जयपुर के आराध्य का एक मंदिर दौसा में भी:बृज से आकर मोदी का तिबारा रुके थे गोविंद, 18वीं सदी का है मंदिर

दौसा3 महीने पहले
दौसा के राधा गोविंददेवजी मंदिर में स्थित भगवान का विग्रह।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान के दर्शन के लिए मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी है। दौसा के कई मंदिरों की ऐतिहासिक व पौराणिक मान्यताएं हैं। यहां के मंदिर आस्था के प्रमुख केन्द्र हैं। ऐसा ही मंदिर है जयपुर-आगरा रोड पर मोदी का तिबारा पर गोविंददेवजी मंदिर। यहां जयपुर के आराध्य गोविंददेवजी मंदिर की तर्ज पर भगवान का विग्रह विराजमान है।

माना जाता है कि बृजभूमि से भगवान गोविंददेवजी जयपुर जाते समय दौसा में मोदी के तिबारा पर रात्रि विश्राम के लिए रुके थे। इस मान्यता को लेकर श्रद्धालुओं ने 18वीं शताब्दी में दौसा में गोविंददेवजी मंदिर बनवाया था। यहां मंदिर में विराजमान अष्टधातु की राधा-गोविंद की मूर्तियां हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती हैं।

मोदी का तिबारा स्थित गोविंददेवजी मंदिर।
मोदी का तिबारा स्थित गोविंददेवजी मंदिर।

जयपुर के गोविंददेवजी जैसा विग्रह
श्रद्धालुओं की मानें तो अदृश्य शक्ति आपदा से पहले ही आगाह कर देती थी। ऐसे में इस चमत्कारी मंदिर की पौराणिक मान्यता के चलते यह आस्था का प्रमुख केन्द्र है। इस मंदिर में जयपुर के गोविंददेवजी मंदिर का हूबहू विग्रह विराजमान है। ऐसे में यहां आने वाले श्रद्धालु ठाकुरजी के दर्शन कर भाव-विभोर होकर भक्ति में खो जाते हैं।

मंदिर से जुड़े पंडित राधागोविंद शर्मा ने बताया कि जयपुर में प्रतिष्ठित गोविंददेवजी मंदिर की प्रतिमा को जब बृज से जयपुर लाने के दौरान मोदी के तिबारे पर रात्रि विश्राम कराया गया था। मंदिर में वर्ष भर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, शरद पूर्णिमा व अन्नकूट धूमधाम से मनाया जाता है।

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