पर्यावरण शुद्धि के लिए यज्ञ जरूरी:शरीर के लिए अन्न, तो पर्यावरण शुद्धि के लिए यज्ञ जरूरी

चौमू5 दिन पहले
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  • महारकलां में 25 वर्ष बाद सहस्त्र चंडी यज्ञ का आयोजन

ग्राम पंचायत महार कलां नौ दिवसीय 108 कुंडात्मक सहस्त्र चंडी महायज्ञ का शनिवार को विधिवत पूजा अर्चना व पूर्णाहुति के साथ समापन हुआ। इस मौके पर यज्ञ आयोजक संत श्यामदास त्यागी व गंगादास महा राम ने बताया कि धर्म व अध्यात्म के बीच भक्ति की पिछले नौ दिन से चल रहा यज्ञ बह रही गूंज शनिवार को पूर्णाहुति के साथ श्री 1008 सहस्र चंडी महायज्ञ का समापन हो गया है। महायज्ञ के अंतिम दिन पूर्णाहुति में भाग लेने वालों व श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। जयपुर, सीकर सहित कई जिलों से आए संतो की निगरानी में महायज्ञ के प्रधान यजमान के हाथों हवन कुंड में घी, धूप की आहूति दी गई। हवन अनुष्ठान में पंडित विशाल शास्त्री ने बताया कि नौ दिनों तक मां चंडी का 1008 पाठ किया गया। इस मौके पर महाराज ने कहा कि जिस प्रकार शरीर को अन्न की जरूरत होती है, उसी तरह पर्यावरण शुद्ध रखने के लिए यज्ञ आवश्यक है। संतजनों ने बताया कि महार कलां की देवभूमि पर करीब 25 वर्ष के बाद सहस्त्र चंडी यज्ञ का आयोजन सफलतापूर्ण आमजन के सहयोग से किया गयाहै।

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