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देश में जल संकट के हालात:राजस्थान के बांधों में 19% और MP में 26% पानी कम; देश के 130 में से 124 बांधों में पूरा पानी नहीं

राजस्थानएक महीने पहलेलेखक: अनुराग हर्ष

कमजोर मानसून के चलते इस बार राजस्थान समेत पूरे देश में जल संकट के हालात हैं। सिंचाई और पीने योग्य पानी के लिए देशभर में बने 130 बांधों में महज 6 बांधों में क्षमता के मुताबिक पूरा पानी है, बाकी 124 बांधों में 100% पानी नहीं आया है। देश के 25 बांध तो ऐसे हैं, जहां 50% पानी भी नहीं पहुंच पाया है। सेंट्रल वॉटर कमीशन की 26 अगस्त को जारी रिपोर्ट में इसकी पुष्टि की गई है। हालांकि, आने वाले दिनों में मानसून फिर से सक्रिय होता है तो कुछ बांधों में पानी का लेवल बढ़ सकता है।

बांधों की क्षमता के मुकाबले सिर्फ 63% पानी
सेंट्रल वॉटर कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक देश के बांधों में इस समय 108 BCM (बिलियन क्यूबिक मीटर) पानी है, जबकि पिछले साल 130.629 BCM पानी था। पिछले दस सालों में देश के बांधों में 113.585 BCM पानी रहा है। यानी सीधे तौर पर समझा जाए तो देश के बांधों में जितना पानी होना चाहिए, इस बार उसका महज 63% ही है, जबकि पिछले साल 83% और पिछले दस सालों में 96% पानी रहा है।

जयपुर का कालख डैम अब तक सूखा हुआ है, जबकि अगस्त के आखिर तक इसमें काफी पानी देखा जाता रहा है।
जयपुर का कालख डैम अब तक सूखा हुआ है, जबकि अगस्त के आखिर तक इसमें काफी पानी देखा जाता रहा है।

पंजाब के बांधों में 44% पानी कम, राजस्थान में 19% की कमी
पंजाब और हिमाचल प्रदेश में सबसे ज्यादा संकट है। हिमाचल प्रदेश में बारिश कम होने से बांधों में पानी कम पहुंचा है। इससे राजस्थान के भी हजारों किसानों को नहरी पानी मिलने की उम्मीद कम हो गई है। हालात इतने बदतर हैं कि जिन बांधों से राजस्थान को पानी मिलता है, वहां क्षमता से आधा पानी है। हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्थान के किसी भी बांध में क्षमता के मुताबिक पानी नहीं आया है। इस मामले में पंजाब टॉप पर है, वहां 44% पानी कम है। वहीं हिमाचल प्रदेश में 42% और राजस्थान में 19% कम पानी आया है। इन तीन राज्यों में आठ बांध हैं, जिसमें चार यानी आधे बांधों में तो 40% परसेंट से भी कम पानी है। 80 से 90% तक पानी सिर्फ एक ही बांध में है, जबकि 50 से 61% पानी वाले तीन बांध हैं।

मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश में भी हालात अच्छे नहीं
देश के मध्य में स्थित राज्यों में भी इस बार पानी उम्मीद से कम है। मध्य भारत के 23 बांधों में से 5 में तो 40% से कम पानी है। वहीं चार बांधों में 40 से 50% तक पानी आया है। मध्य प्रदेश में तो कुल क्षमता से 26% कम पानी आया है। वहीं छत्तीसगढ़ में 4% कम पानी है। उत्तर प्रदेश में 15% और उत्तराखंड में 4% पानी आया है।

कहां कितना पानी

राज्यइस सालपिछले सालदस वर्षों में
हिमाचल प्रदेश5.678.559.74
पंजाब0.941.091.68
राजस्थान2.763.173.38
झारखंड1.431.301.29
उड़ीसा7.039.879.41
वेस्ट बंगाल0.970.980.84
त्रिपुरा0.160.250.19
नागालेंड0.220.370.36
गुजरात6.7511.759.68
महाराष्ट्र12.8415.4212.28
उत्तरप्रदेश4.544.233.93
उत्तराखंड3.513.613.38
मध्य प्रदेश16.2524.8621.94
छत्तीसगढ़3.043.503.15
आंध्रप्रदेश2.991.970.91
तेलंगाना3.742.991.85
कनार्टक21.1020.1818.22
केरल2.572.492.36
तमिलनाडू2.353.122.65

(जलस्तर बिलियन क्यूबिक मीटर में है और लाइव स्टॉक का है। लाइव स्टॉक से आशय उस पानी से है, जो पीने के या सिंचाई के काम आ सकता है।)

राजस्थान में हिमाचल का असर
राजस्थान के बांधों में पानी कम आया है, लेकिन इससे भी ज्यादा दिक्कत ये है कि हिमाचल में बारिश कम हुई है। पश्चिमी राजस्थान को हिमाचल प्रदेश के गोबिन्द सागर (भाखड़ा) और पोंग डैम से पानी मिलता है। इस बार भाखड़ा डैम में 64% पानी है, जबकि पोंग डैम में तो महज 52% पानी है।

कोटा में हालात ठीक, जयपुर-उदयपुर में खराब
इस बार मानसून का राजस्थान में खास असर नहीं रहा। सिर्फ कोटा में पानी की स्थिति कुछ ठीक है, लेकिन जयपुर और उदयपुर में स्थिति खराब है। जयपुर को पानी देने वाले बीसलपुर बांध में अभी 50% पानी है। वहीं कोटा को पानी देने वाले माही बजाज सागर बांध में 76% पानी है। प्रतापगढ़ के जाखम बांध में महज 40% पानी है। जाखम से ही उदयपुर संभाग को पानी मिलता है।

पाली के जवाई बांध पर कई गांव निर्भर हैं, लेकिन यहां भी पानी काफी कम आया है।
पाली के जवाई बांध पर कई गांव निर्भर हैं, लेकिन यहां भी पानी काफी कम आया है।

एक्सपर्ट बोले- स्थिति खतरनाक है, किसानों को पानी मिलना चाहिए
जलदाय विभाग के रिटायर्ड SE बी जी व्यास का कहना है कि देश के बांधों में इतना कम पानी होना चिंताजनक है। खासकर राजस्थान में पानी बहुत कम आया है। हिमाचल के पोंग और भाखड़ा डैम से हमारे राज्य के 11 जिलों को पीने का और सिंचाई का पानी मिलता है, लेकिन इस बार आधा पानी है। बीसलपुर में भी ज्यादा पानी जमा नहीं हो पाया है।

नहरों के मामलों में एक्सपर्ट नरेंद्र आर्य का कहना है कि देश के कुछ हिस्सों को छोड़ दें तो ज्यादातर में पानी क्षमता से कम है। ऐसे में केंद्र सरकार को किसानों के प्रति नरम रुख अपनाते हुए नीतियों में बदलाव करना चाहिए। सिंचाई के लिए हरसंभव प्रयास कर किसानों को पानी देना चाहिए, ताकि देश में अन्न की कमी नहीं आए।

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