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  • Before The Exam, Taking The Candidate To A Secret Place And Solving The Paper, Reaches The Exam Center, There Can Be Big Revelations In The Investigation Of Gang, SOG And Police.

मोटी रकम में होता है पेपर का सौदा:परीक्षा से पहले गोपनीय जगह पेपर सॉल्व करा अभ्यर्थी को एग्जाम सेंटर पहुंचाता है गिरोह, SOG व पुलिस की पड़ताल में हो सकते हैं बड़े खुलासे

दौसा6 दिन पहले
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दौसा पुलिस की गिरफ्त में आरोपी। - Dainik Bhaskar
दौसा पुलिस की गिरफ्त में आरोपी।

प्रदेश में बेरोजगारों को नौकरी का झांसा देकर ठगी करने वाले गिरोह सक्रिय हैं और खुलेआम लूट मचा रहे हैं। पहले भी इस तरह की कई वारदातें सामने आ चुकी हैं, जिनमें बेरोजगार युवक गिरोह के चंगुल में फंसकर मोटी रकम गवां चुके हैं। दौसा पुलिस की विशेष टीम की गिरफ्त में आए विजेन्द्र मीणा व यादराम मीणा से पूछताछ में भी चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। गिरोह द्वारा नीट जैसी नेशनल लेवल की परीक्षाओं के लिए 25 से 30 लाख रुपए लिए जाते हैं तो SSC, REET आदि के पेपर दिलवाने के लिए 10 से 15 लाख रुपए में सौदा तय किया जाता है। इसके बाद अभ्यर्थी को पेपर हल कराया जाता है। गिरोह के पास मिले डॉक्यूमेंट के आधार पर पुलिस द्वारा उन अभ्यर्थियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है, जिन्होंने पेपर का सौदा कर नौकरी लगने की जुगत की थी।

कोचिंग सेंटर व लाइब्रेरी में करते हैं सम्पर्क
अवैध रूप से भर्तियों के पेपर बेचकर ठगी करने वाले गिरोह का राजधानी जयपुर समेत प्रदेश के अधिकांश जिलों में नेटवर्क बना हुआ है। जिलों में गिरोह के सदस्य वहां के स्थानीय ही रहने वाले लोग होते हैं, जो कोचिंग सेंटर व लाइब्रेरी आदि में भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं से सम्पर्क करते है। सौदा तय होने के बाद परीक्षा से पहले पेपर हल कराने का झांसा देकर मोटी रकम वसूली जाती है। इसके बाद परीक्षा से एनवक्त पहले गिरोह द्वारा पेपर हल कराए जाते हैं। हालांकि पुलिस टीम इसे लेकर पड़ताल में जुटी हुई है।

25 से 30 लाख की करते हैं डिमांड
गिरोह द्वारा नीट जैसी नेशनल लेवल की परीक्षाओं के पेपर के दिलवाने की एवज में 25 से 30 लाख रुपए में सौदा तय किया जाता है। वहीं राज्य स्तरीय परीक्षाओं में पास कराने के लिए 10 से 20 लाख रुपए तक लिए जाते हैं। सौदा तय होने के बाद गिरोह अभ्यर्थी के ओरिजनल डॉक्यूमेंट व एडवांस राशि लेता है। इसके बाद परीक्षा से पहले किसी गुप्त जगह ले जाकर पेपर सॉल्व कराया जाता है। यहां से गिरोह द्वारा ही उसे एग्जाम सेंटर पर पहुंचाया जाता है। बताया जा रहा है कि एग्जाम के बाद अभ्यर्थी को फिर से गिरोह के पास जाना पड़ता है और पेपर मैच होने की स्थिति में सौदे के अनुसार बाकी राशि ली जाती है।

एसओजी की रडार पर नकल माफिया
जयपुर एसओजी की टीम ने शनिवार को दौसा से तीन लोगों को हिरासत में लिया था। जिसमें सामने आया था कि 26 सितंबर को होने वाली रीट की परीक्षा में जिले के बाहर तैनात शिक्षकों व कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई गई थी। मामले का भंडाफोड़ होने पर विभाग ने बाहर के कर्मचारियों की ड्यूटी हटा दी है। अब चयन कराने व पेपर मुहैया कराने वाले इस गिरोह के लोगों की गिरफ्तारी से और भी गड़बड़झाला उजागर हो सकता है। दौसा में नकल माफिया के सक्रिय होने की सूचना पर एसओजी भी निगाह रखे हुए है।

एसपी कर रहे मॉनिटरिंग
पुलिस गिरफ्तार आरोपियों को 3 दिन की रिमांड पर लेकर राज उगलवाने का प्रयास कर रही है। इसके साथ ही गिरोह से जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी पता लगाने में जुटी है। पुलिस को अंदेशा है कि इस गिरोह के तार काफी उपर तक जुड़े हुए हैं। इनसे पूछताछ में अन्य खुलासे होने के बाद दूसरे लोगों की गिरफ्तारी होने के कयास लगाए जा रहे हैं। पुलिस पूरे प्रकरण की गंभीरता को भांपते हुए एसपी अनिल बेनीवाल के निर्देशन में गहन जांच पड़ताल में जुटी हुई है। वहीं जयपुर एसओजी भी मामले पर नजर बनाए हुए हैं।

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