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  • The Maximum Number Of Leases Are To Be Made In 8 Kutcha Settlements, Not Yet Surveyed; It Will Take 3 Months While The Campaign Starts After 2 Days.

आधी-अधूरी तैयारियों के बीच प्रशासन शहरों के संग:सबसे ज्यादा पट्‌टे 8 कच्ची बस्तियों में बनने हैं, अभी सर्वे तक नहीं; इसमें 3 माह का समय लगेगा जबकि अभियान 2 दिन बाद से

बीकानेर2 महीने पहले
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एम्पावर्ड कमेटी की बैठक एक दिन पहले होगी, कितने कैंप-तभी पता चलेगा। - Dainik Bhaskar
एम्पावर्ड कमेटी की बैठक एक दिन पहले होगी, कितने कैंप-तभी पता चलेगा।

शहर में पट्टा बनवाने वालाें में सबसे बड़ा वर्ग कच्ची बस्ती है। शहर में 32 कच्ची बस्तियां हैं। दाे अक्टूबर से प्रशासन शहराें के संग अभियान में इनके पट्टे बनाए जाने हैं लेकिन 29 सितंबर तक कच्ची बस्तियाें का ना ताे सर्वे हुआ ना डी-नाेटिफिकेशन। सर्वे के बाद करीब आठ बस्तियाें काे कच्ची बस्ती के दायरे से बाहर किया जाना है लेकिन बिना सर्वे और डीनाेटिफाइड के पट्टे नहीं बनेंगे।

लाेगाें का सवाल है कि जब सबसे बड़े वर्ग का ही पट्टा नहीं बनेगा, फिर अभियान की सार्थकता किस बात की। कच्ची बस्तियाें काे अधिकार पत्र या अहस्तांतरित पट्टा दिया जाना है। इसके लिए अब तक जाेनल प्लान भी नहीं बना। ऐसे में सबसे जरूरतमंद वर्ग पट्टा बनवाने की प्रक्रिया से बाहर रहेगा।

अभियान काे लेकर निगम अधिकारी कितना संजीदा है इसका अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि कच्ची बस्तियों का अबतक सर्वे शुरू भी नहीं हुआ। हालांकि एजेंसी से सर्वे कराने का दावा किया जा रहा है जिसमें कुछ निगम कार्मिकाें काे जाेड़ा जाएगा लेकिन ये कब हाेगा, इसकी तिथि तय नहीं। पिछले अभियान में भी निगम ने कच्ची बस्ती के सिर्फ छह पट्टे बनाए थे।

गाइडलाइन जारी: तीन तरह के पट्‌टे बनेंगे, जानिये क्या जरूरी डॉक्यूमेंट चाहिए

कच्ची बस्ती पट्‌टा

2009 से पहले की मतदाता सूची में नाम, राशन कार्ड, बिजली-पानी के बिल, मूल निवास, प्लान, आसापासा, पति-पत्नी का ज्वाइंट फाेटाे, पहचान पत्र, सर्वे सूची में नाम, दाे प्रतिष्ठित व्यक्तियाें की ओर से पहचान वेरीफिकेशन।

स्टेट ग्रांट पट्‌टा

प्रारूप पत्र दाे, 1998 से 2017 के बीच मतदाता सूची में नाम, एससी-एसटी के लिए प्रमाण-पत्र, दाे प्रतिष्ठित व्यक्तियाें से पहचान, साइड प्लान, नक्शा, खुद नहीं रहते तो परिवार का सिजरा बंटवारानामा, 1-1-1990 के बाद खरीदारी हुई ताे विक्रेता से पूर्व की चेन, पति-पत्नी का संयुक्त फाेटाे, गृहकर देने का प्रमाण, पता, बिजली-पानी के बिल, राशन कार्ड।

69-ए पट्‌टा

हलफनामा प्रपत्र दाे, प्रपत्र 3, नक्शा, रियासतकालीन जारी किए पट्टे का काेई अन्य दस्तावेज, कस्टाेडियन पट्टा, परकाेटा में स्टेटग्रांट पट्टा है ताे 1990 से पूर्व का बेचाननामा, पारिवारिक बंटवारानामा, वसीयत, वर्तमान में माैके का कब्जा दस्तावेज, 1992 से पू्र्व निर्माण स्वीकृति, 1992 से पूर्व का बिजली-पानी का बिल, वाेटर लिस्ट, गृहकर, निर्माण रिकाॅर्ड, 60 साल से ऊपर के किन्हीं दाे व्यक्तियाें से वेरिफिकेशन कराना होगा।

कांता खतूरिया काॅलाेनी में अलग पेच

काता खतूरिया काॅलाेनी के पट्टाें पर भी पेच फंस रहा है। यहां जमीन की 4 श्रेणी है। पहली जिनका पूर्व में पंचायताें से पट्टा बन गया और उसके दस्तावेज निगम में पहुंच गए। इनके पट्टे आसानी से बनेंगे। दूसरा जिनके पट्टे तो बने लेकिन निगम के पास दस्तावेज नहीं पहुंचे, ऐसे मामलों में गाइडलाइन मांगी जाएगी। तीसरा- लेआउट स्पेस वैकेंट था और अब निर्माण हाे गया। इन लाेगाें काे पट्टे देने में निगम आनाकानी कर रहा है। चाैथा वाे जिसमें लाेग सुविधा क्षेत्र में बैठे हैं। ऐसे लोगों के पट्टे नहीं बनेंगे।

एम्पावर्ड कमेटी बन गई है। बैठक एक अक्टूबर काे करेंगे। उसमें कैंप कहां, कितने हाेंगे, तय हाेगा। कच्ची बस्ती का मामला भी इसमें रखेंगे। जाे निर्णय हाेगा उस हिसाब से काम करेंगे। सर्वे के लिए हम एजेंसी से संपर्क कर रहे हैं। सर्वे के बाद ही उन्हें डीनाेटिफाइड करेंगे। मार्च तक अभियान चलेगा, उससे पहले ही सर्वे आदि करा लेंगे।-पंकज शर्मा, कमिश्नर, बीएमसी

कच्ची बस्ती के पट्‌टों की मांग पर यूआईटी का घेराव

कच्ची बस्ती का सर्वे और डीनाेटिफिकेशन नहीं होने से विरोध शुरू हो गया है। शार्दुलगंज कच्ची बस्ती में करीब 200 मकान हैं। वहां 2013 में करीब 12 पट्टे ही जारी हुए। यूआईटी इस इलाके काे स्कीम एरिया बता रही है। यूआईटी ने इस पर डीएलबी से मार्गदर्शन मांगा था। लेकिन डीएलबी से काेई जवाब नहीं आया। बुधवार को पार्षद मनाेज बिश्नाेई दर्जनाें महिलाओं और पुुरुषाें काे लेकर यूआईटी पहुंचे। नारेबाजी की।

एम्पावर्ड कमेटी बनाई

सरकार ने एम्पावर्ड कमेटी गठित कर दी जिसमें मेयर अध्यक्ष, कमिश्नर सदस्य सचिव, नगर नियाेजक व वरिष्ठ अभियंता सदस्य हाेंगे। इसके अलावा यूआईटी में न्यास अध्यक्ष यानी कलेक्टर अध्यक्ष, यूआईटी सचिव को सदस्य सचिव बनाया गया है।

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