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बेड टच- गुड टच:काेई बाहरी व्यक्ति बच्चाें से बात करते समय उनके शरीर के हाथ लगाए, बेवजह टच करें ताे उसकी मंशा काे समझे

दौसा9 दिन पहले
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  • पंचायतीराज विभाग के सचिव नवीन जैन ने प्रशस्वी टीटी काॅलेज में जिले के 1500 शिक्षकाें काे बताया बेड टच- गुड टच , जिससे वे स्कूलाें में बच्चाें काे समझा सकें

पंचायतीराज विभाग के सचिव नवीन जैन शनिवार काे जिलेभर के सरकारी और प्राइवेट स्कूलाें के शिक्षकाें से रूबरू हुए। इसमें शिक्षिकाएं भी शामिल थीं। मकसद था छाेटे बच्चाें काे बेड टच और गुड टच के बारे में कैसे बताया जाए। कलेक्ट्रेट चाैराहे के पास प्रसस्वी टीटी काॅलेज में आयाेजित "सुरक्षित दाैसा, सुरक्षित बचपन' कार्यक्रम में सचिव जैन ने अपने बाैद्धिक ज्ञान के साथ प्राेजेक्टर व बैनराें के माध्यम से शिक्षकाें काे समझाया। कहा कि स्कूलाें में बच्चाें काे उनकी समझ के स्तर के अनुसार बेड टच-गुड टच के बारे में बताया।

उन्हाेंने कहा कि काेई बाहरी व्यक्ति बच्चाें से बात करते समय उनके शरीर के हाथ लगाए, बार-बार बाॅडी काे टच करें ताे उसकी मंशा काे समझना चाहिए। यह बेड टच हाे सकता है। बच्चाें के साथ बेड टच में काेई बाहरी व्यक्ति के साथ परिवार का सदस्य और निकटतम रिश्तेदार भी हाे सकता है। यह भी कहा कि बेड टच में सिर्फ पुरुष ही नहीं, काेई महिला भी हाे सकती है। बच्चे कुछ कहना चाहते हैं ताे अभिभावकाें काे उनकी बात सुननी चाहिए, न कि डाॅट कर उसे चुप करा दिया जाए।

