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निगम का नारकीय सिस्टम:वकीलों की गली में 50 घरों की सीवरेज 5 दिन से चॉक पार्षद धरने पर बैठे तो एक घंटे में खोल दिया ब्लॉक

बीकानेर18 दिन पहले
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  • सीवरेज ब्लॉक की रोजाना 70 कम्पलेंट, 44 पेंडिंग ही रहती हैं

केईएम रोड पर वकीलों की गली में पांच दिन से सीवरेज जाम पड़ी थी। कई बार सूचना देने के बाद भी जब निगम की मशीन नहीं पहुंची तो मंगलवार सुबह पार्षद आयुक्त के कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गए। परिणाम ये हुआ है कि एक घंटे में ही मशीने मौके पर पहुंची और जाम हटा दिया गया।

वकीलों की गली में सुनील नागल के घर के सामने सीवरेज चैंबर पांच दिन से जाम पड़ा था। इससे आस-पास के पांच घरों के शौचालय के रास्ते पानी घर के अंदर आ रहा था। इसके अलावा सीवरेज के साथ जुड़े 45 से अधिक घरों में भी दुर्गंध और शौचालय में रुकावट होने लगी थी।

पार्षद आनंदसिंह सहित कई कांग्रेसी पार्षद मंगलवार सुबह निगम पहुंचे और आयुक्त कक्ष के बाहर धरने पर बैठ गए। सीवरेज की सफाई में लापरवाही के आरोप लगाए। आयुक्त ने ठेकेदार और कर्मचारियों की खिंचाई की तो एक घंटे में ही सीवरेज की सफाई हो गई।

आयुक्त ने आश्वासन दिया कि समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए नई सीवर लाइन का काम जल्दी ही शुरू करवाया जाएगा। इसके लिए 60 लाख से अधिक का एस्टिमेट तैयार किया जा रहा है। धरने पर बैठने वालों में चेतना चौधरी, जावेद पड़िहार, रमजान अली कच्छावा, आजम अली, बाबा खान, मनोज जनागल, शांतिलाल, मोहम्मद रफीक, अब्दुल वाहिद, सुभाष स्वामी, फिरोज अब्बासी, शहजाद खान भुट्टा, प्रफुल्ल हटीला, सत्तार, महेंद्र सिंह बड़गूजर, आरिफ भुट्‌टा, अब्दुल रहमान लोदरा शामिल थे।]

शहर में सीवरेज के चार सिस्टम काम कर रहे हैं। पीएचईडी का सिस्टम सबसे पुराना और डिस्टर्ब है। इसे बदलने के लिए 2019 में 60 करोड़ के प्रस्ताव सरकार को भेजे थे। यदि बजट मिल जाए तो पूरी लाइन को बदला जा सकता है।
एएच गौरी, आयुक्त, नगर निगम

भास्कर पड़ताल - 1988 में बड़ा बाजार से लेकर पब्लिक पार्क तक डाली गई थी सीवरेज

33 साल पुरानी 78 किमी सीवरेज डेमेज, 1.50 लाख घर प्रभावित, इसे बदलने के लिए चाहिए 60 करोड़

पीएचईडी ने 1988 में बड़ा बाजार से लेकर पब्लिक पार्क तक 78 किलोमीटर लंबी सीवरेज लाइन बिछाई थी। 15-20 फीट गहरी यह पूरी लाइन डेमेज पड़ी है। इस लाइन से करीब डेढ़ लाख घर प्रभावित हैं। आए दिन लोगों के घरों के अंडर ग्राउंड में पानी भर जाता है।

शहर में संकरी गलियां होने से निगम की मशीन वहां तक नहीं पहुंच पाती। मजबूरी में लोगों को प्राइवेट पंप सेट मंगवाकर पानी निकलवाना पड़ता है। नगर निगम ने 2015 में अमृत योजना के तहत सीवर लाइन बदलने के प्रस्ताव भेजे थे, लेकिन प्रोजेक्ट को शामिल नहीं किया गया। उसके बाद 2019 में राज्य सरकार से 60 करोड़ रुपए मांगे गए। वह भी नहीं मिले।

