पेयजल सकंट:डेढ़ साल में बाणगंगा नदी पर पेयजल के लिए 20 लाख रुपए खर्च, फिर भी 19 में से 6 नलकूप सूखे, 13 का गिरा जल

दौसाएक महीने पहले
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बांदीकुई | सर्दी में रात 10 बजे बडियाल रोड पर पानी भरते लोग। - Dainik Bhaskar
बांदीकुई | सर्दी में रात 10 बजे बडियाल रोड पर पानी भरते लोग।
  • कारण : यहां ऊपरी सतह का पानी ढाई महीने में ही हो जाता है खत्म, स्थायी योजना आए तो मिले राहत

पेयजल के मुद्दे पर किसी समय क्षेत्र की राजनीति तक तो हिला देने वाली बाणगंगा नदी भी प्यासे शहर बांदीकुई के 6 हजार पेयजल उपभोक्ताओं की प्यास बुझाने में अब नाकाम साबित हो रही है। शहर की पेयजल व्यवस्था सुधार के लिए जलदाय विभाग ने गत डेढ़ साल में इस नदी के गर्भ से पेयजल निकालने के लिए 20 लाख रुपए से अधिक खर्च कर दिया, लेकिन स्थिति यह रही कि कुल 18 नलकूपों में 5 सूख गए। शेष बचे 13 से मिलने वाले पानी की आवक भी घटकर आधी रह गई।इस सबके पीछे प्रमुख कारण है कि इस नदी के ऊपरी सतह पर शुरुआत में जोरदार पानी मिलता है।

लेकिन यह दो से ढाई महीने बाद समाप्त हो जाना शुरू हो जाता है। शहर में गिरते भू जल स्तर व लगातार पेयजल संकट गहराने के लिए जलदाय विभाग ने डेढ़ साल पहले अलवर - सिकंदरा मेगा हाइवे पर स्थित बाणगंगा नदी का दामन पकड़ा। शुरुआत में यहां 10 नलकूप खोदे गए। इनसे तीन महीने तक अच्छा पानी मिला लेकिन इनमें से चार सूख गए। इसके बाद विभाग ने इस वर्ष फरवरी व मार्च में बाणगंगा में 8 नलकूप और खुदवाए लेकिन इनमें से भी एक सूख गया। शेष बचे सात नलकूपों में पानी का स्तर कम पड़ गया जो जल्दी ही सूखने के कगार पर है। वर्तमान में बाणगंगा में 18 में से पांच नलकूप ड्राई होकर सूख गए। शेष बचे 13 नलकूपों में पानी का स्तर कम पड़ गया। जलदाय विभाग सूत्रों का कहना है कि इनमें से तीन से चार नलकूप ऐसे है जो एक महीने में ड्राई हो जाएगे।
600 फीट खुदते है नलकूप
जलदाय विभाग बाणगंगा में 600 फीट तक नलकूप खोदता है लेकिन इनमें 150 फीट खुदाई पर ही पानी मिल जाता है। लेकिन नलकूप में ऊपरी सतह का पानी दो से ढाई महीने के अंतराल में समाप्त हो जाता है।
इसलिए हो जाता है समाप्त पानी
जलदाय विभाग अधिकारियों ने बताया कि बाणगंगा नदी में जो पानी है वह ऊपरी सतह का है। यहां की मिट्‌टी ऐसी है जो ऊपरी सतह के पानी को रखती है।

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