श्रीडूंगरगढ़ में ट्रैफिक बदहाल:आधी सड़क पर दुकानों का कब्जा, रोड पर पार्किंग

श्रीडूंगरगढ़एक महीने पहले
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  • पुलिस, जनप्रतिनिधि और जनता तीनों जिम्मेदार

‘सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए। मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।’ कवि दुष्यंत कुमार की ये पंक्तियां श्रीडूंगरगढ़ कस्बे की बदहाल यातायात व्यवस्था के लिए एकदम सटीक बैठती है जो क्षेत्र के हर एक जन के लिए नासूर बन चुकी है।

श्रीडूंगरगढ़ कस्बे के घूमचक्कर से चलने वाली यह बदहाली कस्बे में प्रवेश कर पूरे मार्ग के साथ पुरानी नगरपालिका, गांधी पार्क, गौरव पथ की ओर जाने वाला चौक, रानी बाजार, सरकारी हॉस्पिटल तक इतने बेतरतीब तरीके से पसरी हुई मिलती है कि कस्बे के शहवासियों के साथ ग्रामीण अंचल से आने वाले लोगों को भी खूब परेशानी उठानी पड़ती है। इसके बावजूद पुलिस प्रशासन, नगरपालिका प्रशासन और क्षेत्र के जनप्रतिनिधि इसे अनदेखा कर रहे है जबकि ये सभी खुद इस अव्यवस्थित यातायात व्यवस्था से परेशान है।

एम्बुलेंस तक को करना पड़ता है इंतजार
पूरे क्षेत्र का एकमात्र सीएचसी कस्बे के मध्य में अवस्थित है। इस कारण से किसी भी मामले में गंभीर रोगी को यहां लाया जाता है परंतु इस दम घोटू यातायात में एंबुलेंस भी रेंगकर चलने को मजबूर हो जाती है चाहे अंदर लेटे मरीज के लिए हर एक क्षण जिंदगी और मौत से जूझने वाला ही क्यों न हो।

जनता और प्रशासन के मध्य तालमेल का अभाव

कस्बे की बदहाल यातायात व्यवस्था के पीछे प्रशासन और व्यापारी वर्ग के साथ आमजन के मध्य तालमेल के अभाव की झलक साफ देखने को मिलती है। पुलिस प्रशासन द्वारा पूर्व में यातायात को सुगम बनाने के उद्देश्य से की गई कार्रवाई से व्यापारी वर्ग ख़ासा नाराज हुए था जिसके बाद पुलिस प्रशासन ने भी कदम पीछे रख दिए जिसके कारण अब यातायात व्यवस्था और ज्यादा ठप हो चुकी है।

जहां मन किया, वहीं खड़ा कर दिया वाहन
कस्बे में आस-पास के ग्रामीण भी बड़ी संख्या में खरीददारी के लिए आते है और इनमें कई लोग पिकअप या अपना वाहन लेकर आते है। परंतु हद तब है जब दुकानों से सामान लेने के लिए आये ये लोग अपने वाहनों को बेतरतीब तरीके से रोड पर खड़ा कर देते है जिसके कारण लंबे जाम जैसी स्थिति बन जाती है और बजने लग जाते है हॉर्न पर हॉर्न। खुद की सुविधा के लिए आमजन को तकलीफ में डालने के बाद भी किसी के कान पर जूं तक नहीं रेंगती जो वाकई में चौंकाने वाली बात है।

वहीं कस्बे के इन मुख्य मार्गों के अवरुद्ध होने का मुख्य कारण दुकानदारों द्वारा अपने दुपहिया वाहनों को दुकान के आगे सड़क पर ही पार्क करना है। सड़क के दोनों ओर बनी दुकानों के मालिक अपने दुपहिया वाहनों को रोड पर खड़ा कर देते हैं और उसके बाद रही सही कसर दुकानदारों द्वारा अपनी तय दुकान सीमा से 2 फुट आगे तक समान रख देने से पूरी हो जाती है। इसके कारण सड़क मात्र 6 फुट ही चौड़ी बचती है जहां से एक ऑटो भी बड़ी मुश्किल से निकल पाता है।

धूल फांक रही नगरपालिका की बेशकीमती जमीन, अवैध अतिक्रमण

श्रीडूंगरगढ़ कस्बे के मुख्य बाजार में आज से 51 वर्ष पूर्व भामाशाहों द्वारा यात्री विश्रामालय बनवाया गया था। यह जमीन नगरपालिका की ही है परंतु आज यह विश्रामालय जर्जर अवस्था में खड़ा है जो किसी भी उपयोग का नहीं है। इसके चारों और भी अवैध दुकानों का जमावड़ा हो लग चुका है परंतु प्रशासन मूकदर्शक की भूमिका में है। ज्ञात रहे कि नगरपालिका की यह बेशकीमती जमीन दूरदर्शी और ठोस क्रियान्विति के अभाव में खाक छान रही है। यहां पर नगरपालिका द्वारा अस्थाई रूप से ऑटो स्टैंड बनाया गया है परंतु निजी बसें, हाथठेले, अस्थाई दुकानें पूरी जमीन पर काबिज है।

श्रीडूंगरगढ़ कस्बे की यातायात संबंधी व्यवस्था के प्रति प्रशासन के साथ जनमानस का साथ भी बहुत जरूरी है ताकि बढ़ते कस्बे के साथ यातायात व्यवस्था चरमराए नहीं। इसके लिए नगरपालिका प्रशासन, पुलिस प्रशासन, व्यापारी वर्ग आदि को एक मंच पर आकर इसके लिए ठोस कदम उठाने होंगे।-गिरधारीलाल महिया, विधायक

कस्बे के लिए नगरपालिका द्वारा पार्किंग की जल्द ही कोई व्यवस्था करवाई जाएगी। आमजन को भी अतिक्रमण मुक्त सड़क रखने का प्रयास करना चाहिए।-मानमल शर्मा, पालिकाध्यक्ष

पालिका प्रशासन जल्द ही अवैध अतिक्रमणों के कारण हो रही यातायात दुविधा के निपटान के लिए ठोस कदम उठाएगी। पूर्व में भी दुकानदारों को इस संदर्भ में नोटिस दिए जा चुके हैं।-भवानीशंकर, अधिशासी अधिकारी

पुलिस प्रशासन द्वारा यातायात व्यवस्था के संदर्भ में माकूल प्रयास किए जाएंगे। पार्किंग और निजी बस स्टॉप की सुविधा कस्बे को मिल जाए तो शहर के विकास में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और यातायात भी सुचारू रहेगा।-वेदपाल शिवराण, थानाधिकारी

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