ख्रुशखबर:ले आउट प्लान कमेटी की बैठक में शहर की 12 नई काॅलाेनियां और अप्रूव्ड की

दौसाएक महीने पहले
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  • खातेदार से नगर परिषद के नाम भूमि चढ़ते ही पट्टे जारी करने का काम शुरू हाेगा

पट्टे लेने का इंतजार कर रहे 12 काॅलाेनियाें के लाेगाें का सपना जल्द ही पूरा हाेगा। नगर परिषद की ले आउट प्लान कमेटी की सभापति ममता चौधरी व कमिश्नर पूजा मीणा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में 12 नई काॅलानी और अप्रूव्ड की गई हैं। अब 90-ए यानी खातेदार से नगर परिषद के नाम भूमि चढ़ते ही पट्टे जारी करने का काम शुरू हाेगा। 90-ए की प्रक्रिया पूरी हाेने में 15-20 दिन लगेंगे। यानी नई साल में लाेगाें काे पट्टे मिलने शुरू हाे जाएंगे।

नगर परिषद के स्तर पर अप्रूव्ड की गई नई काॅलाेनियाें में अरावली विहार, वासुदेव नगर, करणी नगर विस्तार, पायलेट नगर विस्तार, निर्झर कालाेनी, सूरज कुंड याेजना, सुमित्रा विहार आगरा राेड, बलराम नगर, बाबाजी की छावनी राेड शिव एनक्लेव, तारूस विहार जाेशी कालाेनी, राजनगर व मधुवन विहार सेकंड शामिल हैं। अगली कार्रवाई 90ए की हाेगी, जिसके अंतर्गत खातेदार की भूमि नगर परिषद के नाम चढ़ाई जाएगी। इस प्रक्रिया में दाे से तीन सप्ताह का समय लगेगा। इसके बाद लाेग पट्टे के लिए आवेदन कर सकेंगे। क्या हाेगा पट्टा शुल्क: इन दिनाें प्रशासन शहराें के संग अभियान के तहत शिविर लगाए जा रहे हैं, जिसमें नियमन शुल्क बहुत कम है।

आवासीय भूमि का पट्टा लेने का 75 रुपए वर्ग मीटर से नियमन शुल्क, 75 रुपए वर्ग मीटर की दर से ही 10 साल की लीज राशि, 500 रुपए निर्माण स्वीकृत राशि लगेगी। उपवि भाजन पर 25 रुपए वर्ग मीटर से अलग राशि देनी हाेगी। निर्माण में छूट रहेगी, यानी मास्टर प्लान में नक्शे के अनुसार क्षेत्रफल से राशि की गणना की जाएगी। दूसरी और कामर शियल में 100 रुपए वर्ग मीटर, लीज 100 रुपए वर्ग मीटर तथा 300 रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से विकास शुल्क लिया जाएगा। पट्टे जारी करने में दाैसा जिला जयपुर संभाग में फर्स्ट: पट्टे जारी करने के मामले में जयपुर संभाग में दाैसा जिला फर्स्ट है। नगर परिषद कमिश्नर पूजा मीणा के अनुसार पट्टे के लिए 1927 लाेगाें ने आवेदन किया है, जिसमें 1410 (73.17 फीसदी) पट्टे जारी किए जा चुके हैं।

विभिन्न कारणाें से 233 पट्टे निरस्त भी किए हैं। दाेनाें काे मिलाकर 1643 (85.26 फीसदी) प्रकरणाें का निस्तारण किया जा चुका है। जारी किए पट्टाें से 428.74 लाख रुपए का राजस्व मिला है। सभापति भी नगर परिषद में बैठे ताे लाेगाें काे मिल सुविधा: लाेगाें काे नगर परिषद में पट्टाें तथा दूसरे कार्याें के लिए भटकना पड़ता है। इस संबंध में कमिश्नर पूजा मीणा का कहना है कि मेरे पास फाइल आते ही साइन कर देती हूं। मेरे कारण किसी की फाइल अटकती नहीं है। साथ ही यह भी कहा कि सभापति ऑफिस में नहीं बैठती हैं। ऐसे में जाे काम नगर परिषद में ही हाे जाना चाहिए, उसके लिए फाइल सभापति के घर जाती है। सभापति भी नगर परिषद में बैठे ताे लाेगाें काे सुविधा मिलेगी तथा उन्हें भटकना नहीं पड़ेगा। दूसरी और सभापति ममता चौधरी का कहना है कि 3-4 दिन घरेलू कार्य व शादी- ब्याह में व्यस्त रहने के कारण फाइल का ढेर लग गया, लेकिन अब फुर्सत हाेने पर मंगलवार काे ही 150 फाइल नगर परिषद भेजी हैं।

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