कहां खेलें बच्चे:.शहर के सबसे बड़े चंबल के पार्क का फर्श क्षतिग्रस्त, बैंचे और लाइटें टूटी

धौलपुर2 दिन पहले
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11 मई से स्कूलों में गर्मी की छुट्टी शुरू हो गई है, बच्चों की पार्कों में धमाचौकड़ी बढऩे वाली है। पिछले दो साल से कोरोना की मार झेल रहे बच्चे इस बार खेलकूद के लिए बाहर निकलने को तैयार हंै, लेकिन हमारे पार्क इसके लिए तैयार नहीं है। कहने को तो शहर में दो बड़े पार्क हैं, पर बच्चों के खेलने लायक सिर्फ एक गांधी पार्क (एकीकृत पार्क) ही है। एक मात्र पार्क होने के कारण बच्चों को यहां भी मुकम्मल सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

जबकि जिले का सबसे बड़ा पार्क चंबल गार्डन कई वर्षों से बदहाली का शिकार बना हुआ है। गार्डन की शुरूआती सुविधाएं पूरी तरह जर्जर हो गई हैं। यहां बच्चों का खेलना तो दूर चलना भी मुश्किल है। ऐसे में जब बच्चे पार्क व मैदान में उछल-कूद नहीं कर सकेंगे तो उनका मानसिक व शारीरिक विकास प्रभावित होगा।

शहर के पार्कों को स्मार्ट सिटी की तर्ज पर तैयार करने की योजनाएं तो बनाई गई, लेकिन जिले के सबसे बड़े पार्क चंबल को छोड़कर एकीकृत पार्क व शहर के अन्य छोटे पार्कों में बच्चों के खेलने-कूदने के अलावा बड़ों के एक्सरसाइज के लिए ओपन जिम के सामान लगाए गए थे। लेकिन मेंटेनेंस के अभाव में यह व्यवस्था ध्वस्त होती चली जा रही है। इतना ही नहीं एकीकृत पार्क शहर के मध्य में स्थित होने के कारण यहां पर बड़ी संख्या में शहर के लोग सुबह-शाम पहुंचते है।

ऐसे में यहां बच्चों को खेलने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता है। इतना ही नहीं ओपन जिम की मशीनों का उपयोग यहां आने वाले हर किसी की ओर से किया जाता है, जिसके चलते बच्चें इन मशीनों की सुविधाओं का लाभ लेने से भी वंचित रह जाते है। गर्मी सुबह जल्दी शुरू हो जाने और धूप देर शाम तक बनी रहने के कारण यहां आने वाले बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

कभी आकर्षण का केंद्र था पार्क
शहर का सबसे बड़ा चंबल पार्क अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। एक दशक पूर्व कभी शहर का आकर्षण बना चंबल पार्क आज खुर्द-बुर्द तक हो चुका है। थर्मल पाॅवर प्लांट की ओर से करीब एक दशक पूर्व बाड़ी रोड पर तैयार इस पार्क को स्थानीय निकाय को हैंडओवर किया गया। काफी खूबसूरत और बड़े इस पार्क को जल्द ही शहरवासियों के लिए आकषर्ण का केन्द्र भी हो गया। लेकिन कुछ समय में ही पार्क गुलजार होने के बजाए वीरान हो गया। देखरेख अभाव में फर्शियां इधर-उधर बिखरी पड़ी हैं। पार्क में प्रवेश से लेकर अन्दर तक कमोबेशयही हाल हैं।

उधर बिजली के पोल भी पार्क में उखड़े हुए हैं। लाइटें और बैंच पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। चंबल पार्क दूर-दूर तक उजाड़ ही उजाड़ ही दिखता है। पार्क में लगी घास पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। पेड़ सूख चुके हैं। पार्क वीरान सा दिखता है। पार्किंग में लगे फव्वारे भी खत्म हो चुके हैं। फव्वारों के चारों ओर जमा पानी भी काई में तब्दील हो चुका है। ऐसे में यहां बदबू तक आती है।

1 घंटे बच्चों का खेलना आवश्यक : डॉ. सिंह
बालरोग विशेषज्ञ डॉ. धर्म सिंह मैनावत कहते हैं कि बच्चों के मानसिक व शारीरिक विकास के लिए खेलकूद जरूरी है। प्रतिदिन बच्चों को एक घंटे तक खेलना चाहिए, हर 7 दिन में कम-से-कम डेढ़ से दो घंटे तक बच्चों को पार्किंग या मैदान में खेलना चाहिए।

जल्द ही तैयार होगा चंबल पार्क : सिंह
चंबल गार्डन को विकसित करने के लिए योजना तैयार कर ली गई है। जल्द ही चंबल गार्डन को विकसित करने का कायज़् शुरू करा दिया जाएंगा। लजपाल सिंह, आयुक्त, नगर परिषद धौलपुर

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