राष्ट्रीय लोक अदालत:पति-पत्नी की सुलह करवाकर फिर से घर बसाया, 3 घर फिर से बसे व अनेक मामलों का राजीनामे से निस्तारण हुआ

हनुमानगढ़2 महीने पहले
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एडीआर भवन में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में पारिवारिक न्यायालय के न्यायाधीश परविंद्र सिंह, काउंसलर एडवोकेट रेशमी सिहाग की मध्यस्थता से 3 घर बसे व अनेक मामलों का राजीनामा से निस्तारण हुआ। काउसंलर रेशमी सिहाग ने बताया कि टिब्बी सलेमगढ़ निवासी मांगीलाल का विवाह हिना कौर के साथ 2015 में हुआ था। इनकी दो संतानें हैं।

मनमुटाव के चलते पति-पत्नी 2018-19 से अलग-अलग रह रहे थे। वहीं गोलूवाला निवासी श्योपतराम व संदीप का विवाह 2012 में हुआ था। इनके भी दो संतान हैं। वे 2019 से अलग-अलग रह रहे थे। राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रकरण रेफर होने पर लंबी समझाइश के बाद इन दोनों दंपतियों का राजीनामा करवाकर दोबारा घर बसाया गया। सिहाग ने बताया कि इस बार की लोक अदालत में एक अहम फैसला भी हुआ। उन्होंने कहा कि लोगों में आम धारणा होती है कि जब सहमति से तलाक हो गया है, उसमें राजीनामा नहीं होता, घर नहीं बसते। लेकिन सर्वजीत कौर व दलराज सिंह के मामले में ऐसा नहीं हुआ।

सहमति से तलाक के बाद भी करीब डेढ़ साल बाद समझाइश से दोनों पति-पत्नि एक बार फिर साथ रहने को राजी हुए और खुशी-खुशी घर को रवाना हुए। इसमें अधिवक्ता सुरेंद्र शर्मा व हेमराज वधवा के प्रयास सराहनीय रहे। नेशनल लोक अदालत हनुमानगढ़ में मैग्मा एचडीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा दुर्घटना के एक मामले में 34.50 लाख में राजीनामा किया गया। बीमा कंपनी के अधिवक्ता नितिन छाबड़ा ने बताया कि 13 जून 2019 को नरेंद्र कुमार पुत्र नारायण दत्त की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी।

जिसके बाद मृतक की पत्नी सुमन और माता ने अपील की थी। बीमा कंपनी के अधिकारी दीपक पुरोहित, हिम्मतसिंह ने अप्रूवल दी।जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संदीप कौर ने कहा कि लोक अदालत में राजीनामा करने से पक्षकारों का समय व धन दोनों की बचत होती है।

बता दें, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से प्राधिकरण अध्यक्ष एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव मागो के निर्देशन में न्यायालय परिसर स्थित एडीआर भवन में राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित हुई थी। इसमें वैवाहिक, पारिवारिक विवाद, मोटर वाहन दुर्घटना क्लेम, सभी दीवानी मामले, श्रम एवं औद्योगिक विवाद, पेंशन मामले, वसूली, सभी राजीनामा योग्य मामलों का राजीनामे से निस्तारण किए गए। प्रकरण में समझाइश से राजीनामा होने पर लोग खुशी-खुशी घर लौटे।

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