भास्कर स्टिंग:सांसों से ट्रिपल धोखा; सिलेंडर में ऑक्सीजन कम, दाम ज्यादा, वेटिंग घंटों तक

बीकानेर6 महीने पहले
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कैमरे में कैद जवाब : करणी इंडस्ट्रियल एरिया स्थित गैस रिफिलिंग सेंटर का संचालक बोला-500 ही लगेंगे। - Dainik Bhaskar
कैमरे में कैद जवाब : करणी इंडस्ट्रियल एरिया स्थित गैस रिफिलिंग सेंटर का संचालक बोला-500 ही लगेंगे।

मेडिकल इमरजेंसी के इस दौर में ऑक्सीजन सबसे बड़ा सहारा है। भारी मांग के चलते ऑक्सीजन की भयंकर किल्लत है, इसलिए प्रशासन इसकी माॅनिटरिंग कर रहा है। सरकार, एडमिनिस्ट्रेशन और हैल्थ डिपार्टमेंट की पहली प्राथमिकता अस्पताल में भर्ती गंभीर कोरोना मरीजों की सांसों को बचाए रखना है। लेकिन, इस सारी जद्दोजहद के बीच आक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी और सिलेंडर में कम ऑक्सीजन रिफिल करने की बात भी सामने आई।

सामाजिक सरोकार को प्राथमिकता से लेने वाले दैनिक भास्कर ने गुरुवार को टीम से शहर में ऑक्सीजन की सप्लाई चेन चैक कराई तो चौंकाने वाले हालात नजर आए। करनी इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक निजी गैस प्लांट का स्टिंग ऑपरेशन किया तो सामने आया कि भले ही प्रशासन ने तमाम बैरियर लगाकर गड़बड़ियां रोकने की कोशिश की हो, लेकिन कहीं प्रशासन का कंट्रोल नजर नहीं आया। पढ़िए नवीन शर्मा और मनीष पारीक की ये विशेष रिपोर्ट।

पहला धोखा- मुंह देखकर टीका निकाल रहे : पीबीएम से 187 रुपए , ट्रस्ट से 250, निजी हाॅस्पिटल से 350 और आम लोगों से 500 रुपए वसूले

बीकानेर में कोरोना के मरीजों को इस वक्त ऑक्सीजन की सबसे ज्यादा जरूरत है। कालाबाजारी रोकने और जरूरतमंद को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने तीनों प्लांट अधिग्रहित कर रखे हैं। उसके बावजूद होम आइसोलेट कोरोना रोगियों को एक सिलेंडर रिफिल कराने की तीन गुना कीमत देनी पड़ रही है। सिलेंडर की सिक्योरिटी के साथ किराया अलग से लिया जा रहा है।

घरों में आइसोलेट करोना रोगियों से एक सिलेंडर रिफिल करने के 500 रुपए वसूले जा रहे हैं। जबकि पीबीएम हॉस्पिटल में 187 रुपए में रिफिलिंग सहित सभी खर्चे प्लांट मालिक उठा रहा है। कोरोना पीड़ितों को निशुल्क सिलेंडर मुहैया कराने वाले रांका ट्रस्ट को 250 रुपए और प्राइवेट हॉस्पिटल्स को 350 रुपए में सिलेंडर रिफिल करके दिया जा रहा है।

कोरोना मरीजों की सांस बचाने के लिए उनके परिवार को तमाम जद्दोजहद करनी पड़ रही है। प्लांट से एक सिलेंडर के लिए 10 हजार सिक्योरिटी व दो हजार रुपए किराया भी वसूला जा रहा है। भास्कर टीम को कोरोना पीड़ित के परिजन ने एक पर्ची दी, जिस पर पूरा हिसाब लिखा हुआ है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि एेसी वसूली से आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है।

दूसरा धोखा ऑक्सीजन के बिना एक-एक मिनट निकालना मुश्किल, अटेंडेंट चार घंटे तक सिलेंडर के लिए परमिशन की फाॅर्मेल्टी कर रहे

प्रशासन ने ऑक्सीजन की सप्लाई पर ऐसा पहरा बैठा रखा है कि कोरोना रोगियों को परमिशन के लिए चार घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। रामपुरिया मोहल्ला निवासी नरेश गोलछा ने ऑक्सीजन रिफिलिंग के लिए गुरुवार शाम को 5.30 बजे प्रशासन की ओर से बनाई कमेटी को डिमांड भेजी थी। उन्हें रात पौने नौ बजे परमिशन मिली, वो भी कलेक्टर के हस्तक्षेप करने पर।

