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फसलों पर मौसम की मार:5 दिन की सर्दी से महीनों की मेहनत पर जमी बर्फ, अनार और सरसो की 70% फसलें बर्बाद

बीकानेर12 दिन पहले
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सरसो की फसल पर जमी बर्फ। कृषि विशेषज्ञ इंद्रमोहन शर्मा का कहना है कि सर्दी से मैदानी एरिया में ज्यादा नुकसान हुआ है। अरावली की पहाड़ियों में खेती करने वाले किसानों को तुलनात्मक दृष्टि से कम नुकसान हुआ है। - Dainik Bhaskar
सरसो की फसल पर जमी बर्फ। कृषि विशेषज्ञ इंद्रमोहन शर्मा का कहना है कि सर्दी से मैदानी एरिया में ज्यादा नुकसान हुआ है। अरावली की पहाड़ियों में खेती करने वाले किसानों को तुलनात्मक दृष्टि से कम नुकसान हुआ है।

कड़ाके की सर्दी के चलते राज्य में अनार की फसल बर्बाद हो गई है, जबकि सरसो पर भी बर्फ जमने से नुकसान हुआ है। पश्चिमी राजस्थान में नुकसान ज्यादा हुआ है, जबकि पूर्वी राजस्थान में भी फसलें खराब होने की आशंका जताई जा रही है। दरअसल, मैदानी एरिया में बर्फ जमने से से खेत में खड़ी फसल खराब हुई है। फसलों के नुकसान को लेकर कृषि विभाग की ओर से कोई सर्वे फिलहाल नहीं हो रहा है।

पश्चिमी राजस्थान में कुछ समय से अनार की जबर्दस्त खेती हो रही है। अनार को पकने के लिए अच्छी गर्मी की जरूरत होती है, लेकिन तापमान में कमी से अनार की फसलें बर्बाद हो रही हैं। बीते दिनों जब बीकानेर सहित पश्चिमी राजस्थान में तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचा तो इसी फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ।

देशनोक के ओम प्रकाश भांभू बताते हैं कि करीब 70 परसेंट अनार खराब हो गए हैं। गर्मी से अनार के दानों का रंग लाल होता है, लेकिन इस बार सर्दी के कारण अनार पक नहीं पाए। कई किसानों ने सर्दी से बचाव के लिए अनार को पैक भी करवाया, लेकिन उससे भी दस-बीस परसेंट फसल ही बच पाई। इसी तरह नागौर जिले के कई एरिया में अमरुद के पेड़ों को भी काफी नुकसान उठाना पड़ा है।

बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, नागौर, जोधपुर व जैसलमेर में सरसो की खेती होती है। इस बार चार पांच दिन जमी बर्फ ने सरसो को भी नुकसान पहुंचाया है। सरसो की पत्तियों पर बर्फ पूरी तरह जम गई थी। लूणकरनसर क्षेत्र के कुछ खेतों में तो सत्तर से 80 परसेंट सरसो खराब हो गई। हालांकि सभी जगह ऐसे हालात नहीं है। सब जगह नुकसान के आंकड़े अलग-अलग हैं।

कृषि विशेषज्ञ इंद्रमोहन शर्मा का कहना है कि सर्दी से मैदानी एरिया में ज्यादा नुकसान हुआ है। अरावली की पहाड़ियों में खेती करने वाले किसानों को तुलनात्मक दृष्टि से कम नुकसान हुआ है।

बच गए छोटे पौधे
दरअसल, गेहूं और चने की फसल इन दिनों खेत में खड़ी है। यहां पौधे अभी छोटे हैं, ऐसे में पाला पड़ने पर भी इन पर ज्यादा असर नहीं हुआ। फलों के पौधे ऊंचाई पर होते हैं, ऐसे में उन पर ज्यादा असर पड़ा है। अभी गेहूं, सरसो और चने की फसल पकने की रफ्तार धीमी हुई है। जो फसल फरवरी के मध्य तक पककर तैयार होनी थी वो अब दस से पंद्रह दिन लेट हो सकती है।

कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. उदयभान का कहना है कि फसल खराब होने का डर कम है लेकिन फसल अब विलंब से होने का खतरा है। फिलहाल कृषि विभाग नुकसान की कोई गिरदावरी नहीं करवा रहा है।

इंश्योरेंस क्लेम नहीं
प्रदेश में बाड़मेर के अलावा कहीं भी अनार की फसल को नुकसान होने पर इंश्योरेंस क्लेम में शामिल नहीं किया जाता। बीकानेर के अलावा अन्य जिलों में भी अनार की फसल बड़ी मात्रा में हो रही है लेकिन इसे इंश्योरेंस में शामिल नहीं किया गया। वर्तमान में अनार का भाव पांच हजार रुपए क्विंटल है। प्रति क्विंटल किसान को तीन हजार रुपए का नुकसान हो रहा है।