लोगों की पसंद हैं गिलोय और तुलसी:कम इंटरेस्ट देख घटाया औषधीय पौधों का लक्ष्य, 25% पौधे तैयार करने का टारगेट

चित्तौड़गढ़2 महीने पहले
नर्सरी में तैयार किए जा रहे औषधीय पौधे। - Dainik Bhaskar
नर्सरी में तैयार किए जा रहे औषधीय पौधे।

लोगों की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए राज्य सरकार की महत्वकांक्षी 'घर-घर औषधीय पौधे वितरण योजना' पिछले साल शुरू गई थी, लेकिन लोगों का इसमें ज्यादा उत्साह नहीं मिलने पर इस साल इसका लक्ष्य भी कम करके 25 प्रतिशत कर दिया। वन विभाग की ओर से इस बार सिर्फ तीन लाख 60 हजार औषधीय पौधे तैयार किए जा रहे हैं।

DFO सुगनाराम जाट ने बताया कि घर-घर औषधीय पौधे योजना के तहत पिछले साल 14 लाख 41 हजार पौधे तैयार किए गए थे। वन विभाग ने एक लाख 63 हजार परिवारों को वितरित भी किए थे, लेकिन इस बार सरकार की ओर से यह लक्ष्य घटाकर सिर्फ 25 प्रतिशत कर दिया है। अब वन विभाग सिर्फ 3 लाख 60 हजार पौधे तैयार कर रहा है। डीएफओ सुगनाराम जाट ने बताया कि वन विभाग की ओर से स्थाई 15 नर्सरी और अस्थाई 8 नर्सरियों में औषधीय पौधे तैयार किए जा रहे हैं। जिनका जुलाई-अगस्त तक वितरण शुरू कर दिया जाएगा। इस बार सरकार की ओर से बजट में भी सिर्फ 20 लाख रुपए ही मिले हैं।

तैयार किए जा रहे पौधे।
तैयार किए जा रहे पौधे।

15 स्थाई तो आठ अस्थाई नर्सरियों में तैयार हो रहे पौधे

DFO जाट ने बताया कि कनेरा, गंगरार, मनोहर खेड़ी (विजयपुर), उदपुरा, कन्नौज, अरनोदा, बाड़ी, कंवरपुरा (जावदा) में अस्थाई नर्सरी बनाई गई। दोनों स्थाई और अस्थाई को मिलाकर कुल 23 नर्सरियों में यह पौधे तैयार किए जा रहे हैं। इस बार सरकार ने पिछली बार लोगों के इंटरेस्ट को देखते हुए योजना में कई चीजें मॉडिफाई ही की हैं जैसे कि पहले तुलसी, अश्वगंधा, कालमेध और गिलोय के दो-दो पौधे हर परिवार को दिए जा रहे थे। एक परिवार को 8 पौधे मिल रहे थे। इस बार भी एक परिवार को 8 पौधे ही मिलेंगे लेकिन परिवार को जिस पौधे में ज्यादा इंटरेस्ट है, वह पौधे ले सकता है। यानी अगर कोई परिवार तुलसी के चार और गिलोय के चार पौधे मांगता है तो उसे इसी रेशो में पौधे मिल जाएंगे। इस बार पौधे घर-घर वितरित नहीं किए जाएंगे। वन विभाग की नर्सरियों में ही अवेलेबल रहेंगे।

कम इंटरेस्ट ने घटाया औषधीय पौधों का लक्ष्य

पिछली बार कम बारिश के कारण और कोविड-19 प्रकोप भी कम होने के कारण लोगों ने इंटरेस्ट भी कम लिया। या यूं कह ले कि लोगों ने गिलोय और तुलसी को तो खुले दिल से अपनाया लेकिन अश्वगंधा और कालमेध पर उनकी शंका बनी रही। जिसके चलते कई पौधे नष्ट हो गए। प्रशासन की ओर से वन विभाग, जनप्रतिनिधियों, पंचायती राज संस्थाओं, विभिन्न राजकीय विभागों, संस्थानों, विद्यालयों और औद्योगिक घरानों के मदद से पौधे हर घर तक पहुंचाने की कोशिश की गई। यहां तक की ग्राम पंचायत को भी जोड़ कर लोगों को इस बारे में समझाया भी गया। बावजूद इसके लोगों ने कोई उत्साह नहीं जताया। इसलिए सरकार ने इनका लक्ष्य भी कम कर दिया।