• Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Bikaner
  • The Young Man Was Coming To Meet His Daughter, The Death In The Accident Was Written On Instagram We Will Leave From Your Life

बेटी से मिलने आ रहा था जवान, हादसे में मौत:Instagram पर लिखी थी पोस्ट-हम तेरी जिंदगी से चले जाएंगे, मासूम से छिना पिता का साया

बीकानेर6 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
सच हुआ कहे हुए शब्द। - Dainik Bhaskar
सच हुआ कहे हुए शब्द।

1 माह की बेटी से मिलने आते समय एक जवान की सड़क हादसे में मौत हो गई। जम्मू-कश्मीर की 12वीं जाट रेजिमेंट में तैनात बीकानेर का जवान तीन महीने बाद अपने घर रोड़ा जा रहा था। इसी दौरान सोमवार रात नोखा के पास भामटसर में हाईवे पर हुए हादसे में जान चली गई।
इंस्टाग्राम पर महीने भर पहले शेयर की थी रील, वैसा ही हो गया हादसा
जवान ने एक महीने पहले इंस्टाग्राम पर एक रील शेयर की थी, जिसमें उसने कहा था-हम तेरी जिंदगी से ऐसे चले जाएंगे, जैसे हादसे में जान चली जाती है। इसके कुछ वक्त बाद सोमवार रात एक हादसे में जान चली गई। हादसे के बाद रात को पीबीएम अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर लाया गया, जहां काफी देर मौत से संघर्ष के बाद उसने दम तोड़ दिया।
साथी जवानों के नहीं थम रहे आंसू, अंतिम संस्कार आज
जवान का मंगलवार को सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। भादू आमतौर पर इंस्टाग्राम पर सक्रिय रहता था। उसके इस पोस्ट पर एक दोस्त सुंदर लाल भादू ने लिखा कि उदासी का मतलब क्या हुआ? इस पर भादू ने कहा कि कुछ नहीं हुआ। ये ही वीडियो देखकर भादू के दोस्तों की आंखों में आंसू थम नहीं रहे।
डेढ़ साल पहले हुई थी शादी, एक माह की बेटी
जवान पूनम चंद की शादी डेढ़ साल पहले ही हुई थी। उसके एक महीने की बेटी है। बेटी से मिलने के लिए ही वो छुट्‌टी लेकर घर लौट रहा था कि गांव से कुछ ही दूरी पर भामटसर में ये हादसा हो गया। वो तीन महीने बाद छुट्‌टी पर घर आ रहा था ताकि अपनी बेटी से मिल सके। हादसे में ट्रक ने जीप को इतनी बूरी तरह से टक्कर मारी की आगे का हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। भादू के सिर सहित अन्य हिस्सों पर गंभीर चोट लगी थी। पुलिस ने इस मामले में ट्रक को कब्जे में ले लिया है।

नोखा का तीसरा जवान, जिसकी ड्यूटी के दौरान गई जान
पिछले एक महीने में नोखा का ये तीसरा युवा है, जिसने सेना में ड्यूटी रहते हुए जान दे दी। इससे पहले बजरंगलाल लेघा और तुलछाराम सियाग का निधन हो गया था। इसमें बजरंगलाल जम्मू-कश्मीर में और तुलछाराम सियाचिन ग्लेशियर में ड्यूटी दे रहे थे।