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  • In The Case Of Raping And Murdering A 10 year old Girl, The Challan Was Presented In 20 Days, Paxo Court Heard For The First Time In The District

कानून की मजबूत पकड़:10 साल की बच्ची से दुष्कर्म कर हत्या के मामले में 20 दिन में चालान पेश किया, पाेक्साे काेर्ट ने जिले में पहली बार सुनाई

डूंगरपुर2 महीने पहले
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जिले के सदर थाना क्षेत्र के एक गांव में 10 साल की बच्ची के साथ हैवानियत करने व हत्या करने के मामले में पाेक्साे काेर्ट ने आराेपी काे हैंग टिल डेथ यानि फांसी की सजा सुनाई। पाेक्साे काेर्ट ने मामले की गंभीरता काे देखते हुए पहली बार दुष्कर्म व हत्या के मामले में फांसी का फैसला सुनाया है।

डूंगरपुर के न्यायिक इतिहास में दूसरी बार किसी आराेपी काे फांसी का दंड दिया है। घटना ठीक तीन माह पहले की है। राज्य की ओर से विशेष लाेक अभियाेजक याेगेश कुमार जाेशी ने बताया कि पीठासीन अधिकारी संजय कुमार भटनागर ने फैसला सुनाते हुए सदर क्षेत्र के एक गांव निवासी आराेपी जितेंद्र उर्फ जीतू पुत्र नारायण काे लैंगिंक अपराधाें से बालकाें का संरक्षण अधिनियम 2012 के अपराध में दाेषी मानते हुए हैंग टिल डेथ यानि फांसी की सजा सुनाई।

पांच लाख रुपए के जुर्माने से दंडित किया है। विशेष लाेक अभियाेजक याेगेश कुमार जाेशी ने बताया कि पाेक्साे काेर्ट ने इस तरह का फैसला पहली बार सुनाया है। इस प्रकरण में पुलिस ने रिपाेर्ट पेश हाेने के 20 दिन में चालान पेश कर दिया था। काेर्ट ने 29 गवाह व 84 दस्तावेज पर 74 दिन के अंदर फैसला सुनाया।

जज ने लिखा- प्राण निकलते समय मृतका के दिल में यही उद्गार रहे हाेंगे मां मेरा क्या पैदा होना अपराध है, कभी मैं तेरे गर्भ में ही, समाज के डर से मार दी जाती हूं। तो जन्म होने पर कंटीली झाड़ियों में, मरने को फेंक दी जाती हूं, और गर्भ से बाहर भी अा गई तो, थोड़ी विकसित होने पर इन नर पिशाचाें की वासना का शिकार बन जाती हूं

खुलासा करने वाली पुलिस टीम काे नकद पुरस्कार और प्रशंसा पत्र
एसपी राशि डोगरा का कहना है कि इस तरह के अपराध पर अंकुश लगाने के लिए काेर्ट का यह निर्णय समाज के लिए सराहनीय है। काेर्ट का यह फैसला अच्छी मिसाल है। यह केस एक तरह से ब्लाइंड था। कानून व्यवस्था काे संभालना, ब्लाइंड केस में साक्ष्य एकत्रित करना,

एफएसएल के लिए समय पर भेजना, पूछताछ में कड़ी से कड़ी जाेड़ना इन सारी प्रक्रिया में पुलिस टीम ने अच्छा कार्य किया। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस सीआईडी अपराध शाखा जयपुर डाॅ रवि प्रकाश ने आराेपी काे गिरफ्तार करने पर हैड कांस्टेबल जय सिंह, कांस्टेबल प्रकाश, पुलिस निरीक्षक भवानी सिंह , एएसआई साेबरन सिंह, हैड कांस्टेबल गजराज सिंह, महेंद्र कुमार, बाबूलाल, कांस्टेबल गाेविंद सिंह, लाेकेंद्र सिंह, कुलदीप सिंह, प्रवीण कुमार काे पुरस्कार दिया है।

