जान जोखिम में:जीप में क्षमता 15 की बैठा रहे हैं 40 सवािरयां

दौसा2 दिन पहले
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  • दस रूटों पर रोड़वेज बसों के नहीं चलने से निजी वाहनों के वारे-नारे

ग्रामीण मार्गों पर रोड़वेज बसों का संचालन नहीं होने से क्षेत्र के लोग निजी व डग्गेमार वाहनों में जोखिमभरी यात्रा करने को मजबूर हैं। ग्रामीण परिवहन सेवा के अभाव में लोग सुरक्षित सफर से भी महरूम हैं, वहीं निजी वाहन चालकों ने भी कम किराया लेने का लालच देकर सवारियों को ठूंस-ठूंस कर भरने के साथ ही गाडियों की छतों पर भी बैठाकर जान से भी खिलवाड कर रहे हैं। मसलन, क्षेत्र के प्रमुख दस रूटों पर 5-8 सवारियों की क्षमता वाले वाहनों में 30 से 40 लोग सफर कर रहे हैं। रूरल रूटों पर सरपट दौड़ते इन वाहनों को लेकर पुलिस व परिवहन विभाग के अधिकारी भी आंखें मूंदने के साथ ही लापरवाही की अनदेखी का ओवरडोज लिए हुए हैं।

दरअसल, क्षेत्र के गांवों के लोगों का तर्क यह भी है कि रोडवेज बसें नहीं चलने के कारण वे निजी वाहनों में बैठकर यात्रा करने को मजबूर हैं। कुछ रूटों पर तो रोडवेज बसों का ठहराव नहीं है या फिर संचालन ही नहीं होता, ऐसे में निजी वाहन चालकों की पौबारह हो रही है। कम किराया लेने की बात कहकर ये डग्गेमार वाहन मौत के हमसफ़र भी बन रहे हैं। उकाली की घाटी में ओवरलोड बस के पलटने से हुए हादसे भी प्रशासन ने सबक नहीं लिया।

जिला मुख्यालय हो रहा विभिन्न रूटों पर 400-500 बसें,जीपों का संचालन
जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण क्षेत्र में प्रतिदिन औसतन 400 से 500 बस, जीपों का संचालन यहां पुलिस थानों व चौकियों के सामने से होकर ओवरलोड हालत में जारी है। अफसोस, पुलिस चौकी व थानों पर कार्यरत अधिकारी इन्हें रोकना तो दूर, टोकते तक नहीं है। यातायात कर्मी छोटे वाहन या बाहरी वाहनों को रोककर महज कागजी खानापूर्ति करते हैं। इसके चलते निजी वाहन चालकों के हौंसले बुलंद हैं।

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