कटाई से जंगल हो रहे थे बर्बाद:ग्रामीणों ने लिया लकड़ी नहीं काटने का संकल्प, 80% जंगल अब आबाद

धौलपुर16 दिन पहलेलेखक: ज्योति लवानिया
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पहली तस्वीर (अब) दूसरी तस्वीर (पहले) - Dainik Bhaskar
पहली तस्वीर (अब) दूसरी तस्वीर (पहले)
  • सरमथुरा के करीब 35 गांव के लोगों ने कुल्हाड़ी बंद पंचायत में लिया जंगल बचाने का संकल्प

सरमथुरा की ग्राम पंचायताें में आठ दस साल पहले जाे जंगल उजाड हाेकर मैदान बनने की कगार पर पहुंच गए थे, वहां आज घना लकदक जंगल है, जाे रणथंभाैर के टाइगर काे भी यहा सुखद आवास का सपना मिलने से खींच लाया है। ऐसे में जंगलाें काे बचाने के लिए वन विभाग प्रयासरत है, ताे वहीं खुद पंचायताें ने कुल्हाड़ी बंद पंचायत में सहयोग किया। सबसे पहले झिरी पंचायत और इसके बाद मदनपुर, गाेलारी और डाेमई पंचायत काे जाेडकर सामूहिक पंचायत की, जिसमें संकल्प लिया कि न जंगल काटेंगे और न काटने देंगे।

तत्कालीन उपवन संरक्षक इंद्रपाल सिंह पूनिया के नेतृत्व में कुल्हाड़ी बंद पंचायत का आयोजन कर ग्रामीणों ने वन विभाग के कर्मचारियों को पूरी तरह आश्वस्त किया है कि जंगल को किसी भी तरह नहीं काटा जाएगा। सभी ग्रामीण जंगल बचाने के लिए सहयोग करेंगे। बता दें कि आठ दस पहले सरमथुरा का जंगल करीब 80 फीसदी जंगल से मैदान बन गया था। पंचायत की कुल्हाड़ी बंद पंचायत संकल्प के बाद एक पेड भी नहीं कटा ताे जंगल आबाद हाे गए।

जंगल में कटान रोकने के लिए बनाए गए 10 वन मित्र
झिरी पंचायत में ही दमाेह, गिराेनिया, खुशालपुर, रिछडा का जंगल, जारला जंगल सहित कराैली की मंडरायल सीमा आती है। झिरी पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि संजू जादाैन कहते हैं कि इसके लिए पंचायत में दस वन मित्राें का गठन किया जाे जंगल में लकडी काटने या अन्य गतिविधियां की सूचना पंचायत काे देते रहे।

अब डांग में वारदात भी कम हुई
झिरी में डांग क्षेत्र हाेते हुए भी आतंक नहीं है। आपराधिक घटनाएं शून्य के बराबर है। में बमुश्किल दाे से चार साल मामले छाेटे माेटे दजर् हाेते हैं। 30 से 35 गांवाें ने कुल्हाड़ी बंद पंचायत का सामूहिक निर्णय लिया था।

जंगल में कुल्हाड़ी से पेड़ कटान पूरी तरह से बंद है
पंचायताें ने खुद ही तय किया है कि जंगल न काटेंगे और न ही कटने देंगे। कुल्हाड़ी चलाने पर पंचायताें ने वन मित्राें काे जिम्मेदारी देकर जुर्माने का प्रावधान भी रखा है। किसी भी लैंड पर कुल्हाड़ी बंद पंचायत का बहुत अच्छा असर है कि जंगल में कुल्हाड़ी बंद है पेड कटान बंद हैं। जाे पहले ऊंट गाडियां लकडी लद लदकर जाती थीं, वाे आठ दस साल से पूरी तरह से बंद है।
-अमर लाल, रेंजर, सरमथुरा वन क्षेत्र

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