गोलछा, उनकी पत्नी और मां तीनों कोरोना पॉजिटिव हैं। तीनों होम आइसोलेट हैं। हर दूसरे दिन ऑक्सीजन सिलेंडर की जरूरत पड़ती है। प्रशासनिक लापरवाही इस हद तक है कि कमेटी के सदस्य वाट्स एप पर आए मैसेज भी नहीं देख रहे हैं। आरोप है कि गोलछा परिवार को सिलेंडर की रिफिलिंग कराने के लिए जॉइंट डायरेक्टर डॉ. देवेंद्र चौधरी को 5.30 बजे मैसेज किया था। सात बजे वापस चौधरी से बात की तो उन्होंने मैसेज फिर भेजने को कहा। अंत में कलेक्टर के हस्तक्षेप पर गोलछा परिवार को सिलेंडर मिले।

ये है प्रक्रिया: दरअसल, कलेक्टर ने सीओ जिला परिषद ओमप्रकाश की अध्यक्षता में तीन सदस्यों की कमेटी बना रखी है। अधिकारी डिमांड एक दूसरे को फॉरवर्ड करते हैं। असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर सुभाष मुटनेजा अंत मे डिमांड ऑक्सीजन प्लांट मालिक को भेजते हैं, उसके बाद सिलेंडर रिफिल हो पाता है।

तीसरा धोखा- सिलेंडरों में 150 की बजाय 125 का प्रेशर ही मिला, यही पीबीएम को भी सप्लाई किया गया

ऑक्सीजन सिलेंडर का पूरा पैसा देने के बाद भी सिलेंडर में ऑक्सीजन कम मिल रही है। भास्कर टीम ने पीबीएम हॉस्पिटल के लिए भेजे जा रहे ऑक्सीजन सिलेंडर का प्रेशर चेक किया तो 150 की बजाय 125 से 130 का प्रेशर ही मिला। एक सिलेंडर में 150 का प्रेशर और करीब 49 लीटर गैस होनी चाहिए। जबकि किसी में 125 तो किसी में 135 का ही प्रेशर मिल रहा है।

सिलेंडर लगते वक्त भी गैस लॉस होती है। ऐसे में लोगों को पूरा पैसा देने के बाद भी गैस कम मिल रही है। भास्कर टीम ने प्लांट पर रिफिलिंग के लिए आए सिलेंडरों का प्रेशर चेक किया तो सभी की यही स्थिति थी।

मेरे पास करीब ढाई सौ सिलेंडर हैं। इन्हीं का सर्किल बना हुआ है। एक सिलेंडर करीब 12 हजार का मिलता है। एक टैंकर की कीमत तीन लाख से ज्यादा है। दूसरे खर्चे भी हैं। उसके बाद भी रेट काफी कम हैं। पीबीएम को सप्लाई देने में जेब से पैसा लग रहा है। हम लोगों से 400 रुपए ही रिफिलिंग के ले रहे हैं। किराया उसी सूरत में लिया जा रहा है, जिन्हें 2-3 महीने के लिए सिलेंडर की जरूरत है। प्रेशर कम होने की बात सही है, क्योंकि सिलेंडर पुराने हैं। पीबीएम में 15 साल पुराने सिलेंडर हैं। उनकी टेस्टिंग तक समय पर नहीं होती है। ज्यादा प्रेशर पर फटने का डर रहता है।-दिलीप गहलोत, दिलीप गैस एजेंसी, करनी इंडस्ट्रियल एरिया

होम आइसोलेट हो या प्राइवेट हॉस्पिटल की डिमांड हम 15 से 20 मिनट में ऑक्सीजन रिफिलिंग की डिमांड प्लांट वाले को भेज देते हैं। इस काम मे जरा भी देर नहीं की जाती है। डिमांड के साथ डॉक्टर की पर्ची जरूरी है। -डॉ देवेंद्र चौधरी, जॉइंट डायरेक्टर हैल्थ

ऑक्सीजन रिफिलिंग के रेट 500 रुपया ज्यादा हैं। इसे चेक करवाया जाएगा। कोरोना काल है। लोगों को कम दर पर सिलेंडर मिलने चाहिए। सप्लायर को लागत मूल्य पर ही सिलेंडर देने के लिए कहा जाएगा। सिलेंडर देने की प्रक्रिया को भी सरल बनाया जाएगा। लोगों को परेशानी नहीं आने दी जाएगी। -नमित मेहता, कलेक्टर

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