पानी हुआ दूषित:मनाेहरा तालाब में कभी कमल खिलते थे, अब गंदे नालों का पानी बिगाड़ रहा सूरत

चाकसू2 महीने पहले
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देखरेख के अभाव में कमल नहीं - Dainik Bhaskar
देखरेख के अभाव में कमल नहीं
  • अब पीने योग्य भी नहीं रहा पानी, पाल पर बने कुओं का पानी भी हुआ दूषित

विष्णु कुमार मामोडिया | प्रशासनिक अनदेखी के चलते चाकसू कस्बे के पूर्वी छोर पर स्थित मनोहरा तालाब अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। जब इस तालाब का पानी स्वच्छ था तब यहां कमल खिलते थे साथ ही पाल पर बने मंदिरों के भगवान की पूजा-अर्चना, अभिषेक तथा बड़े जीमण में दाल बनाने के काम लिया जाता था। वहीं आज यह पानी किसी काम नहीं रहा। इतना ही नहीं यह पानी जानवरों के पीने योग्य भी नहीं रहा। प्रशासनिक अनदेखी के चलते पिछले तीन दशकों से इस तालाब में गंदे नालों का पानी आ रहा है।

इतना ही नहीं मनोहरा तालाब के पाल पर स्थित कुओं का पानी जो कभी मीठा, ठण्डा, अमृत तुल्य हुआ करता था वह आज पीने योग्य भी नहीं रहा। नगरपालिका ने इस तालाब के कुछ क्षेत्र में सुरक्षा दीवार का निर्माण एवं घाटों का जीर्णोद्धार करवाया है। बोटिंग के लिए नाव भी चलाई लेकिन चाकसू में सीवरेज लाइन नहीं होने तथा तालाब पर ट्रीटमेंट प्लांट नहीं होने के कारण इसमें कॉलोनियों का गंदा पानी लगातार आ रहा है। बरसात विदा होने के 15 दिन बाद भी तालाब ऑवर फ्लो चल रहा है। तालाब में चारो ओर गंदगी पसरी है।

देखरेख के अभाव में कमल नहीं पूर्व में मनोहरा तालाब में काफी संख्या में कमल के फूल खिलते थे। मालोराई तलाई में भी गडूल(कमल) खिलते थे। 1981 में आई बाढ के बाद यहां कमल लुप्त हो गया। उचित देखरेख के अभाव में तालाब खाली होने पर कई जंगली झाडिया भी उग जाती है। जिनकी पर्याप्त रूप से सफाई नही हो पाती।जलझूलनी पर ठाकुर जी करते हैंै जलविहारजलझूलनी एकादशी पर तालाब में चाकसू कस्बे के प्रमुख मंदिरों चतुर्भुज जी, जगमोहन जी, शालिगराम जी, त्रिलोकी नाथ जी, राम लक्ष्मण जी मंदिरों के ठाकुर जी जलविहार करते हैं । जलविहार के बाद श्रद्धालु तालाब के पानी को पंचामृत के रूप में लेते थे लेकिन अब यह पानी किसी काम का नहीं रहा।

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