मेयर हाउस की जमीन पर विवाद का बोर्ड:यूआईटी ने सुबह निगम का बोर्ड हटाया, शाम को निगम ने उसका

बीकानेर2 महीने पहले
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मेयर हाउस बनने वाली जमीन विवादों में आ गई है। नगर निगम ने वीर दुर्गादास सर्किल के पास जहां मेयर हाउस बनाने के लिए टेंडर किया था, वहां मंगलवार को अचानक इतनी तेजी से घटनाक्रम बदला कि शहर का विकास करने वाले दो प्रमुख महकमे आमने-सामने हो गए। यूआईटी काे खबर लगी कि निगम उस जमीन पर मेयर हाउस बना रहा तो मंगलवार की अलसुबह नगर निगम का बोर्ड हटाकर नगर विकास न्यास का बोर्ड लगाकर तारबंदी तक कर दी।

दोपहर दो बजे मेयर सुशीला कंवर यहां से निकलीं तो नजर यूआईटी के बोर्ड पर पड़ी। अधिकारियों को बुलाया। कारण पूछा, लेकिन किसी अफसर के पास जानकारी नहीं थी। शाम पांच बजे निगम ने अधिकारियों को वापस न्यास का बोर्ड जब्त कर निगम का बोर्ड लगा दिया।

निगम का दावा इसलिए : खाता संख्या 76 और खसरा नंबर 447 के मुताबिक 5.1 हैक्टेयर जमीन को राज्य सरकार ने 2003-04 में गैर मुमकिन आबादी मानते हुए जमीन नगर निगम को दी थी। अप्रैल 2021 में इस जमीन पर मेयर हाउस बनाने के लिए तत्कालीन निगम आयुक्त एएच गौरी ने लैंड बैंक डिटेल, टीएस सर्वे रिपोर्ट, नक्शा, भूमि का सीमांकन आदि कागजात क्लियर कराए।

यूआईटी का इसलिए: दीनदयाल सर्किल से ओम बन्ना मंदिर, न्यायाधीश की कोठियों से लेकर दुर्गादास सर्किल से दीनदयाल सर्किल तक बाईं ओर की जमीन यूआईटी की है। यहां क्वार्टर और दुकानें यूआईटी की हैं, फिर बीच में 100 बाई 222 फीट की जमीन निगम की कैसे हुई।

यूआईटी अध्यक्ष नमित मेहता से बातचीत-

Q- दुर्गादास सर्किल के पास एक जमीन को लेकर नगर निगम-यूआईटी आमने-सामने हाे गए हैं। क्या दो विभागों के बीच इस तरह की लड़ाई उचित है।
A-नहीं, बिल्कुल नहीं। जिसके पास कागज है, जमीन उसी की है। अगर दोनों का दावा है तो सीनियर टाउन प्लानर के पास कागज देखकर निर्णय करूंगा।

Q- अगर कागज से ही फैसला होना है तो यूआईटी ने निगम का बोर्ड क्यों उखाड़ा, कागज दिखाकर भी जमीन का निर्णय हो सकता था।
A- बिल्कुल हो सकता था। यूआईटी को इस तरह बोर्ड नहीं हटाना चाहिए था। निगम को भी बाद में वो बोर्ड नहीं उखाड़ने चाहिए थे।

Q- अब निगम कह रहा कि अगर यूआईटी ऐसे ही करेगी तो हम यूआईटी की कॉलोनियों में सफाई का काम नहीं कराएंगे।
A- ना तो यूआईटी सचिव की वो जमीन है और ना ही निगम कमिश्नर की। वो राजकीय संपत्ति है। इस तरह सड़क पर दो विभागों की लड़ाई से सरकारी महकमों की बदनामी होती है। बोर्ड उखाड़ना बहुत छोटी सोच है। मैं जल्द ही दोनों विभागों के अधिकारियों को बैठाकर कागजों के आधार पर निर्णय करूंगा। निगम सफाई बंद नहीं कर सकती क्योंकि वो जनहित का काम है।

मैंने सिर्फ अपनी जमीन पर बोर्ड लगाया है। मैंने यहां ट्रैकिंग प्लान बनाया है, जो सरकार को प्रस्ताव भेज चुका हूं। मेरी मेयर से कोई निजी खुन्नस नहीं है। मैं जिस विभाग में हूं, उसकी पूरी ईमानदारी से जिम्मेदारी निभा रहा हूं। -नरेन्द्र सिंह राजपुरोहित, यूआईटी सचिव

प्रभारी मंत्री के पास फाइल पहुंच चुकी है। निगम यहां मेयर हाउस बनाना चाहती है। 15 साल पुरानी एक खुन्नस के कारण सचिव ने इससे पहले भी निगम के 22 बोर्ड तोड़कर सरकारी संपदा को नुकसान पहुंचाया था। -सुशीला कंवर राजपुरोहित, मेयर

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