नाबालिग कर रहे बड़े अपराध:मर्डर, लूट, रेप और किडनैप जैसे मामलों में हर महीने पकड़े जा रहे 6 किशोर

धौलपुर4 महीने पहलेलेखक: अमित सिंह
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पिछले 3 साल के दौरान ऐसे 204 किशोर (बाल अपचारी) पकड़े जा चुके हैं। यानि हर माह 5 से 6 बालक अपराधों में लिप्त मिल रहे हैं। इनमें अधिकांश बाल संप्रेषण एवं किशोर गृहों में रखे गए हैं। - Dainik Bhaskar
पिछले 3 साल के दौरान ऐसे 204 किशोर (बाल अपचारी) पकड़े जा चुके हैं। यानि हर माह 5 से 6 बालक अपराधों में लिप्त मिल रहे हैं। इनमें अधिकांश बाल संप्रेषण एवं किशोर गृहों में रखे गए हैं।

जिले में हत्या, लूट, डकैती, अपहरण जैसे संगीन अपराधों के आंकड़े अब डराने लगे हैं। साथ ही आंखें खोलने वाले भी हैं कि आखिर हमारे जिले का बचपन कहां जा रहा है? दो दिन पहले ही मनिया इलाके में 15 साल की किशोरी से हुए गैंगरेप में शामिल एक आरोपी बाल अपचारी यानि किशोर है। इसी तरह पिछले महीने कोर्ट परिसर में हुई फायरिंग करने वाले आरोपियों में भी एक किशोर बताया जा रहा है जो अभी तक पुलिस गिरफ्त से बाहर है। ये सिर्फ बानगी नहीं है।

अगर पुलिस के ही आंकड़ों को मानें तो पिछले 3 साल के दौरान ऐसे 204 किशोर (बाल अपचारी) पकड़े जा चुके हैं। यानि हर माह 5 से 6 बालक अपराधों में लिप्त मिल रहे हैं। इनमें अधिकांश बाल संप्रेषण एवं किशोर गृहों में रखे गए हैं। दरअसल, पिछले दिनों हुई कुछ संगीन वारदातों को लेकर भास्कर संवाददाता ने जब पडताल की तो ये चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पुलिस के कुछ सीनियर अफसर औऱ अनुसंधान अधिकारी भी इस बात से चिंतित हैं कि गरीबी और अशिक्षा के कारण शातिर अपराधी इन किशोरों का गलत कामों में इस्तेमाल कर रहे हैं।

पुलिस भी चिंतित…गरीबी और अशिक्षा के कारण शातिर अपराधी कर रहे इस्तेमाल

ये भी हो सकते हैं नाबालिगों के अपराध में लिप्त होने के कारण
बाल अधिकार एवं संरक्षण समिति की सदस्य गिरीश कुमार बताते हैं कि गरीबी और अशिक्षा के कारण किशोर अपराधों में लिप्त हो रहे हैं। क्योंकि धौलपुर में रोजगार के उचित साधन नहीं हैं। इसलिए लोग खेती-किसान, चंबल बजरी और मजदूरी पर निर्भर हैं। ऐसे में कम आय वाले परिवार बच्चों को स्कूल भेजने के बजाय गलत कामों में लगा देते हैं।

किशोर चोरी और लूट की घटनाओं से अपराध की दुनिया में रखते हैं कदम
रिटायर्ड पुलिस निरीक्षक सेवा सिंह बताते हैं कि किशोरावस्था में ब्रांडेड कपड़े, जूते, मोबाइल आदि शौक होना सामान्य बात है। शुरुआत अवैध बजरी खनन, चोरी और लूट की वारदातों से होती है। रैकी और शिकार का पीछा करके उनसे वारदात करवाई जाती है। पकड़े जाने पर अक्सर लोग बच्चा समझकर छोड़ देते हैं। पुलिस भी उन पर ज्यादा सख्ती नहीं करती है।

जिम्मेदारों की आंखें खोलते ये आंकड़े
करीब 1 दशक तक पुलिस मुखबिर रहे नांदनपुर के श्याम सिंह कुशवाह बताते हैं कि सरकार, मंत्री और विधायक भले ही विकास के कितने ही लंबे-चौड़े दावे क्यों ना करें। लेकिन, ग्राउंड रियलिटी अलग ही है। इन जिम्मेदारों की आंखें खोलने के लिए पुलिस के आंकड़े ही काफी हैं। बीते 3.6 साल के दौरान में हत्या में 8, दुष्कर्म में 34, चोरी में 41, जानलेवा हमले में 31, अपहरण में 3 और डकैती में 11 किशोर पकड़े जा चुके हैं।

एक्सपर्ट व्यू : सोशल मीडिया की चकाचौंध में भटक रहे हैं बच्चे
आम तौर पर देखा गया है कि सोशल मीडिया की चकाचौंध में बच्चे भटक रहे हैं। ऑनलाइन पढाई के नाम पर अभिभावक उन्हें मोबाइल तो दिला देते हैं। लेकिन, उनकी एक्टिविटी पर नजर नहीं रखते। जबकि अभिभावकों को चाहिए कि वह किशोर बच्चों पर निगरानी रखें कि वे किन लोगों में बैठ रहे हैं। उनके दोस्त कौन हैं। क्या करते हैं। पारिवारिक पृष्ठभूमि कैसी है। यदि किशोर के व्यवहार में अचानक कोई बदलाव आए तो विशेष ध्यान दें। दोस्त जैसा व्यवहार रखते हुए किशोर बच्चों को खुलकर अपनी बात रखने का माहौल दें। - नारायण टोगस, पुलिस अधीक्षक, धौलपुर

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