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भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट:जिले के 18 में से 17 बांध पूरी तरह खाली, बारिश नहीं हुई तो बिगड़ सकते हैं हालात

दाैसा2 महीने पहलेलेखक: सतीश सिंह
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बारिश के बिना सूखा पड़ा चांदराना का बांध। - Dainik Bhaskar
बारिश के बिना सूखा पड़ा चांदराना का बांध।
  • पिछले साल सामान्य से कम हुई बारिश, इस साल मानसून समय पर नहीं आया तो संकट भारी
  • जिले में 26473 हेक्टेयर में नहरों से सिंचाई होती है, पिछले साल मोरेल बांध से हुई थी

जिले में पिछले साल सामान्य से कम बारिश हुई। इसके चलते बांधों में पानी की आवक कम हुई थी। अब जिले में 18 में से 17 बांध खाली हैं। इस बार मानसून समय पर नहीं आया ताे पीने के पानी के लाले पड़ जाएंगे। वहीं रबी की फसल पर संकट मंडरा सकता है।

जिले में सामान्य बारिश 612 मिमी मानी जाती है जबकि पिछले साल 455.52 मिमी औसत बारिश हुई थी। इससे 18 में से 10 बांधाें में पानी की आवक हुई थी। इनमें केवल माेरेल बांध में अब 0.9 फुट पानी है। अन्य बांध खाली है। जिले में 40 हजार 383 हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र है। इसमें 26 हजार 473 हेक्टेयर में नहराें से सिंचाई हाेती थी, लेकिन पिछले साल एक मात्र माेरेल बांध से ही सिंचाई हाे सकी थी।

माेरेल बांध में 17.6 फुट ही पानी आया था। इससे जिले में करीब 1500 हेक्टेयर में सिंचाई हुई थी। अन्य बांधाें में पानी कम आया था। इस बार मानसून समय पर नहीं आया ताे पानी के लिए स्थिति बिगड़ सकती है। भूजल स्तर गिरने से कुओं व ट्यूबवेलाें में पानी कम हाे गया।

4 साल से खाली है 6 बांध

जिले में 18 बांधाें में 6 बांध ऐसे हैं, जाे 4 साल से खाली है। इनमें पानी नहीं आया। कालाखाे, खारली, दक्षिण सागर बिनाेरी सागर, राहुवास व दिवांचली बांध 4 साल से खाली हैं। इनमें खारली बांध ऐसा हैं, जिसमें पिछले एक दशक में एक बार वर्ष 2014 में 5.10 फुट पानी आया था।

पिछले साल जिले में सामान्य से कम हुई बारिश

पिछले साल जिले में सामान्य से कम बारिश हुई थी। जिले में माेरेल बांध से ही रबी फसल में सिंचाई हाे सकी थी। अन्य बांधाें में पानी कम आया था।

-केदारलाल मीणा, एक्सईएन,जल संसाधन विभाग,दाैसा

बांधाें से सिंचित क्षेत्र

जिले में 18 बांध हैं। बांधाें से 26 हजार 473 हेक्टेयर में सिंचाई हाेती है। इनमें माेरेल बांध सबसे बड़ा है। माेरेल बांध से 11963 हेक्टेयर सिंचाई हाेती है। वहीं माधाेसागर बांध के अधीन 2382, कालाखाे के 2040, दक्षिण सागर बिनाेरी सागर के 1570, सैंथल सागर 1135, झिलमिली 944, सिनाेली 826, रेडिया 763, चांदराना 710, भंडारी 695, गेटाेलाव 684, राहुवास 618, जगरामपुरा 602, खारली 486, काेट 352, सिंथाेली 316, दिवांचली 243 व काेंड्रा बांध के अधीन 144 हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र है।

भू जल स्तर में गिरावट, मोरेल बांध में मात्र 1 फुट रहा पानी

कमलेश आसिका, लालसोट. उपखंड के कुएं, बावड़ी, बांध व तालाब-तलैया सूखे पड़े हैं। हालत यह है कि वर्तमान में 17 फुट पानी से लबालब भरा रहने वाला एशिया का मिट्टी से बना सबसे बड़ा बांध रीता है। बांध का गेज क्षेत्र सूख चुका है। बांध में मात्र 1 फुट का पानी बचा है जाे पक्षियों को मिल रहा है।

प्रमुख जल स्रोत नेशनल हाइवे 11बी पर स्थित बावड़ी सरकारी देखरेख के अभाव में क्षतिग्रस्त पड़ी है। पूर्व पालिका उपाध्यक्ष पूनमचंद भिवाल के कार्यकाल में जन सहभागिता से बावड़ी की चारदीवारी बनाई थी। इसके बाद से आज तक प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया। बावड़ी क्षतिग्रस्त हो रही है व कुआं सूख गए है।

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