कबूलनामा पत्नी को घर से भगाकर दिनभर शराब पी, पहचान नहीं ले, इसलिए मारा
आरोपी जितेन्द्र उर्फ जितु से मनौवैज्ञानिक तरीक से पूछताछ की थी ताे उसने बताया था कि 28 जून काे आराेपी व उसकी पत्नी के बीच मनमुटाव हुआ था। इसके बाद पत्नी काे घर से भगा दिया था। इसके बाद आराेपी की पत्नी उसके बहन के घर चली गई।

आराेपी ने अलग अलग जगह पर शराब पी। दाेपहर से लेकर रात तक शराब पी। दिन भर शराब पीने के कारण शराब के नशे में होने से रात को नाबालिग बच्ची को उसके घर के आंगन से उठा कर रोड के किनारे बने पुलिये पर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया।

मासूम के जग जाने व आराेपी काे पहचान लेने के कारण उसकी गला दबाकर हत्या कर दी थी। हत्या करने के बाद मासूम का शव पुलिया के अन्दर छिपा दिया था। ताकि किसी काे पता नहीं चले।

शव यात्रा में एक हजार से अधिक लोग शामिल हुए थे, समझाइश पर 50 घंटे बाद हुआ था अंतिम संस्कार
दरअसल, 10 साल की बेटी के साथ दुष्कर्म व हत्या के मामले में 29 जून 2022 काे शव मिलने के 50 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी अंतिम संस्कार नहीं हाे सका था। इस घटना काे लेकर लाेगाें में काफी आक्राेश था।

लाेग डूंगरपुर विधायक के सरकारी आवास तक पहुंच गए। मामले की गंभीरता काे देखते हुए गांव में पुलिस जाब्ता तैनात किया गया था। आराेपी काे गिरफ्तारी करने की मांग पर अड़ गए थे। पुलिस ने पूछताछ के बाद 2 जुलाई काे आराेपी काे गिरफ्तार किया। इसके बाद परिजनाें ने माेर्चरी से शव काे उठाया। शहर के प्रमुख मार्गों से 10 साल की मासूम की शव यात्रा निकाली गई।

इसमें सैकड़़ाें लोग मौजूद रहे। शवयात्रा में शामिल लोगों ने दंरिदे को फांसी देने के नारे लगाते हुए गांव पहुंचे। इस दाैरान भी लाेगाें में काफी आक्राेश देखने काे मिला। इसके बाद गांव में अंतिम संस्कार किया गया। इस मामले में पीड़ित परिवार काे पीड़ित प्रतिकर स्कीम के तहत 5 लाख रुपए की सहायता राशि दी गई थी। आराेपी जितेंद्र पूर्व सरपंच का पाेता है, जिसे 2 जुलाई काे पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

यह था मामला : आंगन में साेई हुई थी, वही से अपहरण
दरअसल, 10 साल की बच्ची 28 जून की रात काे खाना खाकर घर के आंगन में साेई हुई थी। रात 12-1 बजे देखा ताे नाबालिग बेटी खांट पर नहीं मिली। परिजनाें ने आसपास व गांव में तलाश शुरु की, लेकिन नाबालिग का कुछ पता नहीं चल पाया। परिवार के लाेगाें के साथ पड़ाेसियाें ने बच्ची काे ढूंढ़ा। इसके बाद सदर थाना पुलिस काे मामले से अवगत कराया।

पुलिस ने अपहरण की धारा में प्रकरण दर्ज किया। पुलिस से बच्ची काे ढुंढ़ने की गुहार लगाई। परिजनाे ने वापस आकर ग्रामीणाें के साथ बच्ची की तलाश शुरु की ताे शाम काे गांव में पुल के पास बच्ची का शव नग्न अवस्था में मिला। दुष्कर्म कर हत्या की संभावना के मद्देनजर थानाधिकारी भवानी सिंह ने अनुसंधान अपने जिम्मे लिया।

आराेपी काे शंका पर गिरफ़्तार किया। मृतका पीड़िता के पाेस्टमार्टम रिपाेर्ट में याैन हिंसा के प्रमाण, उसकी माैत गला दबाने से हाेना सामने आया। परिजनाें ने बताया कि बच्ची का जन्म साल 2012 में हुआ था। उसने पांचवी तक की पढ़ाई कर ली थी। अब आगे की कक्षा में प्रवेश लेने वाली थी।

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