अब गोवंश का लंपी से बचाव करेगा काढ़ा:संत व कलेक्टर ने शुरूआत की, आयुर्वेदिक काढ़े से इलाज का दावा

दौसा16 दिन पहले
दौसा में कलेक्टर ने लंपी से बचाव के लिए काढ़ा वितरण शुरू किया।

दौसा जिले में लंपी रोग से संक्रमित गोवंश के इलाज के लिए गोपाल गोशाला बालाजी मंदिर थली जयपुर के संत बलराजदास त्यागी ने काढे़ की व्यवस्था की है। रविवार को संत व कलेक्टर कमर चौधरी ने सैथल रोड़ स्थित मोड़ा बालाजी मंदिर परिसर में काढे का वितरण शुरु किया।

उन्होंने बताया कि गोवंश में लम्पी बीमारी का पता चलते ही मंदिर से काढ़ा लेकर गाय को पिला कर इलाज कर सकते हैं। एक गाय को एक बार में 500 मिलीलीटर काढ़े से ज्यादा ना दें तथा अधिकतम काढ़ा 2 लीटर पिला सकते हैं। गर्भवती गायों को सामान्य डोज से चौथाई डोज ही काम में ले। सभी गौ सेवक काढा, चूर्ण व इससे संबंधित लड्डू गायों के लिए निशुल्क प्राप्त कर गायों को बीमारी से बचाने में अपना योगदान कर सकते हैं।

इस दौरान कलेक्टर कमर चौधरी ने सभी गौ रक्षकों व पशुपालन पालकों से कहा कि लम्पी नामक बीमारी से पीड़ित गायों को बचाने के लिए आयुर्वेदिक दवा का ज्यादा से ज्यादा उपयोग कर गौवंश को बचाने में प्रशासन का सहयोग करें। इस अवसर पर कार्यवाहक एडीएम अतिरिक्त शिवचरण मीणा, नगर परिषद आयुक्त विश्वामित्र मीणा सहित अन्य अधिकारी जनप्रतिनिधि एवं गो रक्षको सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

बताए काढ़े के फायदे

यह काढा कई प्रकार के औषधीय पेड़-पौधों की जड़ों, छालों एवं बीजों से बनाया गया है। यह गोवंश के खून में 3 घंटे में प्रवेश कर उनका इम्यूनिटी पावर बढ़ाता है तथा वायु, पित्त व कफ की मात्रा संतुलित कर गाय को जुगाली करने के लिए तैयार कर देता है। जुगाली से निकली वायु व लार से गाय का भोजन पच जाता है तथा गाय अगले 3 घंटे में मूवमेंट करना शुरू कर देती है। इस काढे में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ कीडे बाहर निकालने, घाव भरने व हड्डी जोड़ने के औषधीय गुण भी हैं।

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