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  • These Three Tell ... The Specifics Of Medicine Dodge To Body Disposal From Corona Examination To The Leave Of The Patient, Made 300 Page Book

बिहाइंड द कर्टन:ये तीन बताते हैं... दवाई की डाॅज से लेकर बाॅडी डिस्पोज तक की बारीकियां कोरोना जांच से मरीज की छुट्‌टी तक के लिए बना दी 300 पेज की किताब

बीकानेर2 वर्ष पहले
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  • प्राेटाेकाॅल कमेटी रिसर्च, गाइड लाइन, इंस्ट्रक्शन के दस्तावेज खंगाल कर, फ्रंटलाइन वालाें काे बताती है, ट्रीटमेंट के अपडेट, बचाव के उपाय
  • अतिरिक्त प्राचार्य डा.रंजन माथुर, स्किन-वीडी विभागाध्यक्ष डा.अार.डी.मेहता, पीएसएम की डा.कीर्ति शेखावत जुटे है इस काम में

(धीरेन्द्र आचार्य) मेडिकल काॅलेज में अतिरिक्त प्राचार्य कक्ष के अपने चैंबर में माैजूद डा.रंजन माथुर। सामने स्किन-वीडी विभागाध्यक्ष प्राेफेसर डा.अार.डी.मेहता, पीएसएम की सीनियर डेमाेंस्ट्रेटर डा.कीर्ति शेखावत। तीनाें में चल रहा गंभीर चिंतन-मंथन। चर्चा उन डाक्टर-नर्सेज की अगली ड्यूटी पर केन्द्रित हैं जाे काेराेना वार्ड में 10 दिन सेवा दे चुके हैं। इसके बाद 14 दिन क्वारेंटाइन के लिए भेज दिया गया है। यह समय पूरा हाेते ही उनकी फिर से जांच हाेगी। रिपोर्ट नेगेटिव आ जाएं तब भी क्या अगले दिन से इन्हें ही वापस ड्यूटी पर लिया जाए या नए बैच काे जिम्मेवारी दी जाएं। बातचीत में कभीअाईसीएमअार की गाइड लाइन का हवाला  अाता है ताे कभी डब्ल्यूएचअाे के इंस्ट्रक्शन। मिनिस्ट्री अाॅफ हैल्थ एंड फैमिली वेलफेयर के उस ड्राफ्ट के पन्ने भी पलटे जाते हैं जिनमें स्वास्थ्यकर्मियाें की सेफ्टी के निर्देश हैं।
कहने काे यह मेडिकल काॅलेज प्राचार्य की अाेर से बनाई गई प्राेटाेकाॅल कमेटी है जिसे काेराेना कंट्राेल कमेटी कह दिया जाए ताे अतिश्याेक्ति नहीं हाेगी। सुबह से रात तक ये सैकड़ाें पन्नाें की गाइड लाइन, निर्देशाें काे खंगालते हैं। फ्रंट लाइन पर काम करने वाले डाक्टर्स काे बताते हैं, दवाई की गाइडेड डाॅज। सिम्टाेमैटिक ट्रीटमेंट के प्राेटाेकाॅल। नर्सेज काे देख-रेख के तरीके के साथ ही खुद सुरक्षित रहने के उपाय। पीपीई किट पहनने से लेकर खाेलने अाैर डिस्पाेज करने की प्रक्रिया तक बताते हैं। चूंकि काेविड-19 बीमारी का अभी तक न काेई अधिकृत इलाज है न वैक्सीन, एेसे में हर दिन नए अपडेट अाते रहते हैं। इनसे कमेटी न केवल फ्रंटलाइट काे अपडेट कर रही है वरन उनके लिए स्थानीय स्तर पर संक्षिप्त गाइड लाइन तैयार करने के साथ ही इसके मुताबिक जरूरत के संसाधन भी जुटाती है। सिर्फ फ्रंट लाइन पर काम कर रहे डाक्टर-नर्सेज काे ही नहीं बाकी व्यवस्था में लगे डाक्टर्स-कमेटियाें से भी समन्वय कर उनहें स्टैंडर्ड ऑपरेटिव प्रोटोकॉम बताते है। मसलन, मरीजों के साथ ही इलाज व्यवस्था में जुटे स्टॉफ को मानसिक संबल देना, रहने को स्वच्छ वातावरण, भोजन आदि। कुल मिलाकर लगभग 300 पेज का दस्तावेज अब तक तैयार कर चुकी है ये छिपे हुए कोरोना योद्धा। 

यूं समझिये, कितनी महत्वपूर्ण है कमेटी की सलाह
कमेटी ने गाइड लाइन बनाई कि चाहे किसी व्यक्ति की जांच में रिपाेर्ट नेगेटिव अाए लेकिन उसे 14 दिन क्वारेंटाइन में रखा जाएगा। इतना ही नहीं यह 14 दिन खत्म हाेने के बाद फिर से जांच करेगी। इस वक्त भी नेगेटिव रिपाेर्ट अाई ताे घर भेजेंगे। हाल ही बीकानेर में एेसा ही एक मामला सामने अाया है जब नेगेटिव व्यक्ति काे 14 दिन बाद छुट्टी देने से पहले जांच की ताे पाॅजिटिव अाया। जाहिर है, इस गाइड लाइन ने कितने लाेगाें में संक्रमण फैलने से बचा लिया।
यह एक, सबके लिए  

एचआईसीसी यानी हास्पिटल इन्फेक्शन कंट्राेल कमेटी हाे या क्वारेंटाइन-अाइसाेलेशन में कामकाज व्यवस्था संभालना। मेडिकल काॅलेज प्राचार्य ने हर काम के लिए एक कमेटी बना रखी है। प्राेटाेकाॅल कमेटी वह है जाे सभी के लिए गाइड लाइन बनाकर उनके काम में सहयाेग अाैर समन्वय करती है।

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