाने का प्रोजेक्ट नगर निगम का है। लेकिन ये पानी पब्लिक पार्क तक लाने से पहले ये जानना जरूरी हाेगा कि आखिर उस पंप की क्षमता क्या है। क्या नए इलाके का पानी पंप हो सकता है। ताज्जुब की बात ये है कि 12 साल से इस पंपिंग स्टेशन का संचालन निगम कर रहा है लेकिन उसे ये भी नहीं पता कि इसकी क्षमता क्या है? दरअसल पंपिंग स्टेशन की क्षमता जानने के लिए भी निगम ने आरयूआईडीपी काे पत्र लिखा था। आरयूआईडीपी ने जवाब में कहा कि इसकी डिटेल जयपुर से मिलेगी। किसी कार्मिक काे जयपुर भेजकर डिटेल मंगाई जा सकती है। सिटी लेवल मॉनिटिरिंग कमेटी में भी ये मुद्दा उठ चुका है।

निगम-यूआईटी को ये जिम्मा मिला था

  • 78 किलाेमीटर पुरानी सीवर लाइन का सबसे पहले सर्वे कराया जाए।
  • नगर निगम उन स्थानों का सर्वे भी करे जहां नालियां सीधी सीवर लाइन में डाली गई हैं।
  • शिवबाड़ी क्षेत्र में सीवरेज के कनेक्शन पूरे हाें।
  • वल्लभ गार्डेन और मुरलीधर व्यास काॅलाेनी में भी यूआईटी सीवरेज करनेक्शन पूरे कराए।
  • नगर निगम एफएसएसएम एप तैयार कर अनाधिकृत सैप्टिक टैंक खाली करने वाले टैंकराें का रजिस्ट्रर करे और प्रति टैंकर दरें निर्धारित कर एक माह में काम डिस्पाेजल करे।
  • हमने आरयूआईडीपी से तकनीकी राय मांगी है। मुझे अब तक जवाब नहीं मिला। जवाब आने के बाद आयुक्त से चर्चा कर आगे की प्रक्रिया पर विचार करेंगे। हमारी कोशिश है कि जल्द ही समस्या का निस्तारण हो। - पवन बंसल, अधिशासी अभियंता, नगर निगम
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