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मिशन सुरक्षित बचपन:यह नवाचार करने वाला प्रदेश का पहला जिला बनेगा बूंदी, देलूंदा गांव से मिशन होगा शुरू, बच्चियों से दुष्कर्म व छेड़छाड़ राेकेंगे

बूंदी12 दिन पहलेलेखक: दिनेश शर्मा
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प्रदेश में बढ़ रही मासूम बच्चियों से हैवानियत की घटनाओं की रोकथाम के लिए बूंदी पुलिस ‘मिशन सुरक्षित बचपन’ कर मंगलवार से आगाज करेगी। पुलिस ने बूंदी जिले के ऐसे गांव चिह्नित किए हैं, जहां ऐसे अपराध ज्यादा हो रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड में सामने आया है कि 90% अपराधों में पीड़िता के रिश्तेदार और जानकार ही शामिल हैं। 88% बालिकाओं से अश्लीलता व दुष्कर्म काम हुआ तो 12% बालक भी अपराध का शिकार हुए। 13 साल से 18 वर्ष तक की उम्र की बेटियों के 90% मामले सामने आए।

इन अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए अब पुलिस 19 पंचायतों में चौपाल लगाएगी। स्कूलों में पॉक्सो और जेजे एक्ट (जुवेनाइल जस्टिस) का पाठ पढ़ाएगी। प्रदेश में बूंदी पुलिस पहली बार इस तरह का नवाचार कर रही है। इसके बाद सरकार इसे दूसरे जिलाें में भी लागू कर सकती है। बूंदी पुलिस द्वारा चलाए ऑपरेशन समानता मिशन भी प्रदेशभर में लागू किया गया था।

3 साल में 490 केस पॉक्सो में दर्ज, 90% केस में पीड़िताें के रिश्तेदार या जानकार हैं शामिल
भास्कर ने पॉक्सो एक्ट के मामलों की पड़ताल की तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। जांच में सामने आया कि साेशल मीडिया और शिक्षा की कमी से अपराधों में बढ़ोतरी हुई। ज्यादती करने वालों में रिश्तेदार और समाज वालों की संख्या 90 प्रतिशत निकली।

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार जिले में बीते 3 साल में 490 केस पॉक्सो में दर्ज हुए। साल 2019 में 34%, 2020 में 34% और 2021 में 33% मामले पॉक्साे के हैं। सबसे ज्यादा 70% मामले मार्च, अप्रैल और जून में होना सामने आया। अधिकारी बताते हैं कि फसल कटाई, परीक्षा और शादी समारोह इन 3 महीनों में होने के कारण अपराधों का ग्राफ ज्यादा है।

13 से 18 साल तक के बच्चों से ज्यादा ज्यादती - बीते 3 सालों में अपराध की बात करें ताे 6 साल तक बच्चों से जुड़ेे 9 केस, 7 से 12 साल तक के बच्चों के 43, 13 से 15 साल तक के बच्चों के 161 और 16 से 18 साल तक आयु वर्ग में 277 पॉक्सो के केस दर्ज हुए। 6 साल तक के बच्चों से ज्यादातर छेड़छाड़ ही हुई। 7 से 12 में छेड़छाड़ व भगाकर ले जाना सामने आया। सबसे ज्यादा दरिंदगी 13 से 18 साल तक आयु में हुई। इसमें छेड़छाड़ के साथ ज्यादती और अपहरण के केस शामिल हैं।

जागरूक करेंगे , बताएंगे कानून
बच्चाें-किशाेराें की सुरक्षा प्राथमिकता है। 13 से 18 साल की उम्र में जागरूकता और कानून की जानकारी की कमी है। ऐसे अपराध करने वाले आदतन अपराधी नहीं होते और बच्चों के जानकार होते हैं। ऐसे में इन अपराधों को रोकने के लिए मिशन सुरक्षित बचपन चलाएंगे। इसके लिए पूरी प्लानिंग कर ली है। इसमें पंचायतों, समाजों, जाति तक का विश्लेषण किया है। मिशन में हर सरकारी विभाग से जिम्मेदारी तय की है। हर मंगलवार को एक गांव में हमारी टीमें जाएंगी। मिशन का आगाज देलूंदा गांव से करेंगे, एनिमेशन वीडियो भी दिखाएंगे। हम पॉक्साे और जेजे एक्ट की जागरूकता के लिए इसकाे पाठ्य पुस्तकाें में जाेड़ने के लिए सरकार काे लिखेंगे।
- जय यादव, एसपी, बूंदी