अध्यात्म में आगे हम:देश में तेरापंथ धर्मसंघ के हैं 726 शांतिदूत, राजस्थान के सर्वाधिक 526, इनमें चूरू के आचार्य महाश्रमण सहित 158 मुनि-साध्वी

सरदारशहर13 दिन पहलेलेखक: मनफूल रूहिल
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आचार्य महाश्रमण - Dainik Bhaskar
आचार्य महाश्रमण

तेरापंथ धर्मसंघ के लिए रविवार का दिन खास है, क्योंकि इस दिन तेरापंथ धर्मसंघ के अनुशास्ता आचार्य महाश्रमण का 48वां दीक्षा दिवस पूर्ण हाेगा। तेरापंथ धर्मसंघ में सर्वाधिक मुनि व साध्वियां देने में राजस्थान अग्रणी रहा है और उसमें भी चूरू जिला सबसे आगे है।

देशभर में तेरापंथ धर्म संघ के 726 मुनि-साध्वी व 58 समणी, इनमें सर्वाधिक राजस्थान के 526, जिनमें चूरू के सबसे ज्यादा 158 मुनि-साध्वी हैं। अनुशासन मुनि महाराज ने बताया कि जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्म में देशभर में वर्तमान में 564 साध्वी, 162 मुनि सहित 726 मुनि-साध्वी हैं तथा 58 समणी हैं। इनमें अकेले राजस्थान से 526 मुनि-साध्वी हैं, जिनमें भी चूरू के सर्वाधिक 158 मुनि-साध्वी हैं। वहीं देश के अन्य 18 राज्यों से 236 मुनि-साध्वी हैं। राजस्थान के बीकानेर संभाग से 290, उदयपुर से 45, जोधपुर से 178, जयपुर से 12, अजमेर से 1 सहित प्रदेश में 422 साध्वी व 104 मुनि हैं।

तेरापंथ के 11 आचार्य में से 10 राजस्थान से, इनमें 3 चूरू से

तेरापंथ धर्मसंघ में अब तक 11 आचार्य हुए हैं, जिनमें दस राजस्थान से हैं। वहीं एक आचार्य उज्जैन से हैं। राजस्थान में भी चूरू जिले से तीन आचार्य तेरापंथ धर्मसंघ के अनुशास्ता बने हैं, जिनमें आचार्य मघराज बीदासर पांचवें आचार्य व आठवें आचार्य कालूराम छापर से थे। वर्तमान में तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें आचार्य महाश्रमण सरदारशहर से हैं।

इन राज्यों से इतना है प्रतिनिधित्व : देशभर में तेरापंथ धर्म संघ के 726 मुनि-साध्वी हैं। इनमें से राजस्थान 526, हरियाणा-25, कर्नाटक से 24, महाराष्ट्र से 35, गुजरात से 35, मध्यप्रदेश से 8, पंजाब से 3, बिहार से, 1 मणिपुर से 28, उड़ीसा से 18, असम से 6, दिल्ली से 9, झारखंड से 1, पश्चिम बंगाल से 3, छत्तीसगढ़ से 2, तेलंगाना से 1, उत्तर प्रदेश से एक मुनि व साध्वी हैं। वहीं देशभर में 58 समणी हैं।

कई ऐतिहासिक पलों का साक्षी रहा है सरदारशहर : तेरापंथ के दसवें आचार्य महाप्रज्ञ एवं आचार्य महाश्रमण की दीक्षा भूमि भी सरदारशहर ही है। अणुव्रत प्रवर्तक आचार्य तुलसी ने वर्ष 1949 में यही से अणुव्रत आंदोलन शुरू किया। उस समय राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू सरदारशहर आए थे। इन दिनों आचार्य महाश्रमण अपनी जन्म स्थली सरदाशहर में प्रवास पर हैं।

तेरापंथ धर्मसंघ का महत्वपूर्ण स्थान है सरदारशहर, यहां पर अब तक आचार्यों के 14 चातुर्मास हो चुके

सरदारशहर का जैन तेरापंथ धर्मसंघ में विशेष स्थान हैं। वर्तमान में आचार्य महाश्रमण की जन्मस्थली भी सरदारशहर ही है। तेरापंथ धर्मसंघ के 262 वर्षों के इतिहास में सरदारशहर से अब तक तेरापंथ में 52 मुनि एवं 203 साध्वियां दीक्षा ग्रहण कर चुकी हैं। यहां तेरापंथ के आचार्यों के 14 चातुर्मास हो चुके हैं। तेरापंथ के पंचम आचार्य मघवा एवं दसवें आचार्य महाप्रज्ञ का सरदारशहर में ही महाप्रयाण हुआ था। यहां दाेनों के समाधि स्थल हैं, जाेकि तेरापंथ धर्मसंघ में तीर्थ के रूप में विख्यात हैं। तेरापंथ के प्रथम मंत्रीमुनि मगनलाल, मुनि सुखलाल, मुनि बुधमल, साधक मुनि ताराचंद, मुनि किशनलाल सहित अन्य संत व साध्वियाें ने अंतिम समय में साधना तपस्या कर निर्वाण प्राप्त किया है।

आचार्य महाश्रमण का दीक्षा दिवस रविवार काे देशभर में युवा दिवस के रूप में मनाया जाएगा। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद द्वारा देश की 350 से अधिक शाखाओं में तपोयज्ञ कर 1008 से अधिक उपवास कराए जाएंगे।