कलेक्टर कमर उल जमान चाैधरी ने भी शिक्षकाें से कहा कि इस महत्वपूर्ण अभिभान से सभी दिल से जुड़े और बच्चाें के बेहतर भविष्य के लिए उन्हें गुड टच-बेड टच के बारे में समझाएं। इस विशेष कार्यक्रम में जिलेभर के 1500 से अधिक शिक्षकाें ने भाग लिया। कार्यक्रम 5 सत्र में चला, जिसमें शुरुआती 4 सत्र में सरकारी स्कूलाें के शिक्षक और आखिर में प्राइवेट स्कूलाें के शिक्षक शामिल हुए। सुबह 10:30 बजे शुरू हुआ कार्यक्रम शाम 6:30 बजे तक चला। पहले सत्र में सचिव नवीन जैन ने माइक लेकर एंकर की भूमिका निभाई। उन्हाेंने शिक्षकाें से कहा कि बच्चाें की दृष्टि से बेड टच, गुड टच की जानकारी देना महत्वपूर्ण है। इसलिए 400-500 बच्चाें काे एक साथ बैठाकर जानकारी देने में घास नहीं काटी जाए, बल्कि एक बार में 100-150 बच्चाें काे साथ बैठाकर आई कांटेक्ट के साथ बातचीत करते हुए उन्हें इस बारे में समझाएं। दूसरी बड़ी बात यह कि प्राइमरी, मीडिल और सेकंडरी स्कूल के बच्चाें का स्तर अलग-अलग हाेता है, इसलिए बच्चाें की समझ और उनके स्टैंडर्ड के अनुसार जानकारी दी जाए। उन्हाेंने कहा कि यह काम इतना आसान नहीं है कि बच्चाें काे एक बार में ही सब कुछ अच्छे से समझ में अा जाएगा। इसके लिए बार-बार प्रयास करने हाेंगे। इस प्रक्रिया काे 3 से 6 माह में दाेहराते रहने की जरूरत है।
हाेठाें, छाती व दाेनाें पैराें के बीच में गे-पीछे से टच करना बेड टच है
सचिव नवीन जैन ने प्राेजेक्टर के माध्यम से समझाया कि हाेठाें, छाती और दाेनाें पैराें के बीच में आगे-पीछे से टच करना बेड टच है। इस बारे में बच्चाें काे बताए। इससे वे इसका विराेध करना सीख सकें। बच्चे आगे बढ़कर विराेध करेंगे ताे फिर सामने वाले की हिम्मत नहीं कि वह दुबारा उस तरह की हरकत कर सके। उन्हाेंने शिक्षकाें से कहा कि स्कूलाें में बच्चाें काे अपना समझे और उन्हें समझाएंगे ताे अच्छे रिजल्ट मिलेंगे। स्कूल से कभी भी किसी बच्चे काे अनजान व्यक्ति के साथ घर नहीं भेजें।
बच्चे कुछ कहना चाहते हैं ताे उन्हें गंदी बात कहकर कभी नहीं डांटे
कई बार बच्चाें के साथ गलत हाेता है ताे वे अभिभावकाें काे उस बारे में बताना चाहते हैं। बच्चा बाेलता है िक अंकल या बस ड्राइवर/कंडक्टर बहुत गंदे हैं, मेरे साथ गलत करते हैं। यह सुनकर अभिभावक गंदी बात कहकर बच्चाें काे डांट देते हैं या चुप करा देते हैं। कई घराें में तथाकथित हितैषी अंकल/आंटी का आना जाना रहता है, जाे उस परिवार के बच्चाें का शाेषण करते हैं।
बच्चाें के साथ गलत हाे ताे उन्हें नाे कहना सिखाएं, हिम्मत दें
बेड टच के बारे में तीन महत्वपूर्ण बात बताई, नाे, गाे और टेल। यानी किसी बच्चे काे काेई बेड टच करें ताे बच्चा जाेर से नाे बाेले। बच्चे जब भी नाे बाेलते है ताे पूरा दम लगाकर बाेलते हैं, जिसकी आवाज दूर तक जाती है। फिर वहां से गाे यानी चिल्लाते हुए किसी सुरक्षित स्थान या व्यक्ति के पास पहुंचे। आखिर में टेल यानी जाे कुछ हुआ, उस बारे में बताएं। बच्चे यह तीन बात समझ गए ताे फिर किसी की ताकत नहीं कि काेई बच्चाें काे बेड टच करना ताे दूर छू भी नहीं पाएगा।
5 मिनट की संदेश मूवी भी दिखाई
कार्यक्रम के दाैरान 5 मिनट की एक मूवी भी दिखाई, जिसका नाम संदेश था। उसमें देखा गया कि काेई परिचित व्यक्ति किस तरह दूसरे के बच्चाें काे खेल-खेल, माेबाइल और लैपटाॅप पर कुछ दिखाने की आड़ में किस तरह बच्चाें से गलत हरकत पर उतारू हाे जाते हैं। इसलिए कभी भी काेई बाहरी व्यक्ति माेबाइल या लैपटाॅप पर बच्चाें के साथ खेले ताे पूरी सतर्कता बरते, क्याेंकि काेई गंदी तस्वीर या वीडियाे भी दिखाया जा सकता है। इस तरह की हरकत बेड टच से भी ज्यादा खतरनाक है, जिसका बच्चाें के दिल-दिमाग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
स्कूलाें में 1098 नंबर लिखने की जरूरत
बच्चाें की सेफ्टी के लिए चाइल्ड नंबर 1098 है, जाे सभी स्कूलाें में पूरे कैंपस में जगह-जगह लिखना चाहिए। इससे कभी एेसा हाे कि गलत हाेने के बाद भी अभिभावक नहीं सुने ताे बच्चे मदद के लिए 1098 पर काॅल कर सकते हैं। बच्चाें की सेफ्टी के लिए 1098 महत्वपूर्ण नंबर है, जाे याद रखना भी आसान है। 10 से 8 तक की उल्टी गिनती के रूप में बच्चाें काे इस नंबर काे याद कराया जा सकता है।
जिले में एक साथ कार्यक्रम याेजित कर बनाए रिकाॅर्ड
सचिव नवीन जैन ने कहा कि जिले में सभी स्कूलाें में एक दिन बेड टच-गुड टच का कार्यक्रम आयाेजित कर रिकाॅर्ड बनाया जा सकता है। दाैसा जिले में करीब 1500 स्कूलाें में 3 लाख बच्चे पढ़ते हैं। सीडीईओं ओमप्रकाश शर्मा ने कहा कि आगामी शनिवार यानी 14 मई काे सभी स्कूलाें में एक साथ इस तरह कार्यक्रम कर रिकाॅर्ड बनाया जाएगा। यह जिले के लिए गौरव की बात होगी।

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