सुदामा चरित्र कथा:रुक्मिणी विवाह व सुदामा चरित्र कथा का प्रसंग सुनाया

मेहंदीपुर बालाजीएक महीने पहले
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  • राधा कृष्ण व सुदामा की सजाई सजीव झांकी

मेहंदीपुर बालाजी क्षेत्र दौसा जिला के गुढ़ा कटला मैं आयोजित श्रीमद् भागवत कथा प्रसंग के अंतिम दिन कथा के समापन पर भागवताचार्य महेंद्र दास आचार्य के द्वारा श्रोताओं को रुक्मणी विवाह एवं सुदामा चरित्र की कथा का सत्संग सुनाया । राधा श्री कृष्ण के विवाह में महिलाओं के द्वारा कन्यादान में साड़ी वस्त्र आभूषण नगद राशि सहित अनेक सामान दिए तथा कन्यादान के लिए महिलाओं की कतारें लगी रही महिलाओं ने एक-एक करके रुक्मणी का कन्यादान किया। कथावाचक ने श्रोताओं को श्री कृष्ण के अनेकों विवाह के बारे में बताया । इसी प्रकार श्रोताओं को सुदामा चरित्र की कथा का प्रसंग भी सुनाया गया। आज के युग में दोस्ती स्वार्थ पूर्ण बनी हुई है। सुदामा ने अपनी दरिद्रता होने के बाद भी अपने मित्र श्री कृष्ण भगवान से कभी भी धन दौलत कुछ भी नहीं मांगा जो आज भी एक उदाहरण बना हुआ है| कथावाचक ने कथा के माध्यम से कहा कि दोस्ती निस्वार्थ भाव होनी चाहिए।

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