अब हनी बी मिशन से जुड़ा चित्तौड़गढ़:मधुमक्खी पालन में 40 प्रतिशत सब्सिडी, एक किसान को मिलेगा 50 बॉक्स और 50 कॉलोनी

चित्तौड़गढ़19 दिन पहले
मधुमक्खी पालन में किसानों का बढ़ रहा है कि क्रेज।

राजस्थान सरकार के बजट घोषणा के हिसाब से अब मधुमक्खी पालन में भी 40 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाएगी। यह योजना भारत सरकार की ओर से पहले से ही थी। लेकिन राजस्थान में यह योजना सिर्फ एक दो जिलों में ही थी। अब चित्तौड़गढ़ को भी इस योजना से जोड़ दिया गया है।

मधुमक्खी पालन अब लोकप्रिय व्यवसाय बन गया है। बड़ी संख्या में किसान इस व्यवसाय से जुड़ रहे हैं। इधर, सरकार भी किसानों को मधुमक्खी पालन के लिए लगातार मोटिवेट कर रही है। अब इसी कड़ी में राजस्थान सरकार मधुमक्खी पालन के इच्छुक किसानों को 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी दे रही है। हालांकि भारत सरकार यह 40 प्रतिशत सब्सिडी पहले से ही दे ही है और राजस्थान सरकार ने इसे 50 प्रतिशत करने की घोषणा की थी। लेकिन अभी तक कोई आदेश नहीं आने के कारण 40 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी।

चित्तौड़गढ़ में कुछ किसानों ने शुरू किया मधुमक्खी पालन।
चित्तौड़गढ़ में कुछ किसानों ने शुरू किया मधुमक्खी पालन।

एक किसान ले सकता है 50 बॉक्स और 50 कॉलोनी

उद्यान विभाग के सहायक निदेशक शंकर सिंह राठौड़ ने बताया कि राजस्थान सरकार की ओर से जिले को 2000 बॉक्स और 2000 कॉलोनी का टारगेट दिया गया है। इसके लिए ज्यादा से ज्यादा किसानों को मोटिवेट किया जा रहा है। इसके लिए इसी हफ्ते से किसानों की ट्रेनिंग शुरू की जाएगी। ट्रेनिंग के बाद जो भी किसान इच्छुक होंगे, उन्हें बॉक्स और कॉलोनी दी जाएगी। एक किसान अधिकतम 50 बॉक्स और 50 कॉलोनी ले सकता है। एक बॉक्स पर दो हजार और एक कॉलोनी पर 2000 की सब्सिडी दी जाएगी। यानी एक किसान दो लाख रुपए खर्च कर यह बॉक्स और कॉलोनी ले सकता है। बदले में उसे 80 हजार रुपए वापस सरकार दे देगी। किसान के लिए यह ONE TIME INVESTMENT होगा।

गर्मियों में ले जाते है ठंडे प्रदेशों में

गर्मियों के दिन मधुमक्खियों को बचाने के लिए किसानों को इसे ठंडे प्रदेशों में लेकर जाना पड़ता है। चित्तौड़गढ़ में अभी लगभग 5 से 6 किसान ही मधुमक्खी पालन से जुड़े हुए हैं और गर्मियों के दिन वह हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड या कश्मीर की ओर चले जाते हैं। वहां शिफ्टिंग के समय किसानों को थोड़ा खर्चा होता है। बाकी पूरे साल उनकी आए अच्छी रहती है।

एक किसान को मिलेगा 50 बॉक्स और 50 कॉलोनी।
एक किसान को मिलेगा 50 बॉक्स और 50 कॉलोनी।

सरसों की खेती के समय होता सीजन टाइम

ठंड के समय चित्तौड़गढ़ लौटने के बाद किसान यह बॉक्स और कॉलोनी फूलों वाली जगह पर रख देते हैं और यह बॉक्स खोल देते हैं। मधुमक्खी रोज सुबह अपनी कॉलोनी से निकलकर तीन किलोमीटर के रेडियंस में रहकर फूलों से रस लेते हैं और वापस अपने बॉक्स में आ जाते हैं। सरसों के खेती के समय सबसे ज्यादा हनी मिलता है। उस समय सीजन टाइम होने के कारण 7-10 दिन में ही एक बॉक्स हनी से भर जाता है। एक बॉक्स से लगभग एवरेज साल भर का 35 से 40 किलो हनी मिल जाता है। हनी बनने के बाद किसान इसे ढाई सौ रुपए प्रति किलो मार्केट में या किसी कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट करके उसे बेच देता है। सरसों की खेती के समय लगभग पांच से छह बार हार्वेस्ट हो जाता है।

बाजारों में इसकी डिमांड

सहायक निदेशक राठौड़ ने बताया कि शहद की बहुत ज्यादा उपयोगिता होती है और यह सबसे ज्यादा डिमांड में भी रहती है। शहद का उपयोग दवाइयों से लेकर खाने-पीने में इस्तेमाल किया जाता है। शहद को आयुर्वेदिक उपचार में भी सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। यह मीठी होती है, लेकिन शुगर की बीमारी में भी कारगर है। जो भी किसान इच्छुक है, उसे ऑनलाइन पहले फॉर्म भरना पड़ेगा। उसके बाद कार्यालय में सत्यापन होगा। सत्यापन ठीक पाए जाने के बाद ही किसान को बॉक्स और कॉलोनी दी जाएगी।

आय बढ़ाने के लिए किसान जुड़ रहे हैं नए व्यवसाय से।
आय बढ़ाने के लिए किसान जुड़ रहे हैं नए व्यवसाय से।