वन्यजीव गणना सोमवार से:बुद्धपूर्णिमा की सफेद रोशनी में होगी जानवरों की काउंटिंग, वनकर्मियों के साथ वन्यजीव प्रेमी भी करेंगे गिनती

चित्तौड़गढ़9 दिन पहले
सीता माता में उड़न गिलहरी की संख्या में बढ़ोतरी होने की पूरी उम्मीद है।

दो साल बाद वन्यजीवों की गणना बुद्धपूर्णिमा की सफेद रोशनी में होने जा रही है। वन विभाग ने इसकी तैयारियां भी कर ली है। यह गणना 16 मई सुबह 8 बजे से शुरू होकर 17 मई सुबह 8 बजे तक होगी। वन्यकर्मियों के साथ वन्यजीव प्रेमी भी लगातार 24 घण्टों तक मचान पर बैठकर वन्यजीवों की गिनती करेंगे। सीतामाता सेंचुरी और बस्सी सेंचुरी के अलावा आसपास के वन क्षेत्र में वॉटरहॉल पद्धति से यह गणना की जाएगी। वन विभाग को पूरी उम्मीद है कि उनके कुनबे में वन्यजीवों की संख्या बढ़ी है। 2 साल बाद गणना को लेकर सभी उत्साहित है।

बस्सी में मगरमच्छ का कुनबा भी बढ़ता जा रहा है।
बस्सी में मगरमच्छ का कुनबा भी बढ़ता जा रहा है।

कुल 162 वाटर हॉल पर होगी गणना

डीएफओ डॉ टी मोहनराज ने बताया कि पर्यावरण को संतुलित बनाए रखने के लिए वन्यजीवों की बहुत जरूरत होती है। चित्तौड़गढ़ डिवीजन में आने वाले सीतामाता और बस्सी सेंचुरी के अलावा आसपास के वन क्षेत्रों में भी वॉटरहॉल पद्धति से गणना की जाएगी। इसके लिए कुल 162 वॉटरहॉल पर गणना होगी। उन सभी जगह पर कैमरा ट्रैप लगाया गया है। सेंचुरी में कुछ जगह ओदी है और उसके अलावा कुछ जगहों पर मचान भी बनाए गए हैं। उन्होंने बताया कि 30 मई तक बढ़ने चीफ गणना के आंकड़े इकट्ठे कर वन मुख्यालय अरण्य भवन भेजे जाएंगे। इस काम में वन कर्मचारियों के साथ-साथ वन्य जीव प्रेमी भी वॉलिंटियर्स के रूप में काम करेंगे। वन्यजीवों के एक-एक मूवमेंट पर नजर रखी जाएगी। बस्सी सेंचुरी रेंजर अब्दुल सलीम, धरियावद रेंजर मनोज औदीच्य, बड़ीसादड़ी रेंजर पुष्पेंद्र सिंह और जाखम रेंजर दिनेश कुमार मीणा ने सभी तैयारियां पूरी कर ली है।

कई देसी और प्रवासी पक्षियों को भी किया शामिल।
कई देसी और प्रवासी पक्षियों को भी किया शामिल।

वाटर होल पद्धति के आधार पर होगी गणना

वन्यजीव गणना वाटर होल पद्धति के आधार पर की जाती है क्योंकि वन्यजीव गणना में मुख्य आधार सभी जल स्रोत होते हैं। वन क्षेत्रों में वन विभाग की ओर से वाटर पॉइंट बनाए जाते हैं, जहां पर वन्यजीव पानी पीने के लिए आते हैं। चांदनी रात में आने वाले वन्यजीवों की गिनती की जाती है। वन्यजीव की तादाद का एक अंदाजा लग जाता है। वन विभाग के सीता माता सेंचुरी के धरियावद में 34, जाखम में 16, और बड़ीसादड़ी में 16 वाटर हॉल है। इसके अलावा बस्सी सेंचुरी में 29 वाटर होल है। डीएफओ मोहनराज ने बताया कि सीतामाता सेंचुरी में 28 कैमरे लगाए जाएंगे, जबकि बस्सी में 20 कैमरे लगाए जाएंगे। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों में 67 वाटर होल है।

बस्सी में हिरण।
बस्सी में हिरण।

इन वन्यजीवों की होगी गिनती

डीएफओ सुगनाराम जाट ने बताया कि गणना में कल कई प्रजातियों के वन्य जीव शामिल है। शाकाहारी और मांसाहारी के अलावा अलग-अलग प्रजातियों के पक्षियों की भी काउंटिंग की जाएगी। वन्यजीव गणना में मुख्य रूप से पैंथर, हायना, डियर, जंगली सुअर, चौसिंगा, नीलगाय, सियार, लोमड़ी, सांभर, उड़न गिलहरी, मगरमच्छ जैसे सैकड़ों वन्यजीवों की गिनती की।जाएगी। वन अधिकारियों के अनुसार वन्यजीव की प्रजाति और लिंग का सही निर्धारण हो सके, इसके लिए मोबाइल या कैमरे से फ़ोटो खींच कर विशेषज्ञ से पहचान करवाना सुनिश्चित करना होगा।

पैंथर की संख्या में भी हुई बढ़ोतरी।
पैंथर की संख्या में भी हुई बढ़ोतरी।
वन्य जीव गणना के लिए बनाए गए मचान।
वन्य जीव गणना के लिए बनाए गए मचान।