सीवरेज सिस्टम में अब नई टेक्नोलॉजी से हो रहा काम

सीवरेज सिस्टम में नई टेक्नोलॉजी से काम होने लगा है। सीवर लाइन बदलने के लिए बड़े पाइप को छोटे पाइप पर चढ़ाया जाता है। बाद में छोटे पाइप को अंदर ही ब्लाट कर दिया जाता है। इसी प्रकार सीवर लाइन का काम करने के दौरान कई बार पाइप क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। ऐसे में एपोक्सी लाइनिंग नामक केमिकल को पाइप के अंदर डालकर नई लेयर बना दी जाती है। इससे एक हार्ड सरफेस बन जाता है। यह बिल्कुल हार्ट में स्टंट डालने जैसा है। यह दोनों प्रोसेस हैं तो महंगे, लेकिन इससे काम ज्यादा देर तक प्रभावित नहीं होता। गड्‌ढ़ा खोदकर पाइप लाइन डालने के पारंपारिक तरीके से पानी को डायवर्ट करने जैसी समस्याएं आती हैं। इससे कई दिनों तक काम रोकना पड़ता है।

एक्सपर्ट टीम : कमलेश गौड़ व भरत खंडेला, दोनों सीवर एक्सपर्ट, आरयूआईडीपी, जयपुर)

सीवरेज सिस्टम के दो बड़े प्रोजेक्ट, 53 हजार घरों को मिलेगा लाभ

1. अमृत योजना के तहत बल्लभ गार्डन में बने शिवबाड़ी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की टेस्टिंग शुरू हो गई है। करीब 122 करोड़ के इस प्रोजेक्ट के तहत वंचित कॉलोनियों में 330 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन डाली गई है। 20-20 एमएलडी के दो एसटीपी हैं। बजरंग धोरे के पास 12 एमएलडी के एक एसटीपी का अपग्रेडेशन किया जा रहा है। इसका ओएंडएम दस साल का होगा। कुल 10500 घरों को सीवरेज कनेक्शन से जोड़ा जाएगा। छह हजार से अधिक कनेक्शन हो चुके हैं।
2. गंगाशहर, भीनासर, सुजानदेसर,श्रीरामसर के 43 हजार से अधिक घरों में सीवरेज कनेक्शन का काम चल रहा है। इसे पूरा होने में करीब दो साल लगेंगे। एशियन विकास बैंक वित्त पोषित आरयूआईडीपी के तहत गंगाशहर जोन में 300 किलोमीटर लंबी सीवरेज लाइन डाली गई है। करीब 227 करोड़ के इस प्रोजेक्ट पर अब तक 128 करोड़ खर्च हुए हैं। सुजानदेसर में 30 एमएलडी का पंपिंग स्टेशन और एसबीआर टेक्नोलॉजी वाला 20 एमएलडी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया है।

भास्कर बता रहा शहर के वो स्थान जहां आए दिन जाम हो जाती है सीवरेज, कारण... खराब इंजीनियरिंग

1. कोटगेट : कोटगेट पर सीवरेज समस्या को देखते हुए निगम ने सीवरेज चैंबर में पुरानी सीवर लाइन से चार फीट ऊपर एक और पाइप डाल रखा है। गंदा पानी चार फीट तक भरने के बाद पाइप में से आगे जाता है। रुकावट आने पर वहां जाम लगा जाता है।
2. प्रेमजी पॉइंट : यहां सीवर लाइन डेढ़ साल से डेमेज पड़ी है। कोटगेट से आ रही सीवर लाइन को प्रेमजी पॉइंट के आगे से घुमाकर मोडर्न मार्केट की तरफ निकाला गया था। मोड़ पर अक्सर कचरा फंसने पर सीवरेज जाम हो जाती है। खर्चा बड़ा होने के कारण निगम ने सीवर चैंबर से एक पाइप निकालकर रतन बिहारी पार्क में छोड़ रखा है। इससे चैंबर ओवर फ्लो नहीं होता।
3. रोशनी घर चौराहा : ठाकर फर्नीचर के पास सीचरेज चैंबर में पाइप लाइन का मिलान गलत किया हुआ है। पुरानी पाइप लाइन की मरम्मत करने के बजाय उसके ऊपर नई पाइप डाल रखी है। इससे आए दिन वहां पॉलीथिन और कचरा फंस जाता है।
4. जोशीवाड़ा : यहां पर 33 साल पुरानी सीवर लाइन से सभी घर जुड़े हुए हैं। यह लाइन कई जगह से डेमेज है, जिससे लोगों के घरों के अंडर ग्राउंड में पानी भर जाता है। निगम ने दो सीवरेज चैंबर के बीच नया पाइप तो बिछाया, लेकिन पुराने पाइप से चार फीट ऊपर। गंदा पानी नए पाइप के लेवल में आने पर आगे जाता है। उसमें कचरा फंसने पर चैंबर ओवर फ्लो होने लगता है।

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