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मानसून आने की दस्तक:बया ने बना लिए घोंसले; मानसून से पहले अपने लिए सुरक्षित घोंसले का निर्माण करता है

दौसा25 दिन पहले
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मानसून के आने की दस्तक का आभास सबसे पहले पक्षियों को होता है। ऐसा ही एक पक्षी है बया जो वीवर बर्ड के नाम से जाना जाता है। मानसून से पहले अपने रहने के लिये वातानुकूलित और सुरक्षित घोंसले का निर्माण करता है। जिले के अरावली क्षेत्र में पापड़दा, नांगल राजावतान, लालसोट गीजगढ, लवाण आदि जगहों पर इन दिनों बया पक्षी अपना घोंसला निर्माण कर रहे हैं।

वैसे तो यह अपना घोंसला का निर्माण अप्रेल के प्रारंभ में ही कर देता है, जिसे पूर्ण करने में लगभग 28 से 30 दिन का समय लगता है। क्योंकि इनका प्रजनन काल मई से सितंबर तक होता है। घोंसला निर्माण के लिए विशेष रूप से लंबी घास, कूंचे की पत्तियां या खजूर की पत्तियां जो 20 से 60 सेमी लंबाई में काटकर लायी जाती हैं।

साथ ही गीली मिट्टी से घोंसले के आंतरिक भागों पर कहीं कहीं लेप भी किया जाता है ताकि तेज हवाओं से घोंसले को क्षति न पहुंचे। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की चौथी अनुसूची में शामिल इस पक्षी की संख्या घटने का कारण बढ़ते शहरीकरण, वृक्षों का विनाश और खासकर घोंसला निर्माण में काम आने वाले सरकंडे, मूंज और खजूर के वृक्षों की घटती संख्या है।

प्रमुख प्राणी विज्ञानी और पक्षीविद् डॉ सुभाष पहाड़िया के अनुसार सामाजिक और समूह में रहने वाला बया विश्व का सबसे प्राचीन और कुशल शिल्पकार है और इसकी अद्भुत शिल्पकारी इनके घोंसले को देखने मे मिलती है। घोंसले का निर्माण नर बया के द्वारा किया जाता है। नर का घोंसला बनाने का उद्देश्य मादा बया को आकर्षित कर प्रजनन करना होता है।

इसके लिए नर एक कंटीले पेड़ पर जिसके नीचे खाई या पानी एकत्रित हो वहां ये कई सारे घोंसलों का निर्माण करते हैं। इस समय नर अपने पंखों को बार बार फड़फड़ा कर मादा को घोंसले की ओर आकर्षित करता है। मादा बया घोंसले का निरीक्षण करती है। पसंद आने पर वह नर को उसका संकेत दे देती है, अन्यथा नर फिर दूसरा घोंसला बनाने में लग जाता है।

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