हरियाली जरूरी:पेड़-पौधे कम तो सागवाड़ा में 639 एमएम बारिश, वहीं 30 किमी दूर गलियाकोट और आसपुर में हरियाली ज्यादा तो 1050 एमएम बारिश

डूंगरपुर17 दिन पहलेलेखक: विश्वजीत गोले
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हरियाली मानसूनी बारिश को आकर्षित करती है। दैनिक भास्कर ने जब जिले के विभिन्न स्थानों पर इस सीजन में दर्ज की गई बारिश के आंकड़ों का विश्लेषण किया तो यह बात सही प्रतीत हुई। जिन क्षेत्रों में पेड़ों की संख्या ज्यादा है वहां बारिश भी ज्यादा हुई है।

जल संसाधन विभाग की ओर से स्थापित वर्षामापी 13 केन्द्रों पर इस सीजन की औसत बारिश 838 एमएम दर्ज की जा चुकी है। सागवाड़ा में सबसे कम 639 एमएम ही पानी बरसा है। जबकि यहां स 30 किमी दूर आसपुर में 1078, निठाउवा में 1036 और गलियाकोट में 1090 एमएम पानी बरसा है। जब विशेषज्ञों से कम सागवाड़ा क्षेत्र में कम बारिश के बारे में जाना तो पता चला जहां हरियाली का प्रतिशत कम है तो वहां बारिश कम है, और जहां ज्यादा है तो वहां बारिश भी ज्यादा है।

सागवाड़ा क्षेत्र की अधिकांश पहाड़ियां बारिश के सीजन में ही हरी-भरी होती है। पत्थर की मात्रा ज्यादा होने से पेड़ पनप नहीं पाते हैं। ऐसे में पहाड़ी पर जहां-जहां मिट्टी है, वहां पेड़ लगे हैं। वहीं गलियाकोट, निठाऊवा, आसपुर की पहाड़ियों पर मिट्टी की मात्रा मिक्स होने से यहां पेड़ों की संख्या अधिक है और पूरे साल हरी दिखती है।

जिले में 18 प्रतिशत वन क्षेत्र वहीं बाकी राजस्व के अधीन
डूंगरपुर में कुल 3770 किमी स्क्वायर क्षेत्रफल में से 18 प्रतिशत वन क्षेत्र है। 693.30405 किमी स्क्वायर क्षेत्रफल वन विभाग का है। बाकी 82 प्रतिशत क्षेत्रफल राजस्व विभाग का है।

राजस्व क्षेत्रों में आबादी क्षेत्र, चारागाह जमीन आदि अन्य प्रकार की जमीनें हैं वहीं वन क्षेत्र में रिजर्व एरिया, प्रोटेक्टेट एरिया व अनक्लासीफाइड जमीनें हैं। यहां पौधरोपण कर हरियाली बढ़ाई जाती है। इसके अलावा डंूगरपुर शहर में भी बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए है जो अब पेड़ बन चुके हैं।

जहां मिट्टी वहां पीपल, बरगद, बबूल रोपकर बनाए संतुलन

सागवाड़ा क्षेत्र में पथरीली पहाड़ियांे पर पौधरोपण कर भी दें तो बारिश थमने के 15 दिन बाद ही ये सूखकर मर जाते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो ऐसे में हमें मिट्टी की अधिकता वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां पीपल, बरगद व बबूल के पेड़ लगाने होंगे।

क्योंकि पेड़ों की ये प्रजातियां समय के साथ घना रूप धारण करती है। इनकी जड़ें भू-गर्भ में मौजूद जल स्त्रोत की ओर तेजी ंसे जाती है। जिससे भीषण गर्मी के दिनों में भी इनके जीवित रहने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। इन पेड़ों को रोपने की प्रक्रिया लगातार कई वर्षों तक करनी होगी।

अच्छी बरसात के 3 कारक, इसमें हरियाली बेहद जरूरी

मानसूनी बादलों को आकर्षित कर अच्छी बारिश कराने में मुख्य तीन कारक काम करते हैं। क्षेत्र की ओरोग्राफी यानी वहां उस क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति। पहाड़ियां कितनी और इनकी ऊंचाई कितनी है। दूसरा मानसून छाने के दौरान हवाओं की दबाव किस तरफ है।

पहाड़ी के जिस पर हवा का निम्न दबाव होगा, उस क्षेत्र में बारिश अच्छी होगी। तीसरा अहम कारक क्षेत्र में पेड़ों की संख्या है। क्योंकि मानसूनी बादलों को आकर्षित करने में अहम रोल पेड़ों का ही होता है। जब मानसूनी बादल आकर्षित होकर किसी क्षेत्र में छा जाते हैं तो इसके बाद बाकी दो कारक अपना काम करते हैं।

कभी-कभी हवा का निम्न दबाव बढ़ जाता है तो मानसूनी बादल उस क्षेत्र में मूव कर जाता है। रेगिस्तानी क्षेत्र जैसलमेर, बाड़मेर में हरियाली काफी कम होने के बाद भी हमें अच्छी बारिश देखने को मिली तो यही उसका मुख्य कारण है। लेकिन सामान्यत देखें तो अच्छी बारिश के लिए हरियाली का अच्छा होना ज्यादा अहम है।

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