मिशन सुरक्षित बचपन:बच्चियों से दुष्कर्म और छेड़छाड़ की घटनाएं राेकने के लिए पुलिस शुरू करेगी मिशन सुरक्षित बचपन

बूंदी16 दिन पहले
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  • इस तरह का नवाचार करने वाला प्रदेश का पहला जिला बनेगा बूंदी

दिनेश शर्मा | बूंदी प्रदेश में बढ़ रही मासूम बच्चियों से हैवानियत की घटनाओं की रोकथाम के लिए बूंदी पुलिस ‘मिशन सुरक्षित बचपन’ चलाएगी। पुलिस ने बूंदी जिले के ऐसे गांव चिह्नित किए हैं, जहां ऐसे अपराध ज्यादा हो रहे हैं। पुलिस रिकॉर्ड में सामने आया है कि 90% अपराधों में पीड़िता के रिश्तेदार और जानकार ही शामिल हैं। 88% बालिकाओं के साथ गलत काम हुआ तो 12% बालक भी अपराध का शिकार हुए। 13 साल से 18 वर्ष तक की उम्र की बेटियों के 90% मामले सामने आए। इन अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए अब पुलिस 19 पंचायतों में चौपाल लगाएगी। स्कूलों में पोक्सो और जेजे एक्ट (जुवेनाइल जस्टिस) का पाठ पढ़ाएगी। प्रदेश में बूंदी पुलिस पहली बार इस तरह का नवाचार कर रही है। इसके बाद सरकार इसे दूसरे जिलाें में भी लागू कर सकती है। बूंदी पुलिस द्वारा चलाए ऑपरेशन समानता मिशन भी प्रदेशभर में लागू किया गया था।

यूं समझें अपराध के आंकड़ों का गणित
केशवरायपाटन क्षेत्र में 115, बूंदी तहसील में 108, नैनवां में 78, तालेड़ा में 66, हिंडौली में 35, इंद्रगढ़ में 34, लाखेरी इलाके में 31 केस पोक्सो के दर्ज हुए। कुल 390 केसों में से 19 गांव-शहर ऐसे हैं, जहां पोक्सो के 164 केस आए। इनमें डाबी, बुधपुरा, कापरेन, खटकड़, झाली जी का बराना, चितावा, देलूंदा, तीरथ, देई, पीपल्या, तालेड़ा, खीण्या, इंद्रगढ़, लाडपुर में हर साल दो से तीन केस होते हैं। 13 से 18 साल तक ज्यादा ज्यादती : 3 सालों में 6 साल तक के 9 केस. 7 से 12 साल तक 43 केस, 13 से 15 साल तक के 161 और 16 से 18 साल तक आयु वर्ग में 277 पोक्सो के केस दर्ज हुए। ज्यादा दरिंदगी 13 से 18 साल की आयु में हुई।

3 साल में 490 केस पोक्सो में दर्ज हुए, 90% अपराधों में रिश्तेदार या जानकार
भास्कर ने पोक्सो एक्ट के मामलों की पड़ताल की तो सामने आया कि साेशल मीडिया और शिक्षा की कमी से अपराधों में बढ़ोतरी हुई। ज्यादती करने वालों में रिश्तेदार और समाज वालों की संख्या 90 प्रतिशत निकली। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 3 साल में 490 केस दर्ज हुए। साल 2019 में 34%, 2020 में 34% और 2021 में 33% मामले पाेक्साे के हैं। सबसे ज्यादा 70% मामले मार्च, अप्रैल और जून में सामने आया। अधिकारी बताते हैं कि फसल कटाई, परीक्षा और शादी समारोह इन 3 महीनों में होने के कारण अपराधों का ग्राफ ज्यादा है। साल 2019 में 34%, 2020 में 34% और 2021 में 33% मामले पाेक्साे के हैं। सबसे ज्यादा 70% मामले मार्च, अप्रैल और जून में होना सामने आया। किसान और मजदूरों के बच्चों के साथ सबसे ज्यादा मामले हुए।

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