स्वामी याेगानंद तीर्थ का देवलाेक गमन:नीलकंठ महादेव मंदिर काे नया रूप देने वाले स्वामी याेगानंद तीर्थ का देवलाेक गमन

दौसा10 दिन पहले
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देवगिरी पर्वत पर स्थित नीलकंठ महादेव के मंदिर का जीर्णाेद्धार कर नया रूप देने वाले स्वामी याेगानंद तीर्थ का देवलाेक गन हाे गया। स्वामी याेगानंद तीर्थ पहली बार दाैसा में वर्ष 1962 में आए थे। स्वामी याेगानंद तीर्थ ने करीब 28 वर्ष तक दाैसा में रहकर तपस्या की थी। मंदिर का जीर्णाेद्धार निर्माण पूरा हाेने पर स्वामी याेगानंद तीर्थ वर्ष 1989 में दाैसा काे छाेड़कर महाराष्ट्र के काम रे गांव में तपस्या करने चले गए। उनका सपना भी यही था कि जिन दिन नीलकंठ महादेव मंदिर का जीर्णाेद्धार का काम पूरा हाे जाएगा, वे महाराष्ट्र के काम रे गांव लाैट जाएंगे। स्वामी याेगानंद तीर्थ का 91 वें साल में शुक्रवार रात 10 बजे निधन हाे गया। इसकी सूचना जैसे ही उनके गांव से दाैसा पहुंची ताे लाेगाें में शाेक की लहर दाैड़ गई। शनिवार काे बैजनाथ महादेव मंदिर परिसर में सुबह 7 से 10 बजे श्रद्धांजलि सभा आयाेजित की गई, जहां लाेगाें ने स्वामी याेगानंद तीर्थ काे पुष्पांजलि अर्पित की।

स्वामी याेगानंद तीर्थ भले ही दाैसा से वर्ष 1989 में चले गए, लेकिन उन से दाैसा के सैकड़ाें लाेगाें से निरंतर जुड़ा और संवाद बना रहा। इस कड़ी में से एक विनय जाेशी ने बताया कि स्वामी याेगानंद तीर्थ वर्ष 1962 में जब दाैसा आए थे तब नीलकंठ मंदिर जाने के लिए 200 सीढियां थीं। शेष मार्ग पहाड़ी पर हाेकर पैदल चढ़ना पड़ता था। वर्ष 1966-67 में 200 सीढियाें के उऊपर 165 सीढियाें का निर्माण स्वामी याेगानंद तीर्थ के सानिध्य में हुअा। वर्ष 1967 से नीलकंठ महादेव पर सावन मास में तीन दिवसीय वार्षिक उत्सव का शुभारंभ किया गया। तब से लेकर अब तक लगातार नीलकंठ महादेव के श्रावण मास में तीन दिवसीय वार्षिक उत्सव लगातार जारी है। वर्ष 1984-85 में स्वामी याेगानंद तीर्थ ने सानिध्य में नीलकंठ महादेव के मंदिर का जीर्णाेद्धार किया गया। पुराने मंदिर काे हटा दिया, लेकिन मूर्तियाें काे यथावत रखा गया। नए मंदिर का नागर शैली में निर्माण कराया गया, जाे आज भी स्थापित है। वर्ष 1967 में ही नीलकंठ धर्म सेवा समिति की स्थापना की गई थी

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